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विश्व मोटापा उन्मूलन दिवस या वर्ल्ड ओबेसिटी डे 11 अक्टूबर को मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़ी संस्था वर्ल्ड ओबेसिटी फेडरेशन द्वारा साल 2015 में इसकी शुरुआत की गयी थी। इस दिन का मकसद लोगों को हेल्दी वेट मेंटेन करने के लिहाज से आवश्यक मनोबल और सहायता उपलब्ध करायी जा सके, ताकि मोटापे के बढ़ते मामलों को रोकने में मदद मिल सके। साल 2018 के लिए इस दिन की थीम है-मोटापे से जुड़ी भ्रांतियों को बदलना। चूंकि मोटापा एक स्वास्थ समस्या है लेकिन समाज में इसे एक कमी, गलती और हीनता का प्रमाण भी माना जाता है। मोटे और अधिक वजन वाले लोगों को आलसी माना जाता है और उनका उपहास किया जाता है। मोटापा कई शारीरिक और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का कारण बनता है, फिर भी जो लोग सचेत नहीं हैं, वे इसे बीमारी मानने को तैयार नहीं होते। मोटापे को कोई भले बीमारी ना मानना चाहे, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह कई रोगों को बुलावा देता है। विश्व मोटापा दिवस पर लोगों को मोटापे के प्रति जागरूक करना और इससे भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से लोगों को बचाने की दिशा में प्रयास करने के लिए प्रेरित करने की कोशिश की जाती है। 4 टिप्स जो ज़्यादा खाने से और मोटापे से बचाएंगी आपको !
10 प्रतिशत भारतीय आबादी है मोटापे की चपेट में- भारत में मोटापे के रोगियों के साथ बड़ी समस्या यह है कि वह अपनी बीमारी को एक रोग नहीं मानते हैं और इसके गंभीर परिणामों की अनदेखी करते हैं। मोटापा एक गंभीर रोग है और कैसे यह मोटापा अन्य गंभीर गैर-संचारी रोगों का कारण बन सकता है। भारत दुनिया में तीसरा सबसे अधिक मोटी आबादी वाला देश है। भागदौड़ भरी जीवन शैली के साथ तेजी से बढ़ता शहरीकरण मोटापे के बढ़ते मामलों की मुख्य वजह है। हमारे देश में 10 प्रतिशत आबादी सामान्य मोटापे और 5 प्रतिशत आबादी अत्यधिक मोटापे की शिकार है। इसे भी पढ़ें नो कार्बोहाइड्रेट वाली डायट खाएंगे तो होंगी ये हेल्थ प्रॉबल्मस्
विभिन्न रिसर्च और स्टडीज़ में यह भी पाया गया है कि महिलाओं में मोटापा प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है। इससे गर्भधारण में तो परेशानियां आती ही हैं, साथ ही गर्भस्थ शिशु के विकास में भी बाधा पहुंचती है। इसके अलावा मोटापे से होने वाले नुकसान को पीढ़ी दर पीढ़ी आनुवांशिक रूप से ट्रांसफर भी हो सकता है। जानें भ्रूण के लिए कितना खतरनाक है जेस्टेशनल डायबिटीज़ और मोटापा! कैसे करें मोटापा कंट्रोल-