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15 महीने के बच्चे को बार-बार पॉटी आने का क्या कारण है?

क्या आप अपने 15 महीने के बच्चे के बार-बार पॉटी करने से परेशान हैं? अगर हां, तो परेशान न हों। इस लेख में हम आपको इसे पीछे के सामान्य कारणों के बारे में बताएंगे। आइए जानते हैं-

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Written By: Kishori Mishra | Updated : July 29, 2026 12:30 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Pinakin Patel

15 महीने की उम्र में अगर बच्चा अचानक दिन में कई बार पॉटी करने लगे, तो ज्यादातर माता-पिता घबरा जाते हैं। उनके मन में सवाल उठता है कि क्या यह सामान्य है, पेट का संक्रमण है या किसी गंभीर बीमारी का संकेत? अहमदाबाद स्थित नाराणया हॉस्पिटल की मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, कंसल्टेंट डॉ. पिनाकिन पटेल का कहना है कि  15 महीने के उम्र के बच्चों को बार-बार पॉटी होना हमेशा चिंता का विषय नहीं होता है। बार-बार पॉटी होना बच्चे के बढ़ते विकास और बदलती डाइट का हिस्सा होता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह किसी संक्रमण, फूड इंटॉलरेंस या अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कौन-सी स्थिति सामान्य है और कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

हर बच्चे का मल त्याग करने का पैटर्न होता है अलग

डॉ. पिनाकिन पटेल बताते हैं कि 15 महीने की उम्र तक आते-आते बच्चे सिर्फ दूध पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि अनाज, फल, सब्जियां और घर का सामान्य खाना भी खाने लगते हैं। जैसे-जैसे उनका पाचन तंत्र विकसित होता है, वैसे-वैसे मल त्याग की आदतों में भी बदलाव आना स्वाभाविक है।

Baby Poop

कुछ बच्चे दिन में सिर्फ एक बार पॉटी करते हैं। जबकि, कुछ 3 से 4 बार भी मल त्याग कर सकते हैं। अगर मल नरम लेकिन सामान्य आकार का है, बच्चा एक्टिव है, अच्छी तरह खाना खा रहा है और उसका वजन सही तरीके से बढ़ रहा है, तो बार-बार पॉटी करना आमतौर पर चिंता की बात नहीं है। माता-पिता को सिर्फ पॉटी की संख्या पर नहीं, बल्कि बच्चे के सामान्य पैटर्न में आए बदलाव और उसकी ओवरऑल हेल्थ पर ध्यान देना चाहिए।

15 महीने के बच्चे में बार-बार पॉटी होने के क्या कारण हैं?

अगर आपका बच्चा बार-बार पॉटी कर रहा है, तो इसके कुछ सामान्य कारण हो सकते हैं, जैसे-

1. वायरल पेट का संक्रमण

छोटे बच्चों में बार-बार दस्त होने की सबसे आम वजह वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस है। रोटावायरस और नोरोवायरस जैसे- वायरस इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके साथ दस्त, उल्टी, हल्का बुखार, भूख कम लगना और कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में यह संक्रमण कुछ दिनों में पर्याप्त तरल पदार्थ और सही देखभाल से ठीक हो जाता है।

2. टॉडलर्स डायरिया

कई स्वस्थ बच्चों में टॉडलर्स डायरिया नाम की स्थिति देखी जाती है। यह अक्सर उन बच्चों में होता है, जो जरूरत से ज्यादा फलों का जूस, मीठे ड्रिंक्स या फ्रुक्टोज और सॉर्बिटोल से भरपूर खाद्य पदार्थ खाते हैं। ऐसे बच्चों में पॉटी बार-बार और पतली हो सकती है, लेकिन वे सामान्य रूप से खेलते हैं, खाते हैं और उनका विकास भी ठीक रहता है। मीठे ड्रिंक्स कम करने और संतुलित आहार देने से यह समस्या अक्सर अपने आप ठीक हो जाती है।

3. फूड इंटॉलरेंस या फूड एलर्जी

कुछ बच्चों को कुछ विशेष खाद्य पदार्थ पचाने में परेशानी हो सकती है। खासकर तब जब वे हाल ही में किसी आंत के संक्रमण से उबरे हों। अस्थाई लैक्टोज इंटॉलरेंस या फूड एलर्जी की वजह से दस्त, पेट फूलना, पेट दर्द या वजन सही तरीके से न बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

4. कुछ गंभीर बीमारियां

अगर दस्त कई सप्ताह तक लगातार बने रहें, तो यह सीलिएक डिजीज, लंबे समय तक रहने वाले आंतों के संक्रमण, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) या शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है। हालांकि, ये स्थितियां कम देखने को मिलती हैं, लेकिन अगर बच्चे का वजन नहीं बढ़ रहा है, मल में खून आ रहा है या पाचन संबंधी दिक्कत लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

किन स्थितियों में डॉक्टर को दिखाने की है जरूरत?

अगर बार-बार पॉटी होने के साथ इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें-

  1. मल में खून या म्यूकस आना।
  2. लगातार उल्टी होना।
  3. तेज बुखार।
  4. पेट में तेज दर्द।
  5. बच्चा खाना या पानी पीने से मना करे।
  6. पेशाब कम आना।
  7. मुंह सूखना या रोते समय आंसू न आना।
  8. आंखें धंसी हुई दिखना।
  9. बच्चा बहुत ज्यादा सुस्त या नींद में रहना।
  10. वजन न बढ़ना या तेजी से घटना।
  11. 3-5 दिन बाद भी दस्त में सुधार न होना, इत्यादि।

डॉ. पटेल के अनुसार, छोटे बच्चों में डिहाइड्रेशन बहुत तेजी से हो सकता है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है।

बच्चे को बार-बार पॉटी हो रही है तो क्या करें?

अगर बच्चे को दस्त या बार-बार पॉटी हो रही है, तो घर पर कुछ आसान उपाय काफी मददगार साबित हो सकते हैं-

baby poops

  1. डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्तनपान या सामान्य दूध देना जारी रखें।
  2. बच्चे को पर्याप्त मात्रा में पानी और ओआरएस दें, ताकि शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न हो।
  3. खाना बिल्कुल बंद न करें, बल्कि उम्र के अनुसार सामान्य भोजन देते रहें।
  4. बच्चे को आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ जैसे खिचड़ी, चावल, केला, दही, उबली सब्जियां और सेब की प्यूरी दें।
  5. खाना बनाने से पहले और डायपर बदलने के बाद हाथ अच्छी तरह धोएं।
  6. बच्चे के पेशाब, भूख और एक्टिविटी पर नजर रखें।

डॉ. पिनाकिन पटेल का कहना है कि 15 महीने के बच्चे में बार-बार पॉटी होना हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होता। कई बार यह विकास के दौरान होने वाला सामान्य बदलाव या हल्का वायरल संक्रमण हो सकता है। लेकिन यदि दस्त लंबे समय तक बने रहें, बच्चा डिहाइड्रेट हो जाए, मल में खून आए या उसका वजन न बढ़े, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से सही इलाज मिल सकता है और बच्चा जल्दी स्वस्थ होकर सामान्य विकास करता रहता है।