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डायबिटीज से बढ़ जाता हैं कैंसर का खतरा, जा सकती है आंखों की रोशनी

वर्ल्ड डायबिटीज डे के अवसर पर जान लें ये जानकारियां। ©Shutterstock

हर 11 में से एक युवा डायबिटीज से पीड़ित है। वर्ष 2040 तक इस संख्या के बढ़कर 64.2 करोड़ होने की संभावना है।

डायबिटीज की बीमारी विश्व की सबसे बड़ी परेशानी है। स्वीडिश नेशनल डायबिटीज रजिस्टर के शोधकर्ताओं के अनुसार डायबिटीज के मरीजों में कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में 20 प्रतिशत ज्यादा होता है। वहीं डायबिटीज के मरीजों में स्तन कैंसर का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में 5 प्रतिशत ज्यादा होता है।

जिन लोगों को कैंसर हो और वे डायबिटीज से भी पीड़ित हों तो उनमें स्तन कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर के कारण मौत की क्रमश: 25 प्रतिशत और 29 प्रतिशत अधिक आशंका होती है। दुनियाभर में करीब 41.5 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। हर 11 में से एक युवा डायबिटीज से पीड़ित है। वर्ष 2040 तक इस संख्या के बढ़कर 64.2 करोड़ होने की संभावना है। पांच झूठ जो डायबिटीज के मरीज डॉक्टर से बोलते हैं।

आंखों की जा सकती है रोशनीः डायबिटीज से देश में सात करोड़ लोग पीड़ित हैं। यह आंखों की बीमारी की पांचवीं बड़ी वजह है। डायबिटीज के मरीजों को चाहिए कि वह साल में एक बार आंखों के पर्दे की जांच जरूर कराएं। इस पर काबू नहीं की तो आंख की रोशनी (अंधता) जाने का खतरा काफी बढ़ जाता है। टीबी और डायबिटीज का इलाज एक ही टीके से हो सकता है संभव।

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70 प्रतिशत डायबिटीज रोगी को आंखों में परेशानीः इंडोक्राइन विभागों के डाटा को अगर देखा जाय तो रोजाना डायबिटीज के 70 से अधिक मरीज आते हैं। इनमें से 60 से 70 फीसदी डायबिटीज मरीजों में आंख के पर्दे की जांच में दिक्कत मिलती है। यानी कि इन डायबिटीज मरीज की आंख की रोशनी जाने का खतरा रहता है। ऐसे में इनका तुरंत इलाज किया जाना जरूरी होता है। दवाओं के उपयोग से भी हो सकती है फेफड़े की बीमारी।

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