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Written By: Pallavi Kumari | Published : April 8, 2022 4:26 PM IST
10 अप्रैल 2021 को दुनिया भर में विश्व होम्योपैथी दिवस (World homeopathy day) मनाया जाता है। दरअसल, होम्योपैथी चिकित्सा की एक प्राचीन विधि है जिसमें कि रोगी में रोग का अनुरूपण करके समान लक्षण उत्पन्न किया जाता है और फिर दवाइयों से इसे ठीक किया जाता है। दरअसल, ये चिकित्सा का ही एक वैकल्पिक रूप है, जो “समरूपता” के सिद्धांत पर आधारित है। इस पद्धति में होलिस्टिक दृष्टिकोण और रोगी की व्यक्तिवादी विशेषताओं को समझकर इलाज किया जाता है। हाल के वर्षों में ये चिकित्सा पद्धती तेजी से बढ़ी है और अब भारत सरकार इस पद्धती को और आगे बढ़ाने की दिशा में विचार कर रही है।इसी के लिए आगामी विश्व होम्योपैथी दिवस पर आयुष मंत्रालय के तहत आने वाला स्वायत्त संस्थान केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) दो दिवसीय वैज्ञानिक सम्मेलन आयोजित कर रहा है और इस सम्मेलन का उद्धाटन खुद केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोणोवाल करेंगे।
सम्मेलन 9 और 10 अप्रैल को दिल्ली स्थित भारत रत्न सी. सुब्रमण्यम सभागार में "होम्योपैथी-पीपुल्स चॉइस फॉर वेलनेस" विषय पर होगा। यह सम्मेलन राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच) और राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान (एनआईएच) कोलकाता की ओर से आयोजित किया जा रहा है। इस मौके पर केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री डॉ. महेंद्रभाई मुंजपरा भी मौजूद रहेंगे।
केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. सुभाष कौशिक ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य होम्योपैथिक उपचार की उपलब्धता, पहुंच और गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए होम्योपैथिक शिक्षकों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों व छात्रों की क्षमता संग कौशल का निर्माण करना है। सम्मेलन के दौरान बातचीत का लक्ष्य अंतराल को पाटना है और भारत में होम्योपैथी के गुणात्मक परिवर्तन के लिए सीखने का माहौल बनाना है। इससे आशा की जा रही है कि इस प्रकार विकसित किए गए अनुसंधान, अभ्यास और शिक्षा मानक रोगी देखभाल को अधिक प्रभावी ढंग से बढ़ाएंगे। सम्मेलन को www.whdccrh.org वेबसाइट पर भी प्रकाशित किया गया जाएगा। इसके लिए प्रतिभागियों से पंजीकरण आमंत्रित किए गए हैं।
बता दें कि विश्व होम्योपैथी दिवस होम्योपैथी के संस्थापक डॉ. सैमुअल हैनिमैन की जयंती पर मनाया जाता है। इसका एक ही उद्देश्य ये है कि विश्व होम्योपैथी समुदाय चिकित्सा की प्रणाली को स्थापित करके आधुनिकीकरण के साथ इस प्राचीन चिकित्सा को आगे बढ़ाया जाए ताकि ये हर आम आदमी तक पहुंचे और सभी इसका लाभ उठा सकें।