11 से 21 साल के युवा ज्‍यादा होते हैं इस बीमारी के शिकार, जानें लक्षण और बचाव

जर्नल ऑफ क्लीनिकल साइक्रेट्री में छपे एक शोध के अनुसार जिन लोगों को केवल ओसीडी होता है, वे उन लोगों जिन्‍हें ओसीडी और असवाद दोनों होते हैं के मुकाबले, इलाज के बाद जीवन के प्रति बेहतर रवैया रखते है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : January 9, 2019 12:40 PM IST

11 साल के बच्‍चों से लेकर 21 साल के युवाओं में एक खास किस्‍म की बीमारी तेजी से पनप रही है। शोध बताता है कि बच्‍चों और युवाओं में इस खास बीमारी की वजह से डिप्रेशन यहां तक बढ़ जाता है कि वो खुदकुशी करने को मजबूर हो जाते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ चाइल्‍ड एंड एडोलेसेंट साइकियाट्री में प्रकाशित एक शोध में बताया गया है कि ऑबसेसिव कम्‍पलसिव सिम्‍टम्‍स (Obsessive compulsive symptoms) बच्‍चों और युवाओं में काफी तेजी से बढ़ रहा है। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जिन लोगों में OCS पाया जाता है उनमें डिप्रेशन और आत्‍महत्‍या के खतरे बढ़ जाते हैं!

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ऐसे किया गया अध्‍ययन

यह अध्‍ययन 11 से 21 साल के 7,000 बच्‍चों और युवाओं पर किया गया। शोधकर्ताओं ने OCS वाले लोगों को चार वर्गों में बांटा। पहला जिनको अक्‍सर बुरे विचार आते थे, दूसरे वर्ग में वो लोग थे जो एक काम को बार-बार रिपीट करते थे। तीसरे में एक समान आदत वाले और चौथा ग्रुप उन लोगों का था जो सनक की हद तक सफाई करते थे। इनमें से 20 फीसद युवा जिनमें बुरी आदतें थीं खुदको या दूसरों को नुकसान पहुंचानें के बारे में ज्‍यादा सोचते थे। ऐसे युवा डिप्रेशन के शिकार थे।

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खतरनाक है सनक की हद तक सफाई

ओसीडी ऐसी मानसिक परेशानी है, जिसमें अनियंत्रित विचार और व्यवहार हमें घेर लेते हैं। हम एक ही चीज बार-बार करने लगते हैं। ऑबसेसिव-कंपलसिव डिस्ऑर्डर में कोई एक विचार दिमाग में आकर अटककर रह जाता है। उदाहरण के लिए आप बार-बार यह जांचते रहते हैं कि फ्रिज या लाइटें बंद हैं या नहीं। साफ होने के बावजूद बार-बार हाथ धोते हैं या अपने डेस्क को कई बार अरेंज करते हैं।

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एफेक्टिव डिस्‍ऑर्डर जर्नल में बताया गया कि ओसीडी से पीडि़त मरीजों में अवसाद होने का खतरा, उन लोगों की अपेक्षा दस गुना होता है, जिन्‍हें ओसीडी नहीं है। अवसाद के लक्षणों में नाउम्‍मीदी और लाचारी, रोजमर्रा के कामों में रुचि न हो तथा वजन व भूख में बदलाव होना शामिल होता है। कुछ लोगों में अवसाद के दौरान ओसीडी के लक्षण और अधिक मुखर हो जाते हैं। ओसीडी के साथ अवसाद का मेल ईलाज को और मुश्किल बना देता है। जर्नल ऑफ क्लीनिकल साइक्रेट्री में छपे एक शोध के अनुसार जिन लोगों को केवल ओसीडी होता है, वे उन लोगों जिन्‍हें ओसीडी और असवाद दोनों होते हैं के मुकाबले, इलाज के बाद जीवन के प्रति बेहतर रवैया रखते है।

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OCD शोधकर्ताओं ने OCS वाले लोगों को चार वर्गों में बांटा। पहला जिनको अक्सकर बुरे विचार आते थे, दूसरे वर्ग में वो लोग थे जो एक काम को बार-बार रिपीट करते थे। ©Shutterstock.

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर के लक्षण

  • सफाई प्रति सनक की हद तक आदत तो इसका सामान्‍य लक्षण है ही, इसके अलावा
  • निश्चित संख्याओं, रंगों और अरेंजमेंट को लेकर अंधविश्वास हो सकता है।
  • कीटाणुओं और गंदगी आदि के संपर्क में आने या दूसरों को दूषित कर देने का डर रहता है।
  • डर से जुड़ी चीजों को महसूस करना जैसे, घर में कोई बाहरी व्यक्ति घुस आया है।
  • ऐसे लोगों को किसी और को नुकसान पहुंचने का डर भी रहता है।
  • धर्म या नैतिक विचारों पर पागलपन की हद तक ध्यान देना। किसी चीज को भाग्यशाली या दुर्भाग्यशाली मानने का अंधविश्वास।
  • चीजों को बेवजह बार-बार जांचना, जैसे कि ताले, उपकरण और स्विच आदि। बेकार की चीजें इकट्ठा करना जैसे कि पुराने न्यूजपेपर, खाने के खाली डिब्बे, टूटी हुई चीजें आदि।

कैसे करें इससे बचाव

ऐसी दवाइयां मौजूद हैं जो दिमाग की कोशिकाओं में सेरोटोनिन की मात्रा बढ़ाती हैं। डॉक्टर कई बार इलाज के लिए इन दवाओं को लेने की सलाह देते हैं, जिन्हें लंबे समय तक लेना होता है। कभी-कभी तनाव को दूर करने वाली दवाएं भी इनके साथ दी जाती हैं। इसके साथ बिहेवियर थैरेपी की मदद भी ली जाती है। जिसके अंतर्गत रोगी को शांत रहने वाले व्यायाम सिखाए जाते हैं। बिहेवियर थैरेपी में सोच से मुक्त होने के लिए कुछ तकनीकें भी सिखाई जाती हैं।

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