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Written By: Anshumala | Published : May 18, 2019 2:18 PM IST
Cutting just 250 calories a day can do wonders for obese older adults. © Shutterstock.
मोटापा से आज हर 5 में से 3 व्यक्ति ग्रस्त है। मोटापा दुनिया भर में एक प्रमुख स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, जो अब एक महामारी का आकार ले रही है। अमेरिका की आबादी देखी जाए तो एक तिहाई लोग मोटापे की चपेट में आ चुके हैं। मोटापा जहां कई बीमारियों के होने के खतरे को बढ़ाता है, तो वहीं इससे अर्थराइटिस की समस्या भी हो सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार, दुनिया भर में एक बिलियन लोग मोटापे से प्रभावित हैं। किसी व्यक्ति का वजन (किलोग्राम में) उसकी ऊंचाई (मीटर में) के साथ आंका जाता है। इन दोनों का सही माप बीएमआई के जरिए किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति का बीएमआई रेट 30 के बराबर या उससे अधिक होता है, तो वह अत्यधिक मोटापे से ग्रस्त माना जाता है। यही बीएमआई 40 के बराबर या उससे अधिक हो, तो इसे एक बीमारी का रूप माना जाता है।
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सेंटर फॉर नी एंड हिप केयर के वरिष्ठ प्रत्यारोपण सर्जन डॉ. अखिलेश यादव का कहना है कि गठिया समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं का सीधा संबंध मोटापे से जुड़ा हुआ है। यह खास तौर पर घुटनों के पुराने ऑस्टियोअर्थराइटिस यानि गठिया की स्थिति को गंभीर करता है, जिससे पीड़ित व्यक्ति असहज और घातक पीड़ा का अनुभव करता है। मोटापे के कारण ही पैर शरीर का सारा भार उठाने में असमर्थ हो जाते हैं, जिससे घुटनों के जोड़ों में तीव्र दर्द होता है। इससे पीड़ित को दो कदम चलने में भी अत्यंत परेशानी होती है। यही गठिया का कारण बनता है। यह माना जाता है कि मोटे लोगों में वसा उत्तक लेप्टिन नामक हार्मोन बनाता हैं, जो कार्टिलेज मेटाबॉलिज्म (चयापचय) को प्रभावित करता है। यह गठिया का कारण बनता है।
डॉ. यादव का कहना है कि मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए वजन कम करना बेहद जरूरी होता है। वजन घटने से गठिया की परेशानी में भी सुधार आता है। जीवनशैली में बदलाव लाकर वजन को तो कम किया ही जा सकता है, साथ ही गठिया में भी सुधार लाया जा सकता है। ये बदलाव आहार के साथ-साथ रहन सहन में भी जरूरी हैं। प्रतिदिन व्यायाम करना, खाने के बाद आधे घंटे की वॉक, मॉर्निंग वॉक, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, जंक फूड से दूर रहना आदि से रोगियों को काफी राहत मिलती है।
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गठिया से उत्पन्न होने वाले दर्द के इलाज के लिए आमतौर पर गैर स्टेरायडल विरोधी उत्तेजक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। इनका लगातार और अधिक इस्तेमाल करने से पेट और गुर्दों को नुकसान पहुंचता है। इनका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही करें। विस्कॉस जेल का इंजेक्शन लगवाने से जोड़ों में चिकानई बढ़ जाती है और गठिया के जोड़ की सक्रियता में वृद्धि हो जाती है। जोड़ें के बीच के जमाव को अर्थोस्कोप नामक टेलीस्कोप से साफ किया जाता है।
घुटने की पूर्ण आर्थ्रोप्लास्टी करवाने वाले रोगियों में एक बड़ी संख्या मोटापे से ग्रसित लोगों की है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, अत्यधिक मोटापे से ग्रसित लोगों में ट्रांसप्लांट के फेल होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। ये भी देखा गया है कि मोटापे के कारण गठिया के ऑपरेशन के परिणाम भी कुछ खास नहीं होते। ऐसे रोगी वैक्सीन आपनाकर दर्द से राहत पा सकते हैं। ऐसे रोगियों की सही जांच और नियमित देखभाल अत्यंत आवश्यक है। मोटापे से ग्रस्त रोगियों की जटिलताओं को देखते हुए वजन सर्जरी के जरिए घटा लेना चाहिए, जो बेरिएट्रिक सर्जरी से संभव हो सकता है।