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Written By: Pallavi Kumari | Published : June 23, 2022 11:24 AM IST
Monkeypox virus news: मंकीपॉक्स वायरस ने धीमे-धीमे कई महाद्वीपों का अपना शिकार बना लिया है। ये हम नहीं बल्कि विश्व स्वास्थ्य नेटवर्क (WHN) का डेटा बता रहा है। विश्व स्वास्थ्य नेटवर्क (WHN) की मानें तो, मंकीपॉक्स अब तक कुल 58 देशों में फैल चुका है और कुछ 3,417 मामलों की पुष्टि हो गई है। इसे देखते हुए कि ये वायरस जिस तरह से तेजी से फैल रहा है वर्ल्ड हेल्थ नेटवर्क (World Health Network) ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। विश्व स्वास्थ्य नेटवर्क (WHN) ने घोषणा की है कि वे वर्तमान मंकीपॉक्स के प्रकोप को एक महामारी घोषित कर रहे हैं।
वर्ल्ड हेल्थ नेटवर्क (World Health Network) ने इस घोषणा के साथ बताया कि मंकीपॉक्स वायरस का प्रकोपतेजी से कई महाद्वीपों में फैल रहा है और यह वैश्विक कार्रवाई के बिना नहीं रुकेगा। WHN ने कहा कि मंकीपॉक्स को महामारी घोषित करने का आवश्यक उद्देश्य व्यापक नुकसान को रोकने के लिए कई देशों या दुनिया भर में एक ठोस प्रयास करना है।
गौरतलब है कि वर्ल्ड हेल्थ नेटवर्क (WHN) ने यह घोषणा तब कि है जब WHO की बैठक मंकीपॉक्स के इसी मामले पर होने वाली है। उम्मीद है कि इस घोषणा में WHO मंकीपॉक्स को एक महामारी घोषित कर सकता है। बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन लगातार इसे लेकर सचेत है और मंकीपॉक्स से जुड़े हर छोटे-बड़े अपडेट पर अपनी नजर बनाए रखा है।
हालांकि, खबर यह भी है कि मंकीपॉक्स वायरस से चेचक की तुलना में मृत्यु दर बहुत कम है, पर आगे के लिए कुछ कहा नहीं जा सकता है। इसलिए जरूरी ये है कि चल रहे प्रसार को रोकने के लिए जल्द से जल्द कोई कार्रवाई की जाए। साथ ही ऐसी क्रियाएं जिन्हें व्यावहारिक रूप से लागू किया जा सकता है, ऐसी चीजों को करें। नहीं तो लाखों लोग मर जाएंगे और कई अंधे और विकलांग हो जाएंगे।
वर्ल्ड हेल्थ नेटवर्क (WHN) ने यह भी कहा है कि मंकीपॉक्स महामारी के और बढ़ने की प्रतीक्षा करने का कोई औचित्य नहीं है। इसलिअ तत्काल कार्रवाई करके, हम कम से कम प्रयास से प्रकोप को नियंत्रित कर सकते हैं और परिणामों को और खराब होने से रोक सकते हैं। अब आवश्यक कार्यों के लिए केवल लक्षणों के बारे में स्पष्ट सार्वजनिक संचार, व्यापक रूप से उपलब्ध परीक्षण और इसके बारे में जानकारी होना जरूरी है। इसके अलावा डब्ल्यूएचओ को तत्काल अपने स्वयं के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल को अंतर्राष्ट्रीय चिंता (पीएचईआईसी) घोषित करने की आवश्यकता है। WHN के सह-संस्थापक का कहना है कि शुरुआत में कोरोना वायरस को महामारी घोषित ना करने का परिणाम हम लोग देख चुके हैं इसलिए हमें बिना किसी का इंतजार किए ये करना पड़ा।