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विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस (World Food Safety Day) आज है. इस अवसर पर हम सभी को अपने खाने की सुरक्षा के बारे में ध्यान देना चाहिए. एक रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में 44 से ज्यादा लोग हर मिनट दूषित खाने की वजह से बीमार होते हैं. खराब या दूषित खाना खाने की वजह से प्रत्येक साल लगभग 420,000 लोगों की मौत हो जाती है. डब्ल्यूएचओ यूरोपीय क्षेत्र की रिपोर्ट के अनुसार दूषित या जहरीला खाना खाने से लगभग 44 लोग रोजाना मर जाते हैं. विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाने का यह मुख्य कारण है कि लोगों को साफ और शुद्ध खाने के लिए जागरूक किया जाय. विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के दिन तमाम देश तरह-तरह के जागरूकता प्रोग्राम भी चलाते हैं.
अगर विश्वभर के आंकड़े को देखा जाए तो तमाम देशों में दूषित खाना खाने की वजह बहुत ज्यादा लोग बीमारियों के शिकार हैं. सबसे ज्यादा जो बीमारिया दूषित भोजन की वजह से होती हैं.नोरोवायरस संक्रमण, डायरिया, फूड प्वाइजनिंग सहित अन्य बीमारियों का खतरा दूषित खाने से बढ़ता जाता है. विश्व के तमाम देशों में इस बात पर शोध चल रहे हैं कि दूषित खाने से लोगों को कैसे बचाया जाए. आइए जानते हैं दूषित खाने से होने वाली बीमारी और उनसे बचने के उपाय के बारे में.
Unsafe food kills an estimated 420,000 people every year.
On Friday's 1st-ever #WorldFoodSafetyDay, see why food safety is everyone’s business: https://www.un.org/en/events/foodsafetyday/#GlobalGoalspic.twitter.com/XC38h9mS2Z — United Nations (@UN) June 7, 2019
दूषित खाद्य पदार्थ से विश्व में लाखों लोग बीमार होते हैं. दूषित खाने कि वजह से कई बार लोगों कि मौत भी हो जाती है. खराब खाने की वजह से बैक्टीरिया, वायरस और रासायनिक खतरे भी होते हैं. खाना दूषित खाने से मानव जीवन ही खतरे में नहीं आता बाल्कि देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण भी प्रभावित होता है.
सबसे ज्यादा दूषित खाना खाने की वजह से डायरिया की बीमारी होती है. हाल के वर्षों में नोरावायरस से प्रभावित होने वाले लगभग 15 मिलियन लोग थे. नोरोवायरस के अलावा कैम्पिलोबैक्टर एसपीपी से भी लगभग 5 मिलियन लोग प्रभावित होते हैं.
विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस के अवसर पर आपको यह जरूर जानना चाहिए कि डायबिटीज जैसी बीमारी खाने की वजह से ही है. अगर आपका खाना दूषित है तो आपको हार्ट से लेकर मोटापा जैसी परेशानी होने का खतरा हमेशा बना रहता है.
दूषित खाना खाने से होने वाली फूड पॉइज़निंग से बचने के 8 आसान टिप्स.
परंपरागत भारतीय खानपान के स्थान पर आधुनिक और पाश्चात्य शैली पर आधारित रेडी-टू-ईट, पैकेज्ड या डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, जंक फूड और फास्ट फूड के सेवन से हमारे शरीर में हानिकारक तत्वों की वृद्धि होती है।
जंक फूड और फास्ट फूड में ट्रांसफैट, शुगर, सोडियम और लेड जैसे खतरनाक रसायनों का प्रयोग कर उसे टेस्टी तो बनाया जाता है, लेकिन वह हेल्दी नहीं रह जाता। इससे मनुष्य की भूख तत्काल तो मिट जाती है, परन्तु शरीर की पोषण से संबंधित जरूरतों की पूर्ति नहीं हो पाती।
इसमें प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स आदि पोषक तत्वों का अभाव होता है। नुकसान की बात करें, तो इसमें ट्रांसफैट, सिंथेटिक कलर, एसेन्स के रूप में रासायनिक पदार्थों और शुगर की काफी मात्रा होती है।
इसमें फाइबर का अभाव और चिकनाई की अधिकता होने के कारण इसके सेवन से पाचन तंत्र भी बुरी तरह से प्रभावित होता है।
महानगरों में भागदौड़ भरी जीवनशैली और काम के तनाव के कारण युवा घर पर निर्मित खाद्य पदार्थों के सेवन की बजाय मार्केट में उपलब्ध रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थों का सेवन कर भोजन संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।
होटल और टिफिन वाले भोजन में पौष्टिकता की बजाय स्वाद पर बल दिया जाता है। इसीलिए स्वाद और फैशन के चक्कर में खाद्य पदार्थों के निर्माण में टेस्ट मेकर, हानिकारक रसायनों, सिंथेटिक कलर, वसा, शुगर, ट्रांस फैट आदि का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है।
हम स्वाद के चक्कर में यह भूल ही जाते हैं कि ऐसे भोजन के सेवन से अनेक खतरनाक बीमारियां जन्म लेती हैं।
घर में साफ-सफाई के साथ खाना बनाएं और खाएं. क्योंकि बाहर के खाने में गंदगी और इंफेक्शन का खतरा हमेशा बना रहता है.
बाजार में मिलने वाले चमकदार और रंगीन खाद्य पदार्थों का सेवन कम से कम करें.
फल और सब्जियों को हमेशा ठीक से धोकर खाएं.
स्टीकर वाले फलों का उपयोग करने से बचें.
हेल्द के लिए जरूरी पोषक तत्व देने वाले खाद्य पदार्थों को भोजन में शामि करें.
अपने खाने को पॉलिथिन या अखबार में लपेटकर न रखें. प्लास्टिक के बर्तन में गरम भोजन न रखें.
4 से 6 घंटे पहले बने भोजन का उपयोग करने से बचें.
फल और सब्जियों का उपयोग करते समय सड़े-गले फलों को न खाएं.