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'वर्ल्ड अर्थराइटिस डे' आज यानी 12 अक्टूबर को मनाया जाता है। उम्र बढ़ने पर अक्सर लोगों को अर्थराइटिस या गठिया की शिकायत होने लगती है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बॉडी में यूरिक एसिड की अधिकता होना होता है। जब यूरिक एसिड बॉडी में ज्यादा हो जाता है तो वह शरीर के जोड़ो में छोटे-छोटे क्रिस्टल के रूप में जमा होने लगता है। इसी कारण जोड़ों में दर्द और ऐंठन होती है। गठिया यानी अर्थराइटिस को कई स्थानों पर आमवत भी कहा जाता है।
क्या है गठिया ? जब हड्डियों के जोड़ों में यूरिक एसिड जमा हो जाता है तो वह गठिया का रूप ले लेता है। यूरिक एसिड कई तरह के आहारों को खाने से बनता है। रोगी के एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है। इस रोग में जोड़ों में गांठें बन जाती हैं और शूल चुभने जैसी पीड़ा होती है, इसलिए इस रोग को गठिया कहते हैं।
भारत में पाया जाने वाला सबसे आम अर्थराइटिस ऑस्टियो अर्थराइटिस है। देश भर में 22 से 39 प्रतिशत लोग इससे पीड़ित हैं। इसके कारण जोड़ों के लिए कुशन का काम करने वाले कार्टिलेज घिस जाते हैं। इसकी वजह से जोड़ों में सूजन और दर्द हो जाता है। ऑस्टियो अर्थराइटिस उम्र बढ़ने, मोटापा, हॉर्मोन्स के अनियंत्रित हो जाने और बैठे रहने वाली जीवनशैली के परिणामस्वरूप होता है। आमतौर पर घुटने, कूल्हे, पैर और रीढ़ इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
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रूमेटॉयड अर्थराइटिस (आरए), अर्थराइटिस का एक अन्य प्रकार है। आरए एक ऑटोइम्यून डिजीज है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर पर, खासतौर से जोड़ों पर हमला करना शुरू कर देती है। इसे नजरंदाज करने पर जोड़ों में सूजन और गंभीर क्षति हो सकती है। आरए के मरीजों की त्वचा पर गांठें बन जाती हैं जिन्हें रूमेटॉयड नॉड्यूल्स कहते हैं। यह अक्सर जोड़ों जैसे पोरों, कुहनी या ऐड़ी में होता है।
डॉक्टर को दिखाने के साथ-साथ अगर आप गठिया के लिए कुछ घरेलू नुस्खे अपनाएं तो आपको जल्दी आराम मिलेगा। तो आइए जानते हैं गठिया के दर्द से निजात पाने के कुछ घरेलू उपाय -
लहसुन
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अर्थराइटिस में लहसुन का सेवन।[/caption]
गठिया के रोग में लहसुन बेहद लाभकारी होता है। इसके सेवन से गठिया के रोग में आराम मिलता है। वैसे अगर इसे खाना पसंद न हो तो इसमें सेंधा नमक, जीरा, हींग, पीपल, काली मिर्च और सोंठ की सभी की 2-2 ग्राम मात्रा लेकर अच्छे से पीस लें। इस पेस्ट को अरंडी के तेल में भून लें और बॉटल में भर लें। दर्द होने पर लगाएं। आराम मिलेगा।
बथुआ के ताजा पत्तों का रस
बथुआ के ताजा पत्तों का रस हर दिन 15 ग्राम पिएं। इसमें स्वाद के लिए कुछ भी न मिलाएं। खाली पेट पीने से ज्यादा लाभ होता है। तीन महीने पीने से दर्द से हमेशा के लिए निजात मिल जाती है।
भाप से सेंक लें
गठिया के दर्द में सिकाई करना मना होता है लेकिन अगर आप भाप यानी स्टीम लेते हैं तो आपको आराम मिलेगा। इसके लिए गुनगुने पानी में तौलिया भिगोकर दर्द वाली जगह पर सिकाई कर दें।
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ज्यादा से ज्यादा पानी पीना
गठिया से पीड़ित होने पर ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पानी पिएं। शुरुआत में बार-बार पेशाब जाने पर आपको दिक्कत हो सकती है लेकिन कुछ दिनों में आराम मिल जाएगा।
एलोवेरा
एलोवेरा के पत्ते को काटकर उसका जेल दर्द होने वाली जगह पर लगाएं। इससे काफी राहत मिलेगी।
आलू का रस
गठिया का दर्द होने पर हर दिन खाना खाने से पहले दो आलू का रस निकाल लें और पिएं। हर दिन कम से कम 100 मिली. रस पीने से आराम मिलेगा।
सोंठ का सेवन
सोंठ यानी सूखी अदरक का सेवन करने से गठिया के रोग में आराम मिलता है। इसे आप किसी भी रूप में पकाकर खा सकते हैं जैसे - हरीरा या लड्डू आदि।