वर्ल्ड सोरायसिस डे 2018: सोरायसिस के 7 प्रकार, इग्नोर करना पड़ सकता है मंहगा

सोरायसिस की बीमारी ऐसी बीमारी है जिसका ठीक से इलाज नहीं होता तो यह बार-बार शरीर में होती रहती है।

WrittenBy

Written By: akhilesh dwivedi | Updated : October 25, 2018 11:46 PM IST

सोरायसिस एक प्रकार की ऑटोइम्यून बीमारी है। सोरायसिस के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रति वर्ष 29 अक्टूबर को विश्व सोरायसिस दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह शरीर के किसी भी हिस्से हो सकती है। इस बीमारी में स्किन पर सफेद या लाल रंग के धब्ब होने लगते हैं। ज्यादातर लोगों में यह स्कैल्प, हाथ-पैर, हथेलियों, पैर के तलवें, कोहनी, घुटनों और पीठ पर होती है। सोरायसिस की बीमारी ऐसी बीमारी है जिसका ठीक से इलाज नहीं होता तो यह बार-बार शरीर में होती रहती है। मेडिकल की भाषा में यह 7 तरह की होती है। 7 तरह की सोरायसिस के अलग-अलग लक्षण होते हैं और इलाज भी अलग तरह के होते हैं।

प्लेक सोरायसिस

8-10 प्रतिशत लोगों में होने वाली इस समस्या के कारण शरीर पर सिल्वर और सफेद रंग की लाइन बन जाती है। कोहनी, घुटने, स्कैल्प और पीठ मे नीचे होने वाला इस सोरायसिस से लाल धब्बे और जलन होने लगती है।

गटेट या चित्तीदार सोरायसिस

युवाओं में पाया जाने वाला ये सोरायसिस शरीर पर छोटे गुलाबी चित्ती सी उभर कर आती है। यह समस्या ज्यादातर बाजू, कोहनी और स्कैल्प पर पाई जाती है। इसमें तनाव, त्वचा में चोट जैसे निशान और दवाइयों का रिएक्शन होने लगता है। ज्यादातर मामलों में यह समस्या अपने आप ठीक हो जाती है।

ये भी पढ़ेंः हेयर ऑयल नहीं लगाना चाहते हैं तो घने-मजबूत बालों के लिए अपनाएं ये 4 उपाय।

इन्‍वर्स सोरायसिस

इस टाइप के सोरायसिस बाइट रेड, स्मूथ, शाइनी और बिना लाइन के होते है। यह समस्या आर्मपिट्स, ग्रोइन और स्तन के नीचे होती है। यह परेशानी पसीने और रगड़ने के कारण होती है।

पस्‍चुलर सोरायसिस

बड़ी उम्र के लोगों में पाई जाने वाली समस्या संक्रमित होती है। हाथों-पैरों में होनी वाली इस परेशानी के कारण बुखार, उल्टी और खुजली होने लगती है।

एरि‍थ्रोडर्मिक सोरायसिस

इस प्रकार के गंभीर सोरायसिस से खुजली, हार्ट रेट बढ़ जाना और शरीर का तापमान कम या ज्यादा होने जैसी समस्याएं हो जाती है। इस संक्रमित सोरायसिस का इलाज न करवाने पर निमोनिया भी हो सकता है।

ये भी पढ़ेंः वर्ल्ड सोरायसिस डे: क्या खाने-पीने की चीज़ों का एलर्जिक रिएक्शन है सोरायसिस।

नेल सोरायसिस

हाथों-पैरों के नाखूनों पर होने वाली यह समस्या अर्थराइटिस से पीड़ित लोगों में होती है। इसके कारण नाखून मे दर्द, नाखूनों के रंग में बदलाव, नाखूनों के अंदर चॉक जैसा तत्व भर जाता है। ज्यादातर यह समस्या फंगल इंफेक्शन के कारण होती है।

सोरियाटिक अर्थराइटिस

70 फीसदी लोगों में पाई जाने वाली यह समस्या बहुत अधिक समय तक पाई जाती है। इसके कारण जोड़ो मे दर्द, उंगलियों और टखनों मे सूजन आदि जैसी समस्यां होती है। इस बीमारी का पूरा इलाज करने पर ही इससे छुटकारा पाया जा सकता है।

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source