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World Suicide Prevention Day पर जानें थीम, क्यों लोग करते हैं सुसाइड, इससे बचने के उपाय

The victim left behind a one-page suicide note but didn’t not mentioned any reason behind the extreme step. © Shutterstock.

डब्लूएचओ के अनुसार, प्रत्येक 40 सेकेंड में एक व्यक्ति सुसाइड करता है। आखिर क्या वजह है, जो लोगों को सुसाइड करने की ओर धकेलती है, जानें ''वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे'' पर सबकुछ।

Written by Anshumala |Published : September 9, 2019 5:14 PM IST

कल है ''वर्ल्ड सुसाइड प्रिवेंशन डे'' (World Suicide Prevention Day)। इस दिन को इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन (आईएएसपी) द्वारा आयोजित किया जाता है। डब्लूएचओ इसका को-स्पॉनसर होता है। इस दिन का उद्देश्य (World Suicide Prevention Day) दुनिया भर में सुसाइड ना करने के प्रति जागरूकता बढ़ाना है ताकि आत्महत्या को रोका जा सके। हर साल इस दिवस को एक अलग थीम के अंतर्गत सेलिब्रेट किया जाता है। इस वर्ष का थीम है ''वर्किंग टुगेदर टु प्रिवेंट सुसाइड'' (Working Together to Prevent Suicide)।

हर 40 सेकेंड पर एक व्यक्ति करता है सुसाइड

आज लोगों में आत्‍महत्‍या (suicide) की प्रवृत्ति तेजी से फैलती जा रही है। खासकर, युवाओं में यह जान देने की प्रवृत्ति (World Suicide Prevention Day) अधिक है। इसकी वजह है टेंशन, नौकरी ना मिलना, स्कूल-कॉलेज में अच्छे नंबरों से पास ना होना, पेरेंट्स का अच्छे नंबर लाने के लिए प्रेशर, सपनों का पूरा ना होना, प्रेम में असफल होना आदि। डब्लूएचओ के अनुसार, प्रत्येक 40 सेकेंड में एक व्यक्ति सुसाइड करता है। आखिर क्या वजह है, जो लोगों को सुसाइड करने की ओर धकेलती है।

एक अध्ययन के अनुसार, एक खास प्रकार के रासायनिक असंतुलन के चलते लोग आत्‍महत्‍या करते हैं। मिशगन स्‍टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने परीक्षण में पाया कि जिन लोगों ने आत्‍महत्‍या के प्रयास किए उनके मस्तिष्‍क में एक खास प्रकार का रसायन ग्‍लूमेट पाया जाता है। ग्‍लूमेट एक प्रकार का अमीनो एसिड है, जो तंत्रिका और कोशिकाओं के बीच संदेश भेजने का काम करता है। इसे डिप्रेशन के लिए जिम्‍मेदार माना जाता रहा है।

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कौन लोग करते हैं सुसाइड ?

- बार-बार जीवन में असफल होने से भी लोगों में आत्महत्या का ख्याल आता है।

- परिवार या दोस्तों में किसी ने आत्महत्या किया हो, उन्हें देखकर भी लोग इस रास्ते को अपनाते हैं।

- रियल दुनिया की बजाय वर्चुअल दुनिया में अधिक रहने वाले लोग सुसाइड करने की मानसिकता से गुजरते हैं। उदाहरण के तौर पर ब्लू व्हेल गेम का प्रभाव, जिसके कारण कितने ही युवाओं ने अपनी जानें गवाईं।

- समाज द्वारा ठुकरा दिए गए लोगों में भी खुद को खत्म करने की प्रवृत्ति होती है, जैसे एलजीबीटी समुदाय के लोग।

- डिप्रेशन और अकेलेपन के शिकार लोगों में भी आत्महत्या की प्रवृत्ति होती है।

- शराब और ड्रग्स जैसे नशे के आदी लोगों में भी आत्महत्या करने के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं।

- आर्थिक तंगी, नौकरी ना मिलना, पारिवारिक झगड़े, प्यार में धोखा खाना और भावनात्मक क्षति भी लोगों को यह रास्ता चुनने के लिए विवश करती है।

सुसाइड का ख्याल आए तो क्या करें ?

- अस्त-व्यस्त जीवन, गलत लाइफस्टाइल, नौकरी आदि से कुछ दिनों के लिए ब्रेक लें। अपनी जिंदगी, चुनावों और फैसलों का आकलन करें। अपनी लाइफस्टाइल से परेशान हैं, तो सबसे पहले उसमें बदलाव लाएं। खुद की तरफ ध्यान दें। अपने लिए थोड़ा वक्त निकालें। बैलेंस डाइट लें। नियमित रूप से मेडिटेशन और एक्सरसाइज करें ताकि आपको मानसिक सुकून मिले।

- नकारात्मक सोच दिमाग पर हावी हो रही है, तो सबसे पहले इससे दूरी बनाने के उपाय सोचें। सकारात्मक सोच रखने वालों से मिले-जुलें। हंसने-हंसाने वालों के बीच अधिक रहें।

- आपके जो शौक अधूरे रह गए हैं, उसकी तरफ ध्यान देना शुरू करें। आप जो नहीं बन पाए हैं, वैसा बनने के लिए प्रयास करें।

- सैड फिल्में ना देखें। इससे आपको और भी ज्यादा निराशा होगी। नॉवेल, कहानी, गाने कुछ भी उदास करने वाले ना हों। कॉमेडी फिल्में देखें, रोमांटिक गानें सुनें। इससे मूड फ्रेश होगा।

- अकेले ना रहें। परिवार और दोस्तों के साथ बैठकर बातें करें। कहीं घूमने जाने की योजना बनाएं। घूमने जाएंगे तो फ्रेश फील करेंगे।

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