
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Written By: Anju Rawat | Published : February 26, 2026 1:30 PM IST
Medically Verified By: Dr. Pavitra Shankar
Board Exam Stress: बोर्ड एग्जाम सिर्फ बच्चों के नहीं, पूरे परिवार की परीक्षा होते हैं। इस समय बच्चों पर पढ़ाई का दबाव, अच्छे नंबर लाने की उम्मीद और भविष्य की चिंता, सभी चीजें एक साथ हावी रहती हैं। बोर्ड एग्जाम वाले बच्चों में इसका स्ट्रेस साफ देखने को भी मिलता है। इस समय उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत होती है, अपने पैरेंट्स की, जो उन्हें समझें और उनके मेंटल हेल्थ का भी ध्यान रखें। मनोचिकित्सकों के अनुसार, इस दौरान अगर बच्चे की मेंटल हेल्थ का ध्यान न रखा जाए, तो उनमें घबराहट और एंग्जाइटी बढ़ सकती है। बच्चों में चिड़चिड़ापन और ध्यान की कमी जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में माता-पिता की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। तो आइए, आकाश हेल्थकेयर की एसोसिएट कंसल्टेंट-साइकेट्रिस्ट डॉ. पवित्रा शंकर (Dr. Pavitra Shankar, Associate Consultant- Psychiatry, Aakash healthcare) से जानते हैं कि बोर्ड एग्जाम के दौरान बच्चे को मेंटली स्ट्रॉन्ग कैसे बनाया जाए?
लगातार "90 फीसदी से ऊपर लाने हैं” या “फलां के बच्चे से बेहतर करना है” जैसी बातें बच्चे पर दबाव डालती हैं। इसलिए बेहतर है कि आप अपने बच्चे के एफर्ट्स और उसकी मेहनत की सराहना करें। जब बच्चे को लगता है कि उसकी कोशिशों को समझा जा रहा है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है और डर कम होता है। इससे बच्चा मेंटली स्ट्रॉन्ग बना रहेगा और उसका ध्यान पढ़ाई में लगा रहेगा।
एक बैलेंस डेली रूटीन बच्चे के दिमाग को स्थिर रखता है। पढ़ाई, ब्रेक, खेल और नींद, बच्चे के लिए सभी चीजों का समय तय करें। हालांकि, आपको स्ट्रिक्ट रूटीन फॉलो नहीं करवाना है। अगर किसी दिन बच्चा पढ़ाई कम करे, तो उसे डांटने या डराने की जरूरत नहीं। खासकर, शुरुआत में बच्चे को इस रूटीन के साथ फ्लेक्सिबल होने दें। फ्लेक्सिबल रूटीन बच्चे को मेंटली हेल्दी बनाए रखने में मददकरता है।
बोर्ड एग्जाम के समय बच्चे अक्सर नींद से समझौता कर लेते हैं, जो एक बड़ी गलती हो सकती है। बोर्ड एग्जाम के दौरान बच्चों को मानसिक रूप से स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। उनके लिए 7 से 8 घंटे की नींद लेना जरूरी है, इससे याददाश्त को सही रखने और फोकस बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी होता है। सोने से पहले मोबाइल या टैबलेट का ज्यादा इस्तेमाल दिमाग को ओवरएक्टिव कर देता है। इसलिए बच्चों को रात में सोते समय मोबाइल फोन देने से बचें। सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन बंद कराना बहुत जरूरी है।
अगर बच्चा चुप-चुप रहने लगा है, बार-बार गुस्सा करता है या रोने लगता है, तो इसे बच्चे का ड्रामा बिल्कुल न समझें। इस स्थिति में आपको बच्चे से शांति से बात करनी चाहिए। उससे पूछें कि उसके मन में किस बात का डर है। जब बच्चे को यह भरोसा मिलता है कि उसे बिना जजमेंट के सुना जा रहा है, तो उसकी चिंता आधी हो जाती है। इसलिए जब भी बच्चा परेशान दिखे, तो उसे सुनें और उसकी स्थिति को समझने की कोशिश करें।
बच्चे को मेंटली स्ट्रॉन्ग बनाए रखने के लिए उसे रोजाना 10–15 मिनट की डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करने की सलाह दें। बच्चे को हल्का योग या शांत म्यूजिक सुनने को कहें, इससे बच्चे का दिमाग रिलैक्स होगा। एग्जाम से पहले अगर बच्चा घबरा रहा है, तो उसे लंबी सांस लेने और धीरे-धीरे छोड़ने को कहें। इस तकनीक से एंग्जाइटी को तुरंत कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।