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दुनियाभर में लोगों का रुझान योग को लेकर बढ़ रहा है। यही वजह है कि दुनियाभर की विभिन्न यूनिवर्सिटी में योग को लेकर अध्ययन में काफी इजाफा हुआ है। इसमें से कई अध्ययन के परिणाम आ चुके हैं जबकि आए दिन नए नए सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। इसी कड़ी में मल्टीपल स्केलेरोसिस (बहुविध ऊतक दृढ़न) जैसी गंभीर बीमारी के रोगियों पर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोलॉजिकल साइंसेज (निमहंस) ने योग के प्रभाव का अध्ययन शुरू कर दिया है। यह अध्ययन तीन साल तक चलेगा। अध्ययन 30 मरीजों पर विशेष योग सत्र के माध्यम से किया जाएगा। इसका सारा खर्च निमहंस के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से उठाया जाएगा। यह जानकारी निमहंस की न्यूरोलॉजी की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. नेत्रवती ने दी। मालूम हो कि इससे पहले भी निमहंस योग पर कई अध्ययन कर चुका है।
प्रो. डॉ. नेत्रवती ने बताया कि नियमित चिकित्सा के साथ-साथ एमआरआई मॉर्फोमेट्री के जरिए मस्तिष्क के विभिन्न हिस्से में आए सुधार पर अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही शरीर के अन्य विभिन्न अंगों पर भी अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ ही इन रोगियों की तुलना अन्य 30 रोगियों से की जाएगी, जिन्हे चिकित्सीय इलाज के साथ प्राणायाम सिखाया जाएगा। प्रो. नेत्रवती ने बताया कि वर्तमान में कुछ रोगियों पर एक पायलट प्रोजेक्ट भी चलाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार अध्ययन को लेकर विशेषज्ञों ने विशेष योग अभ्यास की रूपरेखा तैयार कर ली है। योग अभ्यास सत्र के दौरान रोगियों की प्रगति और स्थिति पर पल-पल नजर रखी जाएगी। इसके बाद एमआरआई मॉर्फोमेट्री के जरिए पहले, तीसरे और छठे माह में रोग की स्थिति का पता लगाया जाएगा। वहीं पहले और दूसरे साल के दौरान एक अनुवर्ती जांच की जाएगी, जिसके बाद अध्ययन का निष्कर्ष निकाला जाएगा और उसकी तुलना की जाएगी।
मल्टीपल स्केलेरोसिस सेंट्रल नर्वस सिस्टम की एक बीमारी है, जो मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और ऑप्टिक तंत्रिका को प्रभावित करती है। न्यूरॉन्स, नर्वस सिस्टम की संरचनाएं हैं, जो हमें सोचने, देखने, सुनने, बोलने, महसूस करने आदि की अनुमति देते हैं। प्रत्येक न्यूरॉन एक सेल बॉडी और एक एक्सोन (सेल बॉडी का विस्तार-क्षेत्र, जो संदेशों को आगे ले जाने का काम करता है) से बना होता है। ज्यादातर एक्सोन केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में माइलिन नामक एक रोधक पदार्थ में रहते हैं। दरअसल, माइलिन नसों के साथ संकेतों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में मदद करता है। एमएस में माइलिन को नुकसान पहुंचता है, जिससे तंत्रिका प्रभावित होती है। इससे पीड़ित लोगों में बीमारी के एक लक्षण या उससे अधिक लक्षण या गंभीर विकलांगता जैसे कई संकेत दिखाई दे सकते हैं। इसका पता एमआरआई द्वारा लगाया जा सकता है।
चिकित्सकों की मानें तो रोग का जल्दी पता चलना जरूरी है, जिससे तुरन्त उपचार प्रारम्भ करके बीमारी को और अधिक बढ़ने से रोका जा सके। एमएस की पुष्टि चिकित्सकों के लिए एक चुनौती होती है। कोई भी एक परीक्षण इसका सौ प्रतिशत सही पता नहीं लगा सकता है। अतः चिकित्सक भिन्न-भिन्न रूप से इसका निदान करते हैं। मालूम हो कि मल्टीपल स्केलेरोसिस रोगियों पर पहले भी योग को लेकर अध्ययन हो चुके हैं। इसको लेकर ईरान के कर्मनशाह यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज और स्विटजरलैंड की साइकियाट्रिक यूनिवर्सिटी क्लिनिक एवं बासेल विश्वविद्यालय, जर्मनी एक यूनिवर्सिटी और एम्स के प्रो. रोहित भाटिया पहले भी शोध कर चुके हैं।
डॉ. राघवेंद्र राव, डायरेक्टर, सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन योग एंड न्यूरोपैथ का कहना है कि, दुनियाभर में लोगों का रुझान योग को लेकर बढ़ा है। यही वजह है कि दुनियाभर की विभिन्न यूनिवर्सिटी में योग को लेकर अध्ययन में काफी इजाफा है। इसमें से कई अध्ययन परिणाम हा चुके हैं जबकि आए दिन नए नए सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इसी कड़ी में मल्टीपल स्केलेरोसिस रोगियों पर योग के प्रभाव को लेकर निमहंस ने अध्ययन शुरू कर दिया है, जिसके भी सकारात्मक प्रभाव सामने आएंगे। सीसीआरआईएन भी योग को लेकर शोध कर रहा है। अब तक हमारे 113 शोध प्रकाशित हो चुके हैं।