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विश्‍व एड्स दिवस 2018 : तीस वर्ष बाद भी टेस्‍ट करवाने में शर्म महसूस करते हैं लोग

विश्‍व एड्स दिवस 2018 : तीस वर्ष बाद भी टेस्‍ट करवाने में शर्म महसूस करते हैं लोग
वर्ष 1988 में पहली बार 1 दिसंबर को विश्‍व एड्स दिवस मनाया गया था, जिसका उद्देश्‍य लोगों को इस महामारी के प्रति जागरुक करना था पर आज भी लोग इसके दुष्‍प्रभाव जानते हुए भी टेस्‍ट करवाने में झिझक महसूस करते हैं। © Shutterstock

वर्ष 1988 में पहली बार 1 दिसंबर को विश्‍व एड्स दिवस मनाया गया था, जिसका उद्देश्‍य लोगों को इस महामारी के प्रति जागरुक करना था पर आज भी लोग इसके दुष्‍प्रभाव जानते हुए भी टेस्‍ट करवाने में झिझक महसूस करते हैं।

Written by Yogita Yadav |Published : November 28, 2018 4:15 PM IST

विश्व एड्स दिवस, 1988 के बाद से हर साल 1 दिसंबर को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य एचआईवी संक्रमण के प्रसार की वजह से एड्स महामारी के प्रति जागरूकता बढाना  है। इसके बावजूद अब भी लोगों में इस बीमारी को लेकर कई तरह के भ्रम और लांछन मौजूद हैं। कितने ही मरीज तो ऐसे हैं जो शर्म ओर संकोच के कारण इलाज के लिए भी आगे नहीं आते। जबकि इस तरह वे अपनी ही नहीं, अपने प्रियजनों की जिंदगी भी दांव पर लगा देते हैं। यह भी पढ़ें - मुंबई में 38 हजार से ज्‍यादा लोग एचआईवी संक्रमित

एक मोटे अनुमान के मुताबिक, 1981-2007 तक करीब 25 लाख लोगों की मृत्यु एचआईवी संक्रमण की वजह से हुई। यहां तक कि कई स्थानों पर एंटीरेट्रोवायरल उपचार का उपयोग करने के बाद भी, 2007 में लगभग 2 लाख लोग (कुल का कम से कम 270,000 बच्चे) इस महामारी रोग से संक्रमित थे। यह भी पढ़ें – नीमका जेल में बंद 15 कैदी एचआईवी पॉजिटिव

क्‍या है एचआईवी

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एचआईवी एक वायरस है, यह रोग प्रतिरक्षा प्रणाली की टी-कोशिकाओं पर हमला करता है, जिससे एड्स हो जाता है। यह मानव शरीर के तरल पदार्थों में पाया जाता है जैसे: संक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य, योनि तरल पदार्थ, स्तन के दूध में जो दूसरों में सीधे संपर्क जैसे: रक्त आधान, ओरल सेक्स, गुदा सेक्स, योनि सेक्स या दूषित सुई का इंजेक्शन लगाने से फैलता है। यह प्रसव के दौरान या स्तनपान के माध्यम से गर्भवती महिलाओं से बच्चों में भी फैल सकता है।

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यहां हुई थी शुरूआत

यह पश्चिम-मध्य अफ्रीका के क्षेत्र में 19 वीं और 20 वीं सदी में हुआ था। असल में इसका कोई भी इलाज नहीं है, लेकिन हो सकता है कि कुछ उपचारों के माध्यम से इसका प्रभाव कम किया जा सके।

एचआईवी / एड्स के लक्षण और संकेत

लेकिन, इस रोग के कई मामलों में प्रारंभिक लक्षण कई वर्षों तक दिखाई नहीं देते जिसके दौरान एचआईवी वायरस के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली नष्ट हो जाती है, जो लाइलाज है। संक्रमित व्यक्ति इस अवधि के दौरान किसी भी लक्षण को कभी महसूस नहीं करता है और स्वस्थ दिखाई देता है।एचआईवी संक्रमण के आखिरी चरण में व्यक्ति एड्स की बीमारी से ग्रसित हो जाता है। आखिरी चरण में संक्रमित व्यक्ति को निम्नलिखित संकेत और लक्षण दिखने शुरू हो जाते है:

  • धुंधली दृष्टि
  • स्थायी थकान
  • बुखार (100F से ऊपर)
  • रात का पसीना
  • दस्त (लगातार और जीर्ण)
  • सूखी खाँसी
  • जीभ और मुंह पर सफेद धब्बे
  • ग्रंथियों में सूजन
  • वजन घटना
  • सांसों की कमी
  • ग्रास नलीशोथ
  • कपोसी सार्कोमा, गर्भाशय ग्रीवा, फेफड़ों, मलाशय, जिगर, सिर, गर्दन के कैंसर और प्रतिरक्षा प्रणाली (लिम्फोमा) का कैंसर।
  • मेनिनजाइटिस, इन्सेफेलाइटिस और परिधीय न्यूरोपैथी
  • टोक्सोप्लाज़मोसिज़ (मस्तिष्क का संक्रमण)
  • निमोनिया

इस तरह नहीं फैलता

एड्स के बारे में समाज में कुछ मिथक फैल गये हैं। एड्स हाथ मिलाने, गले लगने, छींकने, अटूट त्वचा को छूने या एक ही शौचालय के उपयोग के माध्यम से कभी नहीं फैलता है।

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