सिर्फ मिठाइयों से नहीं बल्कि इन चीजों से भी होती है दांतों में कैविटी, जानिए ओरल हेल्थ से जुड़े 6 बड़े मिथक
ओरल हेल्थ को जितनी कम इंर्पोटेंस दी जाती है, इससे जुड़े मिथक उतने ही ज्यादा हैं। कुछ गलतफहमियां आपकी हेल्थ के लिए मुसीबत बन सकती हैं।
ओरल हेल्थ को जितनी कम इंर्पोटेंस दी जाती है, इससे जुड़े मिथक उतने ही ज्यादा हैं। कुछ गलतफहमियां आपकी हेल्थ के लिए मुसीबत बन सकती हैं।
अगर आप डायबिटीज या प्री-डायबिटीज से जूझ रहे हैं तो आपके लिए यह जरूरी है कि आप अपने मुंह, दांतों और मसूड़ों का खास ख्याल रखें।
जिस तरह से स्वस्थ्य रहने के लिए, शरीर का ध्यान रखना जरूरी है, ठीक उसी तरह से ओरल हेल्थ को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसका ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। ताकि मुंह के जरिये शरीर तक पहुंचने वाली बीमारियों से बचा जा सके।
Oral Hygiene Tips In Hindi: हल्की सी मुस्कान हमेशा चेहरे पर रखने के साथ आप हमेशा खुद को कॉन्फिडेंट और पॉजिटिव महसूस कर सकते हैं लेकिन अगर आपकी ओरल हाइजीन अच्छी नहीं है तो आपका कॉन्फिडेंस कम हो सकता है।
यहां बताया गया है कि आप मसूड़ों की बीमारियों के होने के खतरे को कैसे कम कर सकते हैं जो आपके ओरल हेल्थ को और खराब कर सकते हैं।
विस्डम टीथ या अक्ल दाढ़ हमारे दांतों का ही हिस्सा है, मगर ये तब निकलते हैं जब हम वयस्क हो जाते हैं। अक्ल दाढ़ क्या होते हैं और अक्ल दाढ़ निकलने पर होने वाले दर्द का उपचार क्या है, साथ ही इस लेख के माध्यम जानिए अक्ल दाढ़ से जुडी सभी जरुरी बातें।
Oral Tips for Teenagers: अगर आपके बच्चे ब्रश नहीं करते और ओरल हाइजीन के प्रति बहुत ही उदासीन हैं तो उन्हें एक्सपर्ट की ये 5 सलाह जरूर बताएं।
दन्त रोग विशेषज्ञ डॉ. नम्रता रूपानी के अनुसार, दांतों में झनझनाहट को टूथ सेंसटिविटी (Tooth Sensitivity) कहते हैं, अधिकांश लोग दांतो की झनझनाहट से परेशान हैं। मगर शायद झनझनाहट के असली कारण को नहीं जानते हैं।
क्या आपके दांत बहुत पीले नजर आते हैं? यदि हां, तो घर का बना ये देसी पाउडर आएगा आपके काम, एक बार जरूर करें ट्राई....
डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो आपकी ओरल हेल्थ को प्रभावित कर सकता है. इस मेटाबॉलिक डिजीज और दांतों से जुड़ी समस्याओं के बीच के संबंध को समझने के पढ़ें यह लेख.
