वर्ल्‍ड फूड डे :  आपने डस्‍टबिन में तो नहीं फेंक दिया किसी के हिस्‍से का निवाला

प्‍लेट में उतना ही परोसें, जितनी भूख हैं, का सिद्धांत दुनिया को और बेहतर बना सकता है।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : October 15, 2018 2:12 PM IST

विकसित हो या विकासशील, दुनिया भर में लोगों का जीवन स्‍तर बेहतर हो रहा है। प्रति व्‍यक्ति आय में भी बढ़ोतरी हो रही है। इसका श्रेय आपकी मेहनत को ही जाता है । आप अपनी मर्जी से अपनी मेहनत से कमा रहे हैं। आपको हक है कि आप अपनी मर्जी से जो चाहें खाएं। परंतु आपको यह हक बिल्‍कुल नहीं है कि आप मेहनत से उगाए, पकाए और परोसे गए भोजन को डस्‍टबिन में फेंक दें। जीवन स्‍तर में बढ़ोतरी होने के बाद भी उन लोगों की संख्‍या में अब भी कमी नही आई है जो रात को भूखे पेट सोते हैं। अब भी ऐसे बच्‍चों की संख्‍या लाखों में हैं, जो कुपोषण के कारण पांच वर्ष से कम आयु में ही दम तोड़ देते हैं। खाना परोसते वक्‍त इस बात ध्‍यान जरूर रखें कि आपको भूख कितनी है। कहीं ऐसा न हो कि आप अपनी प्‍लेट में किसी और के हिस्‍से का निवाला परोस लें।

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विश्व खाद्य दिवस

विश्व खाद्य दिवस (वर्ल्ड फ़ूड डे) हर साल 16 अक्टूबर को दुनिया भर में मनाया जाता है। वर्ष 1945 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा शुरू किए गए खाद्य और कृषि संगठन की स्थापना की तिथि के सम्मान में यह वार्षिक उत्सव मनाया जाता है। विश्व खाद्य दिवस (वर्ल्ड फ़ूड डे) को कई अन्य संगठनों, जैसे इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट, वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम आदि, द्वारा बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है जो खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों से संबंधित हैं।

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विश्व खाद्य दिवस (वर्ल्ड फ़ूड डे) का इतिहास

विश्व खाद्य दिवस (वर्ल्ड फ़ूड डे-WFD) की स्थापना संगठन के 20वें जनरल सम्मेलन में नवंबर 1979 में AFO (खाद्य और कृषि संगठन) के सदस्य देशों द्वारा की गई थी। डॉ पाल रोमानी, हंगरी के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य और तत्कालीन कृषि और खाद्य मंत्री, ने AFO के 20वें जनरल सम्मेलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और दुनिया भर में वर्ल्ड फ़ूड डे-WFD को लॉन्च करने का विचार प्रस्तावित किया था। तब से हर साल विश्व खाद्य दिवस (वर्ल्ड फ़ूड डे) 150 से अधिक देशों में मनाया जाता है और भूख तथा गरीबी के पीछे समस्याओं और कारणों की चेतना और ज्ञान के बारे में जागरूकता फैलाई जाती है।

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क्यों है जरूरी

इसका कारण दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा को सुरक्षित और उन्नत करना है खासकर संकट के दिनों में। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन ने विश्व खाद्य दिवस को संभव बनाने और इसके लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसका वार्षिक उत्सव खाद्य और कृषि संगठन के महत्व को दर्शाता है। यह दुनिया भर में सरकारों द्वारा लागू प्रभावी कृषि और खाद्य नीतियों की महत्वपूर्ण आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाने में भी मदद करता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दुनिया भर में हर किसी के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध हो।

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न बने भूख का देश

दुनिया में जितने लोग भुखमरी के शिकार हैं, उनमें से एक चौथाई लोग सिर्फ भारत में रहते हैं। इस सूची में भारत को 'अलार्मिंग कैटेगरी' में रखा गया है। इसमें भयानक गरीबी झेलने वाले इथोपिया, सूडान, कांगो, नाइजीरिया और दूसरे अफ्रीकी देश भी शामिल हैं। इससे भी हैरतअंगेज बात यह है कि अपने देश में 5 साल से कम उम्र के 10 लाख बच्चे हर साल कुपोषण का शिकार होकर मौत का ग्रास बनते हैं। भुखमरी के मामले में हम हमारे हालात कई पड़ोसी मुल्कों से भी बदतर है।

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भारत में इसकी उपयोगिता

भारत विविध संस्कृति और परंपरा का एक विशाल देश है। यह परंपरा अलग-अलग राज्य के हिसाब से भिन्न-भिन्न होती है और प्रत्येक राज्य में विभिन्न त्यौहारों को अलग-अलग शैलियों में मनाया जाता है लेकिन हर उत्सव में भोजन आम तत्व होता है। खाद्य पदार्थों की किस्मों को परिवारों और दोस्तों के बीच अनुष्ठानों के रूप में तैयार, खाया और वितरित किया जाता है। विवाह भारतीयों के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से एक है जहाँ विभिन्न खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं और बचा हुआ खाना व्यर्थ हो जाता है। इस तरह के परिवारों को अतिरिक्त भोजन सुरक्षित रखना चाहिए और गरीबों और जरूरतमंद लोगों में इसे वितरित करना चाहिए। यह कदम बहुत अंतर उत्पन्न कर देगा क्योंकि कोई भूखा नहीं सोएगा और भोजन भी व्यर्थ नहीं रहेगा। निजी कंपनियां और सरकारी संगठन एक ऐसी योजना चला सकते हैं जहां उन कर्मचारियों के वेतन से कुछ प्रतिशत वेतन काट लिया जा सकेगा जो स्वैच्छिक रूप से खाद्य बैंक के लिए दान करना चाहते हैं और प्राकृतिक आपदाओं, विपत्तियों आदि के समय में इस इकट्ठा किए गए धन का उपयोग किया जा सकेगा।

हमारा प्रयास ही हमारा भविष्‍य है

हर साल विश्व खाद्य दिवस (वर्ल्ड फ़ूड डे) पर एक थीम निश्चित की जाती है। इसका उद्देश्‍य इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और सफल बनाना है। इसी श्रृंखला में इस वर्ष की थीम भी निश्चित की गई है। इस बार ‘हमारे कार्य हमारे भविष्य हैं’ थीम निश्चित की गई है। इसका अभिप्राय है कि विश्‍व भर से भूख मिटाने की दिशा में हम आज जो प्रयास करेंगे, वही प्रयास हमारा भविष्‍य तय करेंगे।