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दुनिया के सबसे पुराने बंदर करेंगे एचआईवी से लड़ने में मनुष्‍यों की मदद ?

अध्यायन में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि एंटीबॉडी को निष्क्रिय करना, लेकिन प्रतिरक्षा प्रणाली के अन्य पहलुओं को बनाए रखना, वायरस को रोकने की कुंजी है। ©Shutterstock.

अध्ययन में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि एंटीबॉडी को निष्क्रिय करना, लेकिन प्रतिरक्षा प्रणाली के अन्य पहलुओं को बनाए रखना, वायरस को रोकने की कुंजी है।

दुनिया भर में एचआईवी एड्स सबसे ज्‍यादा खतरनाक बीमारी के रूप में फैल गई है। जिससे कितनी ही कीमती जानें हर साल जा रहीं हैं। विश्‍व संगठनों ने इसे सबसे बड़ी वैश्विक चिंताओं में शामिल किया है। जिसका उपचार तलाशने में दुनिया भर के वैज्ञानिक जुटे हुए हैं। इसी राह में आए एक नए शोध ने सबको उम्‍मीद की एक किरण दिखाई है। वाशिंगटन में हुए एक अध्‍ययन में यह खुलासा हुआ है कि दुनिया के सबसे पुराने बंदरों की प्रजाति में वह संभावनाएं मौजूद हैं, जिनसे एचआईवी के खिलाफ प्रतिरक्षा तंत्र तैयार किया जा सकता है।

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क्‍या कहता है अध्‍ययन

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अध्‍ययन में यह खुलासा हुआ है कि दुनिया के सबसे पुराने बंदरों  ‘रीसस मैकक’ को एचआईवी के एक तनाव लचीला वायरल रूप जैसा दिखता है जो आम तौर पर लोगों को संक्रमित करता है, के खिलाफ तटस्थ एंटीबॉडी का उत्पादन करने के लिए इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

अध्‍ययन में उन क्षेत्रों में गहन रिसर्च की गई है जिन पर एचआईवी सबसे ज्‍यादा आघात करता है। इन क्षेत्रों की पहचान कर उनमें प्रतिरक्षा प्रणाली निर्मित करने के प्रयास की ओर यह अध्‍ययन आगे बढ़ता है।

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इस तरह काम करता है प्रतिरक्षा तंत्र

रिसर्च में आगे इस बात की आवश्‍यकता महसूस की गई है कि शरीर को एक ऐसा प्रतिरक्षा तंत्र निर्मित करने की आवश्‍यकता है जो शरीर के लिए प्रोटीन का एक आवरण तैयार कर सकें। ताकि वायरस के हमले को बाहर ही समाप्‍त किया जा सके। इस विचार को आगे बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों ने तय किया है कि वे लैब में तैयार इस तरह के एंटीबॉडीज से एनिमल मॉडल्‍स की एचआईवी से रक्षा कर सकते हैं।

अध्ययन के निष्कर्ष जर्नल ऑफ इम्यूनिटी में प्रकाशित हुए हैं। अध्‍ययन में शामिल एक शोधकर्ता डेनिस बर्टन ने कहा, "हमने शोध में पाया कि टीकाकरण के माध्‍यम से जानवरों के शरीर में पहुंचाए गए ये एंटीबॉडीज उन वायरस से जानवरों की रक्षा कर सकते हैं, जो एचआईवी की तरह दिखते हैं।

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हालांकि अभी इस टीके का परीक्षण मनुष्‍यों पर नहीं किया जा सका है, फि‍र भी यह एचआईवी के लिए विकसित किए जा रहे उपचार के लिए एक दिशा निर्देशक साबित होगा।

इस बीच, शोधकर्ताओं ने पाया कि टीकाकरण के बाद हफ्तों और महीनों के भीतर एचआईवी प्रोटेक्‍शन वेन का स्‍तर गिरना शुरू हो गया। हाई टाइमर के रूप में एचआईवी संरक्षण घाटा गिर गया। उन्होंने वायरस को लगातार उजागर करते हुए टाइमर को ट्रैक करने में, एचआईवी को बरकरार रखने के लिए आवश्यक टाइमर को निर्धारित किया।

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एंटीबॉडीस को किया जा सकेगा नियंत्रित

महत्वपूर्ण बात यह है कि अध्ययन से यह भी पता चला है कि एंटीबॉडी को निष्क्रिय करना, लेकिन प्रतिरक्षा प्रणाली के अन्य पहलुओं को बनाए रखना, वायरस को रोकने की कुंजी है।

बर्टन कहते हैं,  "यह शोध एंटीबॉडी को व्यापक रूप से तटस्थ करने के स्तर का अनुमान देता है जिससे हमें वैश्विक स्‍तर पर एचआईवी के खिलाफ उपचार तैयार करने में मदद मिलेगी।"

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