सकारात्मक दृष्टिकोण व नियमित स्क्रीनिंग से जीती जा सकती है कैंसर से जंग

राजीव गांधी कैंसर इन्स्टीट्यूट एवं रिसर्च सेंटर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बताई कैंसर से लड़ने की रणनीति।

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Written By: IANS | Published : May 31, 2019 6:50 PM IST

'जिंदगी हर कदम एक नई जंग है', ये पंक्ति जीवन का मार्गदर्शन करने में कारगर है क्योंकि यहां हमें हर पल, हर समय पर एक जंग से जूझना है, लड़ना है और स्थिति से पार पाकर आगे बढ़ जाना है। कुछ ऐसा ही जीवन कैंसर पीड़ित एवं सर्वाइवर्स का भी है। कुछ इसकी जंग में जीत गये और कुछ लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

बढ़ रही है कैंसर की बीमारी 

कैंसर दुनिया में बीमारी से होने वाली मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। पर सावधानी बरतने से दुर्घटना से बचा जा सकता है। ठीक वैसे ही कैंसर का ईलाज संभव है।अगर इसका पता जल्दी लगा लिया जाए। यानि अपने स्वास्थ्य, जीवन-शैली और खानपान की आदतों में सावधानी रखी जाए तो कैंसर नामक दुर्घटना से बचा जा सकता है।

रियल वॉरियर मीट

राजीव गांधी कैंसर इन्स्टीट्यूट एवं रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) द्वारा वल्र्ड नो टोबाको डे के अवसर पर आयोजित रियल वॉरियर मीट में यह बात कही गई। यह अवसर था इस तरह की कई सकारात्मक बातों के बारे में जानने का। मौके पर कैंसर से पार पा चुके सर्वाइवर्स ने अपनी यात्रा के कई सकारात्मक पहलू साझा किए। एक सशक्त उदाहरण दिया कि कैंसर के साथ और बाद अच्छा साधारण जीवन संभव है।

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विशेषज्ञों ने की चर्चा

आरजीसीआईआरसी द्वारा अपने नीति बाग स्थित प्रांगण में आयोजित इस वॉरियर मीट में डॉ. सनी मलिक, डॉ. लीना डडवाल, इंडियन कैंसर सोसायटी के विशेषज्ञों के सत्र, एक्सपर्ट पैनल डिसकशन हुए। कैंसर फाइटर्स एवं सर्वाइवर मीट में कैंसर से जूझने वालो ने अपनी कहानी साझा की उन्हें सम्मानित भी किया गया। इसके अतिरिक्त प्रख्यात हास्य कवि सुरेन्द्र शर्मा के साथ मोटीवेशनल लाफ्टर सत्र इस मीट का विशिष्ट आकर्षण रहा।

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संभव है इलाज

उपस्थित मेहमानों, एक्सपटर्स, कैंसर फाइटर्स एवं अन्य को संबोधित करते हुए आईजीसीआईआरसी (नीति बाग) की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. गौरी कपूर ने कहा, " कैंसर लाइलाज बीमारी नहीं है, इसका इलाज संभव है, अगर इसका पता जल्दी लगा लिया जाए और इसके बारे में अधिक से अधिक लोगों को जागरुक किया जाए। मेडीकल साईंस ने भी काफी तरक्की की है और अब कैंसर के ईलाज एवं उसके बाद के उत्तम जीवन प्रदान करने वाली तकनीक व दवाईयां काफी सहायक हैं।"

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