विशेषज्ञों का मानना है कि आपके मुंह में अलग-अलग स्थानों पर ओरल सोरायसिस के संकेत दिखाई दे सकते हैं, जो कि आपके गालों के भीतर सबसे आम हैं।
उम्र बढ़ने के साथ दांतों और मसूढ़ों वाली बीमारियां धीरे-धीरे दिखाई देने लगती है, मुख सम्बन्धी ये बीमारियां कई बड़ी बीमारियों का कारण भी बनती हैं; उम्र बढ़ने के साथ अपने मुंह, दांतों और मसूढ़ों का ख्याल कैसे रखें, इसके बारे में विस्तार से पढ़ें दन्त रोग विशेषज्ञ डॉ. नम्रता रूपानी की सलाह।
दांत में एक बार कैविटी हो जाने के बाद क्षति स्थायी हो जाती है। इस क्षति के उपचार के लिए भराई (फिलिंग) से लेकर रूट कैनाल तक की ज़रुरत हो सकती है। उपचार के ठीक-ठीक प्रकार का फैसला कैविटी के स्थान और गंभीरता पर निर्भर करता है।
दांतो के बीच में गैप होना एक आम समस्या है, जिसके कई कारण हो सकते हैं। यह बच्चों और बड़ों दोनों को हो सकता है। इसके बारे में विस्तार से समझने के लिए हमने बात की डॉ नम्रता रूपानी से; जिन्होंने डायस्टेमा (दांतों के बीच गैप) के बारे में हमें विस्तार से जानकारी दी है।
Mouthwash Uses In Hindi : अगर आप माउथवॉश का प्रयोग करते हैं तो आपको इसके फायदे, नुकसान और प्रयोग करने का तरीका पता होता है।
मसूड़ों में सूजन, मसूड़ों से खून निकलना, दर्द, मसूड़ों का ढीला होना आदि समस्याएं अधिक दिनों तक बनी रहें, तो इसे नजरअंदाज करना खतरे से खाली नहीं। यह मसूड़ों में होने वाला कैंसर (Gum Cancer Symptoms in Hindi) भी हो सकता है।
उम्र बढ़ने के साथ ही दांतों में जो सबसे बड़ा परिवर्तन जो देखने को मिलता है वह है दांतों में होने वाला दर्द, कैविटी और पीलापन। 50 की उम्र के बाद ही लोगों को दांत से संबंधित कई तरह की समस्याएं होने लगती है। दांतों का दर्द वाकई बहुत असहनीय होता है जिसे बढ़ती उम्र में कंट्रोल करना बहुत मुश्किल हो जाता है। आज हम आपको दांतों के दर्द को कम करने के लिए कुछ ऐसे नुस्खे बता रहे हैं जो बहुत कारगाार हैं।
प्राचीन समय में लोग अपने दांतों को साफ करने के लिए कड़वे पौधों की टहनियों का इस्तेमाल करते थे। कड़वी टहनियों में मौजूद ऐन्टीमाइक्रोबीअल प्रॉपर्टीज दांतों को स्वस्थ रखने और दांतों में मौजूद उन कीटाणुओं को दूर करने में मदद करती है जो दांतों की सड़न का कारण बनते हैं।
सुबह की भागदौड़ में जीभ की सफाई करते समय हम उतना ध्यान नहीं रखते। कई बार लोग यह सोचकर नहीं जीभ साफ (Tongue Cleaning) करते कि,यह उतना ज़रूरी नहीं। लेकिन जीभ सही तरीके से साफ ना करने से बहुत से नुकसान हो सकते हैं। इसी तरह छोटे बच्चों को ओरल हाइजिन की आदतें सिखानी पड़ती हैं। बच्चे जो, आमतौर पर ठीक तरह से ब्रश नहीं करते। इसीलिए, उन्हें जीभ की सफाई सही तरीके करने के लिए प्रेरित करें। उन्हें, समझाएं कि जीभ की सही सफाई करने से उन्हें कुछ फायदे हो सकते हैं।
Tooth cavity remedies : दांतों में कीड़े तब लगते हैं, जब आप कुछ भी खाने के बाद सही से कुल्ला नहीं करते। जानें, दांतों में कीड़े लगने के कारण और इसे दूर करने के घरेलू नुस्खे...
शुगर फ्री च्युइंग गम (Sugar free chewing gum) ओरल हेल्थ के लिए फायदेमंद होती है. जब आप शुगर फ्री च्युइंग गम चबाते हैं तो मुंह में लार बनता है, जो कैविटी से बचाता है. दांतों की सड़न के लिए कैविटी ही जिम्मेदार होती है.
सांस की दुर्गंध या हैलीटोसिस एक गंभीर समस्या बन सकती है। इस समस्या को आप जड़ से खत्म कर सकते हैं योनिशून्य मुद्रा (yonishunya mudra) के नियमित अभ्यास के जरिए।
आप जिस टूथब्रश का इस्तेमाल हर दिन करते हैं, वह बेशक आपको देखने में साफ लगता हो, लेकिन टूथब्रश में कई ऐसे बैक्टीरिया होते हैं, जो आपको नजर नहीं आते हैं। ये बैक्टीरिया सेहत के लिए सही नहीं होते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आपको कब अपना टूथब्रश बदल लेना चाहिए।
टारटार जिसे कैल्कलस भी कहा जाता है. यह कैविटीज़ और मसूड़ों के रोग जैसी अन्य गंभीर रोगों का कारण भी बनता है.
Published by TheHealthSite.com | Updated : May 29, 2019, 5:55 PM