World down syndrome day: बच्चों के जीवन में खास महत्व रखता है ये दिन, जानें डाउन सिंड्रोम से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें

World down syndrome day 2022: वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे को हर साल 21 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन छोटे बच्चों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस जेनेटिक रोग के लक्षण ज्यादातर बचपन से ही विकसित हो जाते हैं।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : March 21, 2022 9:27 AM IST

हर साल 21 मार्च यानी आज के दिन को वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे के रूप में मनाया जाता है। डाउन सिंड्रोम एक गंभीर जेनेटिक रोग है और ज्यादातर बचपन में ही व्यक्ति इससे प्रभावित हो जाता है। इस रोग को ट्राइसोमी 21 भी कहा जाता है, जो कि इसका मेडिकल नाम है। डाउन सिंड्रोम से ग्रस्त बच्चे की बौद्धिक क्षमता अन्य स्वस्थ बच्चों के काफी कम होती है और उसे अपने जीवन से सामान्य कार्य करने में भी काफी दिक्कत होती है। इसलिए डाउन सिंड्रोम बच्चों के जीवन के लिए खास महत्व रखता है। वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे को पहली बार संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2006 में मनाया गया था। इसके मेडिकल नाम ट्राइसोमी 21 के आधार पर ही इसके मनाने के लिए 21 मार्च को चुना गया था। डाउन सिंड्रोम एसोसिएशन सिंगापुर ने डाउन सिंड्रोम इंटरनेशनल (DSi) की ओर से डब्ल्यूडीएसडी (WDSD) नामक एक वेबसाइट लॉन्च की थी, ताकि दुनियाभर में डाउन सिंड्रोम से जुड़ी गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सके। 2013 में डाउन सिंड्रोम के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए जुराबें पहने के अभियान चलाए गए और इस अभियान का नाम “लॉट्स ऑफ सॉक्स” रखा गया। यह अभियान इसलिए चलाया गया क्योंकि डाउन सिंड्रोम से जुड़े क्रोमोसोम्स की आकृति जुराबों के जैसी होती है।

बच्चों के जीवन में इस दिन का महत्व

डाउन सिंड्रोम से ग्रसित बच्चों का जीवन आम नहीं होता है और उन्हें अपने जीवन में अनेक प्रकार की जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। यह दिन दुनियाभर में लोगों को इस रोग के प्रति जागरूक होने का संदेश देता है, ताकि लोग ज्यादा से ज्यादा इसके बारे में जानकारी रखें और इससे ग्रस्त बच्चों को सही और सटीक मदद मिल सके। डाउन सिंड्रोम की सटीक जानकारी होना ही इस रोग से निपटने का सबसे अच्छा विकल्प है।

लक्षणों की पहचान करना

डाउन सिंड्रोम से होने वाले लक्षण आमतौर पर रोग की गंभीरता पर निर्भर करते हैं, हालांकि, आमतौर पर देखे जाने वाले लक्षण आमतौर पर निम्न होते हैं

  • चेहरा सपाट न दिखाई देना
  • नाक सीधी न होना
  • जीभ बाहर की तरफ रहना
  • आंख के काले घेरे में सफेद निशान दिखाई पड़ना
  • पेरेंट्स को सलाह

डाउन सिंड्रोम बेहद गंभीर रोग है और इसे इलाज की मदद से पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सकता है। हालांकि, यदि इसका समय पर पता लग जाए तो स्थिति को गंभीर होने से बचाया जा सकता है और साथ ही काफी हद तक मरीज को महसूस हो रही जटिलताओं को भी कम किया जा सकता है। इसलिए यदि आपको लगता है कि आपके बच्चे में डाउन सिंड्रोम के लक्षण दिख रहे हैं, तो आपको जल्द से जल्द डॉक्टर के पास चले जाना चाहिए। वहीं यदि परिवार में पहले किसी को यह रोग है, तो गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर से इस बारे में बात करनी चाहिए। ताकि वे आपके बच्चे को यह जेनेटिक रोग होने से बचाने में आपकी मदद कर सकें।

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