
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Medically Verified By: Dr. Pinakin Patel
Toddler diarrhea symptoms
15 महीने की उम्र में अगर बच्चा अचानक दिन में कई बार पॉटी करने लगे, तो ज्यादातर माता-पिता घबरा जाते हैं। उनके मन में सवाल उठता है कि क्या यह सामान्य है, पेट का संक्रमण है या किसी गंभीर बीमारी का संकेत? अहमदाबाद स्थित नाराणया हॉस्पिटल की मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, कंसल्टेंट डॉ. पिनाकिन पटेल का कहना है कि 15 महीने के उम्र के बच्चों को बार-बार पॉटी होना हमेशा चिंता का विषय नहीं होता है। बार-बार पॉटी होना बच्चे के बढ़ते विकास और बदलती डाइट का हिस्सा होता है। हालांकि, कुछ मामलों में यह किसी संक्रमण, फूड इंटॉलरेंस या अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कौन-सी स्थिति सामान्य है और कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डॉ. पिनाकिन पटेल बताते हैं कि 15 महीने की उम्र तक आते-आते बच्चे सिर्फ दूध पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि अनाज, फल, सब्जियां और घर का सामान्य खाना भी खाने लगते हैं। जैसे-जैसे उनका पाचन तंत्र विकसित होता है, वैसे-वैसे मल त्याग की आदतों में भी बदलाव आना स्वाभाविक है।

कुछ बच्चे दिन में सिर्फ एक बार पॉटी करते हैं। जबकि, कुछ 3 से 4 बार भी मल त्याग कर सकते हैं। अगर मल नरम लेकिन सामान्य आकार का है, बच्चा एक्टिव है, अच्छी तरह खाना खा रहा है और उसका वजन सही तरीके से बढ़ रहा है, तो बार-बार पॉटी करना आमतौर पर चिंता की बात नहीं है। माता-पिता को सिर्फ पॉटी की संख्या पर नहीं, बल्कि बच्चे के सामान्य पैटर्न में आए बदलाव और उसकी ओवरऑल हेल्थ पर ध्यान देना चाहिए।
अगर आपका बच्चा बार-बार पॉटी कर रहा है, तो इसके कुछ सामान्य कारण हो सकते हैं, जैसे-
छोटे बच्चों में बार-बार दस्त होने की सबसे आम वजह वायरल गैस्ट्रोएंटेराइटिस है। रोटावायरस और नोरोवायरस जैसे- वायरस इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। इसके साथ दस्त, उल्टी, हल्का बुखार, भूख कम लगना और कमजोरी जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में यह संक्रमण कुछ दिनों में पर्याप्त तरल पदार्थ और सही देखभाल से ठीक हो जाता है।
कई स्वस्थ बच्चों में टॉडलर्स डायरिया नाम की स्थिति देखी जाती है। यह अक्सर उन बच्चों में होता है, जो जरूरत से ज्यादा फलों का जूस, मीठे ड्रिंक्स या फ्रुक्टोज और सॉर्बिटोल से भरपूर खाद्य पदार्थ खाते हैं। ऐसे बच्चों में पॉटी बार-बार और पतली हो सकती है, लेकिन वे सामान्य रूप से खेलते हैं, खाते हैं और उनका विकास भी ठीक रहता है। मीठे ड्रिंक्स कम करने और संतुलित आहार देने से यह समस्या अक्सर अपने आप ठीक हो जाती है।
कुछ बच्चों को कुछ विशेष खाद्य पदार्थ पचाने में परेशानी हो सकती है। खासकर तब जब वे हाल ही में किसी आंत के संक्रमण से उबरे हों। अस्थाई लैक्टोज इंटॉलरेंस या फूड एलर्जी की वजह से दस्त, पेट फूलना, पेट दर्द या वजन सही तरीके से न बढ़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। 
अगर दस्त कई सप्ताह तक लगातार बने रहें, तो यह सीलिएक डिजीज, लंबे समय तक रहने वाले आंतों के संक्रमण, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD) या शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है। हालांकि, ये स्थितियां कम देखने को मिलती हैं, लेकिन अगर बच्चे का वजन नहीं बढ़ रहा है, मल में खून आ रहा है या पाचन संबंधी दिक्कत लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
अगर बार-बार पॉटी होने के साथ इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें-
डॉ. पटेल के अनुसार, छोटे बच्चों में डिहाइड्रेशन बहुत तेजी से हो सकता है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है।
अगर बच्चे को दस्त या बार-बार पॉटी हो रही है, तो घर पर कुछ आसान उपाय काफी मददगार साबित हो सकते हैं-

डॉ. पिनाकिन पटेल का कहना है कि 15 महीने के बच्चे में बार-बार पॉटी होना हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होता। कई बार यह विकास के दौरान होने वाला सामान्य बदलाव या हल्का वायरल संक्रमण हो सकता है। लेकिन यदि दस्त लंबे समय तक बने रहें, बच्चा डिहाइड्रेट हो जाए, मल में खून आए या उसका वजन न बढ़े, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से सही इलाज मिल सकता है और बच्चा जल्दी स्वस्थ होकर सामान्य विकास करता रहता है।