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Written By: akhilesh dwivedi | Published : October 11, 2018 11:28 PM IST
जुवेनाइल अर्थराइटिस के लक्षण और बचाव। © Shutterstock
विश्व अर्थराइटिस दिवस के अवसर पर बच्चों को होने वाले इस अर्थराइटिस को जानना बेहद जरूरी है। अक्सर बचपन में कुछ गलतियों को नजरअंदाज करने पर गंभीर बीमारी के शिकार हो जाते हैं। जुवेनाइल अर्थराइटिस भी इसी में से एक है। अगर बच्चा के जोड़ों में दर्द की शिकायत करता है तो इसे कभी भी नजरअंदाज न करें। बचपन की ये गलती बच्चे के लिए घातक हो सकती है। एक्सपर्ट्स की माने तो अगर बच्चा जोड़ों में दर्द की शिकायत करता है तो उसे तत्काल यूर्मेटॉलाजिस्ट को दिखाना चाहिए।
आंकड़ों की माने तो लगभग 2 प्रतिशत बच्चे जुवेनाइल अर्थराइटिस के शिकार होते हैं। जुवेनाइल अर्थराइटिस के बारे में बहुत कम लोगो जानते हैं जिसकी वजह से बच्चे विकलांग हो जाते हैं। अगर समय पर इस परेशानी को समझ लिया जाय तो बच्चे का जीवन विकलांगता से बचाया जा सकता है।
भारत में ज्यादातर हड्डी रोगों के लिए एक ही तरह के चिकित्सक मौजूद हैं। जुवेनाइल अर्थराइटिस का इलाज कायदे से यूर्मेटॉलाजिस्ट को करना होता है लेकिन यहां ज्यादातर लोग आर्थोपेडिक सर्जन से ही इलाज होता है। भारत में यूर्मेटॉलाजिस्ट एक्सपर्ट्स की कमी भी इसका एक कारण है।
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आंकड़ों की माने तो देश में 100 से 150 के बीच ही यूर्मेटॉलाजिस्ट की संख्या होगी जो अर्थराइटिस का सही तरीके से इलाज कर सकते हैं। बच्चों के अर्थराइटिस का इलाज करने के लिए तो डॉक्टर्स की संख्या तो और भी कम है।
बीमारी की जानकारी न होने की वजह से लोगों और भी परेशानी उठानी पड़ती है। बच्चों में होने वाले जुवेनाइल अर्थराइटिस की पहचान सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। अगर आपके बच्चे में इस तरह के कोई भी लक्षण दिखाई दें तो उसे तत्काल यूर्मेटॉलाजिस्ट के पास ले जाएं।
अगर समय रहते जुवेनाइल अर्थराइटिस का इलाज नहीं होता है तो बच्चा विकलांग हो सकता है। यह बीमीरी आमतौर पर 16 साल से कम उम्र के बच्चों को ज्यादा प्रभावित करती है।
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जुवेनाइल आर्थराइटिस से बचावः जुवेनाइल आर्थराइटिस आमतौर पर 6 महीने से 18 साल के बच्चों को होता है। इससे बचाव के लिए बच्चों को प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स से भरा आहार देना चाहिए। बच्चों के खाने में हरी सब्जियां, फल, ड्राई फ्रूट्स और सलाद शामिल करें। बच्चों को तेल, मसाले से बने बाजार के फूड्स, तले-भुने फूड्स और जंक फूड्स खाने से रोकें। इसके अलावा बच्चों को रोज एक्सरसाइज और खेल-कूद के लिए प्रेरित करें। व्यायाम से पहले थोड़ी स्ट्रेचिंग जरूरी है। गेम के लिए आउटडोर गेम को ज्यादा महत्व दें क्योंकि आजकल के बच्चों में घर के अंदर रहने और मोबाइल, लैपटॉप पर गेम खेलने की प्रवृत्ति ज्यादा आ गई है जो स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक है।