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Written By: Pallavi Kumari | Updated : May 13, 2022 11:35 AM IST
बच्चों को परवरिश को लेकर अक्सर माता-पिता परेशान रहते हैं। ऐसे में कई बार वो सबसे ज्यादा इस चीज से परेशान रहते हैं कि उनके बच्चे उनकी बात क्यों नहीं सुनते (teenager not listening to parent)? अब हाल ही में आए शोध की मानें तो, कुछ बच्चे पिता से ज्यादा अपनी मां की बात नहीं मानते। इस शोध की मानें तो, कुछ बच्चे 13 साल की उम्र होते ही यानी कि टीनएज में जाते ही अपनी मांओं की बात मानना कम कर देते हैं या कहें कि बंद कर देते हैं। दरअसल, जर्नल और न्यूरोसाइंस ने (Journal of Neuroscience) उनकी इस हरकत के पीछे का कारण बताया है। इस जर्नल में प्रकाशित स्टडी की मानें तो, ये सब बच्चों के ब्रेन और न्यूरल फंक्शन में बदलाव के कारण हो सकता है।
जर्नल और न्यूरोसाइंस ने (Journal of Neuroscience) की मानें तो, 13 साल और उससे ज्यादा उम्र के बच्चों के दिमाग को स्कैन करते समय, उनकी मां की आवाज के लिए एक विस्फोटक तंत्रिका प्रतिक्रिया दिखाई दी और फिर मस्तिष्क ने इस रिएक्ट करने में बदलाव दिखाया। मां की आवाज़ अब वही न्यूरोलॉजिकल प्रतिक्रिया उत्पन्न नहीं करती है। परिवर्तन इतने स्पष्ट हैं कि शोधकर्ता बच्चे की उम्र का अनुमान केवल इस आधार पर लगा सकते हैं कि उनका मस्तिष्क उनकी मां की आवाज़ पर कैसे प्रतिक्रिया करता है। यानी कि किशोरावस्था में प्रवेश करने पर बच्चे अपनी मां की आवाज से संबंध खो देते हैं और उन्हें कम सुनते हैं। यानी कि किशोरों के दिमाग को अब माताओं की आवाज़ें विशिष्ट रूप से फायदेमंद नहीं लगती हैं और वे अपरिचित आवाजों में अधिक धुन सुनना चाहते हैं।
इस स्टडी में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के मनोचिकित्सक डैनियल अब्राम्स बताते हैं,"जैसे एक शिशु अपनी मां की आवाज में ट्यून करना जानता है, वैसे ही एक किशोर भी आवाजों के साथ ट्यून करना जानता है। एक किशोर के रूप में, बच्चे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं। पर उन्हें अपनी मां की आवाज से ज्यादा दोस्त और नए साथी की आवाज सुनना ज्यादा पसंद होता है। इसलिए उनका दिमाग दूसरी अपरिचित आवाजों तेजी से संवेदनशील और आकर्षित हो जाता है।
शोध की कुछ खोज 2016 में शोधकर्ताओं की उसी टीम द्वारा प्रकाशित fMRI परिणामों पर आधारित हैं, जिसमें पाया गया कि 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चे मस्तिष्क के सर्किट को चुनिंदा रूप से एक मां की आवाज से जोड़ते हैं। पर जब इसे 13 से 16.5 वर्ष की आयु के 22 किशोरों पर अध्ययन का विस्तार किया गया तो, उसमें एक मां की आवाज का उतना प्रभाव नहीं पड़ा।
इसके बजाय, किशोरों द्वारा सुनी जाने वाली सभी आवाजें तंत्रिका सर्किट को सक्रिय करती नजर आई जो कि मुख्य जानकारी निकालती हैं और सामाजिक यादें बनाती हैं। इसका मतलब ये है कि आपके बच्चे बिगड़ नहीं रहे बल्कि, अब सामाजिक हो रहे हैं। उनका किशोर मस्तिष्क सामाजिक कौशल विकसित करने का संकेत दे रहा है। दूसरे शब्दों में कहें तो, एक किशोर जानबूझकर अपने परिवार को बंद नहीं करता है बल्कि, उनका मस्तिष्क स्वस्थ तरीके से परिपक्व हो रहा है।