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Written By: Editorial Team | Published : January 14, 2019 10:35 AM IST
कनाडा के टोरंटो मिसिसॉगा विश्वविद्यालय के शोध में यह सामने आया है कि पुरुष जब उसी दर्द से दोबारा गुजरते हैं तो बहुत संवेदनशील रवैया अपनाते हैं, जबकि महिलाएं अपने पूर्व के अनुभवों के प्रति ज्यादा तनाव नहीं लेतीं। ©Shutterstock.
महिलाओं और पुरुषों की प्रकृति अलग-अलग होती है। न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक बुनावट में भी दोनों बहुत अलग हैं। यही स्थिति उनकी याददाश्त और पूर्व में भोगे के अनुभवों के प्रति तनाव के संदर्भ में भी है। यही वजह है कि ज्यादा दर्द और तकलीफ झेलने के बावजूद महिलाएं हर बार एक नई एनर्जी और स्पार्क के साथ तैयार हो जाती हैं। एक और शोध में यह बात स्पष्ट हो गई है कि महिलाएं अपने दर्द के प्रति बेहद बेपरवाह होती हैं।
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क्या कहता है शोध
कनाडा के टोरंटो मिसिसॉगा विश्वविद्यालय के शोध में यह सामने आया है कि पुरुष जब उसी दर्द से दोबारा गुजरते हैं तो बहुत संवेदनशील रवैया अपनाते हैं, जबकि महिलाएं अपने पूर्व के अनुभवों के प्रति ज्यारदा तनाव नहीं लेतीं। पुरुषों की तुलना में महिलाएं सहन किए गए ज्यादा दर्द को जल्दी भूल जाती हैं। चूहे व मानव पर किए गए एक शोध में इसकी पुष्टि हुई है। कनाडा की टोरंटो मिसिसॉगा विश्वविद्यालय (यूटीएम) के शोधकर्ताओं के शोध में पता चला है कि महिला व पुरुष पूर्व के कष्टदायी अनुभवों को अलग-अलग तरीके से याद रखते हैं।
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जब गुजरते हैं दोबारा उसी दर्द से
पुरुष पूर्व के कष्टदायी अनुभवों को स्पष्ट तौर पर याद रखते हैं, जबकि महिलाएं दर्द के प्रति बेपरवाह रवैया अपनाती हैं। इसी तरह के परिणाम नर व मादा चूहों में देखने को मिले। पुरुष जब दर्द का अनुभव दोबारा करने पर अतिसंवेदनशील रवैया दिखाते हैं, लेकिन महिलाएं अपने दर्द के पूर्व अनुभव से तनाव नहीं लेती हैं।
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दर्द अगर याद रहें तो प्रेरक का काम करता है
यूटीएम के सहायक प्रोफेसर लोरेन मार्टिन ने कहा, "अगर दर्द की याद, दर्द के लिए प्रेरक का कार्य करती है और हम समझते हैं कि दर्द को कैसे याद रखा जाए तो यादाश्त पर क्रियाविधि का इस्तेमाल करके हम कुछ पीड़ितों की मदद करने में समर्थ हो सकते हैं।"