
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : August 3, 2022 10:17 AM IST
Tips of parenting: ऐसा कहते हैं कि बच्चे किस्मत से ही मिलते हैं और इसलिए उन्हें बड़े प्यार से रखा जाता है। लेकिन कई बार बच्चों को दिया गया ज्यादा प्यार उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है। सभी पेरेंट्स चाहते हैं कि उनके बच्चे की मुंह मांगी चीज पूरी हो और उसे दुनिया की सारी खुशी मिले। बच्चे के ये खुशियां देने के लिए वे अपनी जी-जान लगा देते हैं। बच्चे के लिए प्यार-दुलार बहुत जरूरी होता है, लेकिन वो कहते हैं ना कि हर चीज एक लिमिट में ही होती है। इसलिए जरूरत से ज्यादा प्यार व दुलार भी उनके जीवन के लिए नुकसानदायक हो सकता है। जरूरत से ज्यादा लाड-प्यार यानी ओवरपेरेंटिंग की कुछ आदतें ऐसी हैं, जिन्हें पेरेंट्स को तुरंत छोड़ देना चाहिए।
आपने भी देखा होगा कुछ माता-पिता दूसरों के आगे और खुद बच्चे के आगे ही उसकी खूब तारीफ करते हैं। वैसे तो तारीफ करना अच्छी बात है, लेकिन वह समय पर ही सही रहती है। बार-बार और ज्यादा तारीफ करने से बच्चे को तारीफ सुनने की आदत पड़ जाती है और उनकी बुराई सुनने की आदत खत्म हो जाती है। सिर्फ तारीफ सुनने की आदत से बच्चे का मनोबल कम हो जाता है।
यह बात हमेशा ध्यान में रखें कि हर किसी को अपनी जिंदगी की जंग खुद ही लड़नी पड़ती है। यह बात थोड़ी फिल्मी जरूर है,लेकिन यह पूरी तरह से सच है। इसलिए जब तक बच्चा आपको मदद के लिए न बुलाए तब तक आए न आएं। अक्सर मां-बाप अपने बच्चे की छोटी-छोटी परेशानियों में भी उनकी हेल्प करने के लिए उतावले हो जाते हैं और ऐसा करके आप उन्हें फ्यूचर के लिए कमजोर बना रहे हैं। उन्हें चीजें सीखने दें और कोशिश करने दें।
यह ओवर-पेरेंटिंग का सबसे बड़ा साइन है। देखा गया है कि मां-बाप अक्सर अपने लाडले बच्चे की सारी जिद पूरी करने लग जाते हैं। उन्हें उनकी जरूरत की चीज और वे चीजें देना जरूरी है जिनसे उन्हें अच्छा लगे। लेकिन हर एक जिद पूरी करने से भी आपका बच्चा बिगड़ सकता है। क्योंकि जो चीज बच्चे को आसानी से मिल पाती है, तो वे उसका महत्व नहीं समझते हैं। इसलिए जरूरी है कि उसकी सारी जिद पूरी न की जाए, ताकि वे चीजों की वैल्यू करना सीखें।
हर माता-पिता के अपने बच्चे के प्रति बहुत सपने होते हैं और कोई चाहता है कि उनका बच्चा उनकी उम्मीदों पर खरा उतरे। अपने बच्चे से बहुत ज्यादा उम्मीद रखना भी ओवर पेरेंटिंग का ही संकेत है और इससे बच्चे से दिमाग पर दबाव तो पड़ता है ही साथ ही वह चिड़चिड़ा भी हो जाता है। इसलिए आपके द्वारा की जा रही उम्मीदें बच्चे के लिए भी जायज होनी चाहिए और उस पर उनका कोई दबाव नहीं होना चाहिए।
कुछ पेरेंट्स अपने बच्चे की जरूरत से ज्यादा चिंता करते हैं। अगर वह बच्चा है तो उसे गोद में ही रखते हैं और अगर बड़ा है तो उसे हर छोटे-छोटे कामों पर टोकते हैं। ये चीजें बच्चे को परेशान कर देती हैं और इस कारण से वह बिगड़ने लगता है। जिस प्रकार मां-बाप का बच्चे के लिए बहुत ज्यादा प्यार जताना ठीक नहीं है, उसी प्रकार बहुत ज्यादा चिंता करके दिखाना भी बच्चा नकारात्मक रूप से प्रभावी हो सकता है।