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World Thalassemia Day 2021: ये हैं थैलेसीमिया के 4 मुख्य लक्षण और इसके मरीजों के लिए डायट प्लान

आज दुनियाभर में 'वर्ल्ड थैलेसीमिया डे' (World Thalassemia Day 2021) मनाया जा रहा है। थैलेसीमिया एक अनुवांशिक रोग है, जो बच्चों को पेरेंट्स के जरिए मिलता है। जानें, क्या हैं इसके मुख्य लक्षण और कैसा हो थैलेसीमिया रोगियों का खानपान...

Written By Anshumala
Published : May 8, 2020 11:13 AM IST

World Thalassemia Day 2021 : ये हैं थैलेसीमिया के 4 मुख्य लक्षण और इसके मरीजों के लिए डायट प्लान। © Shutterstock.

आज (8 मई) 'विश्व थैलेसीमिया दिवस' (World Thalassemia Day 2021 in Hindi) पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इस बार देश-दुनिया 28वां 'विश्व थैलेसीमिया दिवस' मना रहा है। थैलेसीमिया एक अनुवांशिक (जेनेटिक) रक्त से संबंधित बीमारी (Blood Disorder) है, जिसमें खून में हीमोग्लोबिन बनना बंद हो जाता है। यह रोग बच्चों को अधिक होता है। इस रोग से ग्रस्त के शरीर में खून की कमी होने के कारण उसे बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। इस बीमारी के लक्षण (Thalassemia Symptoms) लोगों में अलग-अलग भी हो सकते हैं।

इससे पीड़ित बच्चा एनीमिया का शिकार हो जाता है। दो तरह का थैलेसीमिया होता है माइनर और मेजर थैलेसीमिया (Types of thalassemia)। माइनर थैलेसीमिया मां या बाप में से किसी एक के शरीर में मौजूद क्रोमोजोम कमजोर या खराब होने से होता है। यदि दोनों ही लोगों के क्रोमोजोम खराब होते हैं, तो मेजर थैलेसीमिया होता है। खून नहीं बनने से व्यक्ति कई तरह की गंभीर समस्याओं से ग्रस्त हो जाता है। थैलेसीमिया (Thalassemia) के कई लक्षण होते हैं, जानें उन मुख्य लक्षणों (Symptoms of Thalassemia in Hindi) के बारे में...

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थैलेसीमिया के मुख्य लक्षण (Symptoms of Thalassemia in Hindi)

1 थकान और कमजोरी (Fatigue in Thalassemia)

थैलेसीमिया से ग्रस्त बच्चे के शरीर में ऑक्सीजन और आयरन की कमी रहती है। इससे शरीर पीला नजर आता है। शरीर में खराब रेड ब्लड सेल्स ऑक्सीजन को ठीक तरह से सोख नहीं पाती है। इससे हर समय सुस्ती, थकान और कमजोरी महसूस हो सकता है। जिन बच्चों में पैदाइशी यह रक्त विकार होता है, उनमें पहले साल में ही एनीमिया के लक्षण दिखने लगते हैं।

2 हड्डियों में दर्द रहना (Bone pain in Thalassemia)

थैलेसीमिया के कारण बोन मैरो बढ़ने लगता है। जब बोन मैरो बढता है, तो हड्डियां सामान्य की तुलना में थोड़ी चौड़ी हो जाती हैं, जिससे हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। इससे हड्डियों के टूटने या फ्रैक्चर होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। साथ ही हड्डियों में लगातार दर्द (Symptoms of Thalassemia) भी होता रहता है।

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3 त्वचा का पीला पड़ जाना (Skin discoloration in Thalassemia)

थैलेसीमिया में त्वचा की रंगत पीली नजर आती है। आंखें सफेद नजर आती हैं। लिवर पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि डिफेक्टिव रेड ब्लड सेल्स (RBC) के कारण शरीर का हर अंग ठीक से काम नहीं कर पाता है।

4 पेशाब में बदलाव (Changes in urine in Thalassemia)

थैलेसीमिया से पीड़ित लोगों में पेशाब काफी गाढ़े रंग का होता है। दरअसल, रेड ब्लड सेल्स के विघटित होने के कारण ऐसा होता है। ये सभी लक्षण आपमें दिखें, तो बिना देर किए डॉक्टर से चेकअप करवाएं।

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थैलेसीमिया में खान-पान (Diet plan for Thalassemia in Hindi)

1 थैलेसीमिया में शरीर में आयरन की कमी होती है, ऐसे में फोलेट सप्लीमेंटे और आयरन युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन करें।

2 रेड मीट कम खाने के लिए दें, आयरन से भरपूर अनाज से बनी चीजें मरीज को खिलाएं।

3 चाय और कॉफी कम पिएं। इससे भोजन से शरीर को मिलने वाले आयरन के अवशोषण का प्रतिशत कम हो जाता है।

4 कैल्शियम और विटामिन डी सप्लीमेंट भी लेना चाहिए।

5 शरीर में जिंक सप्लीमेंट का लेवल कम हो, तो ही लें वरना ना लें।

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