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Written By: Anshumala | Published : May 18, 2020 11:37 AM IST
Reports from the National Centre for Biotechnology Information highlight that the third Sustainable Development Goal (SDG-3) aims to end the HIV/AIDS epidemic by 2030, a goal referred to as Project 2030. The achievement of this objective hinges on reducing the number of new HIV AIDS infection deaths by 90% between 2010 and 2030.
आज 'विश्व एड्स वैक्सीन दिवस 2020' (World AIDS Vaccine Day 2020) है। हर साल 18 मई को यह दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को वैक्सीन या टीके के प्रति जागरूक करना और एचआईवी/एड्स के प्रति शिक्षित करना है। इस दिवस को 'एचआईवी वैक्सीन अवेयरनेस डे' के रूप में भी जाना जाता है। एड्स के बारे में हर किसी को सही जानकारी और जागरूक रहना बहुत जरूरी है। यह दिन कई स्वयंसेवकों, सामुदायिक सदस्यों, स्वास्थ्य पेशेवरों और वैज्ञानिकों को धन्यवाद देने का मौका प्रदान करता है, जो इस रोग (World AIDS Vaccine Day 2020 in Hindi) के रोकथाम के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी एचआईवी वैक्सीन खोजने के लिए लगातार काम और शोध कर रहे हैं।
अफ्रीका जैसे देशों में एड्स से बड़ों के साथ बच्चे भी एचआईवी (HIV) संक्रमित पाए जाते हैं, जो बेहद दुखद स्थिति है। आज भी लोगों को इस रोग के बारे में सही से पता नहीं है। लोगों के मन में एचआईवी/एड्स को लेकर कई गलत धारणाएं (Myths about AIDS) व्याप्त हैं, जिसे दूर करना बहुत जरूरी है। जानें, विश्व एड्स वैक्सीन दिवस 2020' (World AIDS Vaccine Day 2020) पर एड्स क्या है, इसके लक्षण, कारण, निदान और इलाज बारे में यहां...
एड्स एक जानलेवा बीमारी है। एचआईवी संक्रमण और एड्स से बचाव के लिए टीका (vaccine) को बढ़ावा देना बहुत आवाश्यक है। एड्स को एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशियेंसी सिंड्रोम (Acquired ImmunoDeficiency Syndrome) कहा जाता है। एचआईवी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस कहलाता है। एड्स से कोई व्यक्ति तब ग्रस्त होता है, जब वायरस सफेद रक्त कोशिकाओं (संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाओं) को क्षतिग्रस्त करके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नुकसान पहुंचाता है। एड्स, एचआईवी के बाद की अधिक गंभीर स्थिति होती है, जिसका इलाज ना किया जाए तो व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित होता है।
जब कोई व्यक्ति एचआईवी संक्रमित होता है, तो उसमें एड्स के लक्षण जल्दी नहीं दिखते हैं। एचआईवी जब गंभीर स्टेज में पहुंचता है, तो योनि में यीस्ट इंफेक्शन और श्रोणि सूजन की बीमारी (pelvic inflammatory disease) हो सकती है। संक्रमण, सिरदर्द, थकान, चक्कर आना, वजन का कम होते जाना, दस्त बने रहना, रात में सोते समय पसीना आना, बुखार, सूखी खांसी आदि लक्षण नजर आते हैं। कुछ लोगों में त्वचा पर अपर्याप्त बैंगनी विकास, रक्तस्राव, त्वचा पर चकत्ते, पक्षाघात, मानसिक भ्रम की समस्या भी शुरू हो जाती है। इनमें से कई लक्षण अन्य रोगों में भी दिखते हैं, लेकिन कई लक्षण काफी गंभीर हैं, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
एड्स से जुड़े इन मिथकों पर कहीं आप भी तो नहीं करते यकीन
जब कोई व्यक्ति किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ बिना कंडोम के सेक्स करे।
इंफेक्टेड व्यक्ति को लगे सुइयों का किसी दूसरे व्यक्ति पर इस्तेमाल करना।
एचआईवी संक्रमित रक्त से दूषित उपकरण या सुई का किसी स्वस्थ व्यक्ति पर यूज करना।
शिशु भी अपनी मां के जरिए एचआईवी एड्स से ग्रसित हो सकते हैं।
एचआईवी किसी व्यक्ति को है या नहीं इसका पता लगाने के लिए एंजाइम लिंक्ड इम्यूनोएब्जॉर्बेंट एसेस यानी एलिसा टेस्ट किया जाता है। एड्स के उपचार में एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (Antiretroviral therapy) और दवाइयों का उपयोग किया जाता है। ये दवाएं एचआईवी के प्रभाव को काम करते हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करते हैं। हालांकि, एड्स से बचाव ही एड्स का बेहतर इलाज है।
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