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जनवरी को सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2012 की डब्लूएचओ रिपोर्ट के मुताबिक इस बीमारी से करीब 2,66,000 महिलाओं की जान जा चुकी है। सर्वाइकल कैंसर का पता लगाना और इसका इलाज कराना काफी आसान हो गया है लेकिन इसके लिए महिलाओं को अपने शरीर को अच्छी तरह से समझना उसके प्रति सचेत रहना और नियमित अपनी जांच कराना सबसे महत्वपूर्ण है।
लेकिन एक तिहाई महिलाएं सर्वाइकल कैंसर की जांच के दौरान अपने प्रायवेट हिस्सों को दिखाने की शर्मिदगी से बचने के लिए इनसे बचती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार दुनियाभर में कैंसर से मरने वाली महिलाओं में चौथा सबसे बड़ा कारण गर्भाशय ग्रीवा में होने वाला सर्वाइकल कैंसर है।
सर्वाइकल कैंसर की जांच के लिए 'स्मीयर टेस्ट' करना पड़ता है जिसमें नियमित रूप से पेेल्विक का परीक्षण कर नमूना एकत्रित कर उसकी जांच की जाती है। 21 से 29 वर्ष की महिलाओं के लिए इस परीक्षण की सिफारिश की जाती है। 3 वर्ष में एक बार कराए जाने वाले इस टेस्ट से कैंसर के मामलों में 75 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है।
बीबीसी रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में कैंसर के खिलाफ काम करने वाली एक संस्था ' सर्वाइकल कैंसर ट्रस्ट' द्वारा एक सर्वे कराया गया और इस सर्वे के परिणामों के मुताबिक 35 प्रतिशत लड़कियां और महिलाएं स्मीयर टेस्ट के दौरान यौन अंगों को डॉक्टर के सामने दिखाने से बचने के लिए यह टेस्ट कराती ही नहीं।
संस्था ने 2017 महिलाओं पर सर्वे करके यह परिणाम निकाला।
इस दौरान दो-तिहाई महिलाओं में इसके लिए जागरुकता की कमी पाई गई।
संस्था के सदस्य रॉबर्ट म्यूजिक ने कहा कि जीवन रक्षक परीक्षण कराने के लिए किसी शर्म का अनुभव नहीं करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को सहज महसूस कराने के लिए पेशेवर नर्से इस क्षेत्र में एक बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
स्रोत: आईएएनएस(IANS Hindi)
चित्रस्रोत:Shutterstock