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Written By: Anshumala | Updated : July 5, 2018 12:10 PM IST
कई बच्चों में आड़े-टेढ़े और हद से ज्यादा बाहर निकले हुए दांतों की समस्या होती है। इस कारण उन्हें कहीं आने-जाने में झिझक और शर्म भी महसूस होती है। बाहर निकले हुए दांतों को ब्रेसेस टेक्नीक से ठीक किया जा सकता है। जहां कई बच्चे अपनी स्माइल व लुक को बेहतर करने के लिए व्याकुल रहते हैं, वहीं कुछ ब्रेसेस से घबराते भी हैं। परफेक्ट टीथ नहीं होने पर उसे नई-नई ब्रेसेस टेक्नीक से ठीक किया जा सकता है। दांत बाहर की ओर निकलने के मुख्य कारण हैं इर्रेगुलर टीथ, मालअलाइनमेंट, क्रुक्ड टीथ या फिर अपर और लोअर जॉ के एक ही साइज के न होने से भी समस्या उत्पन्न होती है। अपर जॉ जब लोअर जॉ से बड़ा हो, तो उसे ओवरबाइट कहते हैं और जब लोअर जॉ अपर जॉ से बड़ा हो, तो उसे अंडरबाइट कहते हैं। दोनों ही अवस्था में इसे मैलोक्लुजन कहते हैं, जिसका अर्थ होता है 'बैड बाइट"। यह मुंह के शेप को परिभाषित करता है। ऐसी स्थिति में डेंटिस्ट या ब्रेसेस स्पेशलिस्ट ही तय करते हैं कि बच्चों को ब्रेसेस की जरूरत है या नहीं।
ब्रेसेस के प्रकार
आज से कुछ साल पहले ब्रेसेस सिर्फ मेटल के ही आते थे पर नई तकनीक के आने से इसमें भी विविधता आ गई है। मेटल ब्रेसेस के अलावा सेरामिक, इनविजिबल और लिंगुअल ब्रेसेस भी उपलब्ध हैं। एक बार दांतों पर ब्रेसेस लग जाए, तो उसे कम से कम दो साल बाद ही निकाला जाता है। इसमें मिनिमम खर्च 20 हजार और मैक्सिमम डेढ़ लाख तक का होता है। आप चाहें, तो अपने बच्चे को क्लियर ब्रेसेस भी लगवा सकते हैं, क्योंकि यह दांतों के रंग के ही होते हैं। लिंगुअल इनविजिबल ब्रेसेस दांतों के पीछे लगाए जाते हैं। यदि बच्चा इसके बारे में दोस्तों को बताएगा भी नहीं, तो भी उन्हें पता भी नहीं चलेगा।
क्या होता है ब्रेसेस लगवाने पर
ब्रेसेस लगवाने के बाद दांतों पर लगातार दबाव बना रहता है, जिससे कुछ तय समय में दांत सीधे हो जाते हैं। इसे निकालने के बाद रिटेनर लगाया जाता है। यह एक प्रकार का मेटल वायर लगा हुआ स्मॉल और हार्ड पीस माउथगार्ड की तरह होता है। यह स्ट्रेट हुए दांतों को और अच्छी तरह से फिट करने के लिए छह या सालभर के लिए लगाया जाता है। ब्रेसेस निकाले जाने के बाद भी दांतों की अच्छी तरह से देखभाल करनी होती है। जब भी तुम्हें लगे कि वायर लूज या वायर से चुभन महसूस हो रही है, तो डेंटिस्ट से तुरंत मिलो।
हाइजीन हैबिट्स
बच्चे को यदि ब्रेसेस लगवाया है, तो हाइजीन का भी खास ध्यान रखना होगा। सुबह-शाम प्रत्येक दिन ओरल हाइजीन रुटीन निर्धारित करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है, पर अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ ऑर्थोडोन्टिस्ट (एएओ) के अनुसार, निम्म आदतों को शामिल करने से दांतों के साथ ब्रेसेस भी साफ रह सकते हैं-
1 प्रत्येक दिन दो बार बच्चे से ब्रश करने के लिए कहें। जब भी कुछ वे खाएं, उन्हें पानी से कुल्ला करने के लिए कहें। रात में सोने से पहले बिना ब्रश किए उन्हें न सोने दें।
2 तब तक ब्रश करवाएं, जब तक कि दांत और ब्रेसेस बिल्कुल साफ न हो जाएं, फ्लॉसिंग भी करवाएं। फ्लॉसिंग के लिए मेडिकल स्टोर से अच्छी क्वालिटी का फ्लॉस खरीद सकते हैं।
3 साल में दो बार दांतों को क्लीनिंग करवान न भूलें। खासकर जब ब्रेसेस लगे हुए हों, तो प्रोफेशनल क्लीनिंग जरूरी हो जाती है। टीथ क्लीनिंग से पहले डेंटिस्ट ब्रेसेस हटा देते हैं, ताकि दांत अच्छी तरह से साफ हो जाए।
4 फ्लोराइड रिन्स से प्लाक साफ करवाएं।
5 हेल्दी ईटिंग हैबिट डेवलप करने को कहें। यह दांतों के लिए बढ़िया होता है। ब्रेसेस लगे होने पर हार्ड, स्टिकी, अधिक चबाने वाले फूड जैसे पॉपकॉर्न, जेली बीन्स, टॉफी, नट्स, कैंडी आदि से ब्रेसेस को नुकसान पहुंच सकता है।
चित्रस्रोत:Shutterstock.