
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : November 29, 2020 5:56 PM IST
World AIDS/HIV Day 2020: Contraceptives methods, COVID-19,unwanted Births, STD's, कोरोना वायरस महामारी, भारत में एचआईवी/ एड्स, गर्भनिरोधक, अनचाहे गर्भ का खतरा यौन रोगों का ख़तरा, सेक्सुअली ट्रांसमिडेट डिज़िज़ेज
World AIDS/HIV Day 2020: कोरोना वायरस महामारी के कारण करीब ढ़ाई करोड़ भारतीयों को कॉन्ट्रासेप्टिव नहीं मिल सके हैं। जी हां, यूनाइटेड नेशन्स प्रोग्राम ऑन एचआईवी/एड्स (UNAIDS) की एक रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है कि भारत के लोगों को कोरोना वायरस महामारी को दौरान लगाए गए लॉकडाउन के कारण गर्भनिरोधक (Contraception) नहीं मिल सके हैं। एक्सपर्ट्स इसे अनचाहे गर्भ, नये बच्चों के जन्म और सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिज़िज़ेज़ में बढ़ोतरी की वजह मान रहे हैं। (Contraception during Covid-19 Pandemic)
हेल्थ अधिकारियों का कहना है कि कम और मध्यम-आय वाले देशों में नये बच्चों के जन्म में बढ़ोतरी हो रही है। क्योंकि, यहां कोरोना काल में लोगों के लिए बर्थ कंट्रोल के तरीकों या गर्भ निरोधक तक पहुंचना आसान ना हो सकता है।
इस रिपोर्ट का शीर्षक है, "Prevailing against pandemics by putting people at the centre" रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 संक्रमण से पहले दुनिया भर में एड्स के मामलों पर काफी हद तक काबू पाया जा सका था। लेकिन, महामारी के आने के साथ ही नयी चुनौतियां सामने आने लगी हैं।
एचआईवी इंफेक्शन की भविष्य में क्या स्थिति होगी इस बारे में इस रिपोर्ट में बताया गया है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि
विन्न बाइनाइमा (Winnie Byanyima), एक्जक्यूटिव डायरेक्टर, यूएनएआईडीएस (Executive Director of UNAIDS) का कहना है कि, एचआईवी को रोकने की दिशा में यह चूक बहुत भारी पड़ सकती है। ऐसे में, केवल आकर्षक कार्यक्रमों की शुरूआत करने भर से एड्स या एचआईवी को रोकना संभव नहीं होता। बल्कि, वैश्विक स्तर पर इसे रोकने के लिए महामारी के दौरान उन लोगों को उपचार और मदद में प्राथमिकता देनी होगी, जिन्हें सबसे अधिक ख़तरा है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, एचआईवी और अन्य बीमारियों की रोकथाम के लिए आर्थिक मदद और सही कार्रवाई की कमी के कारण ही वैश्विक स्तर पर कोविड-19 एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 से लोगों ने यह सबक सिखा है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पैसे लगाने से ना केवल ज़्यादा लोगों की जानें बचायी जा सकती हैं। बल्कि, इससे अर्थव्यवस्थाओं को भी मज़बूत बनाया जा सकता है।
उनका कहना है कि, कोई भी देश अकेले इस महामारी का सामना नहीं कर सकता। इसके लिए वैश्विक एकजुट हो कर और साझा ज़िम्मेदारी उठाते हुए हर एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के उपचार के प्रयास करने होंगे। ताकि, वैश्विक स्तर पर एचआईवी और एड्स की रोकथाम का काम आगे बढ़ाया जा सके।