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देश की राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों की हवा लगातार जहरीली बनी हुई है। मंगलवार (18 नवंबर) को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद समेत पूरे एनसीआर की हवा और भी ज्यादा खराब हो गई है। मंगलवार को दिल्ली के इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 600 के पार पहुंच गया है। ये AQI प्रदूषण की सबसे घातक स्थिति को दर्शाता है। दिल्ली की आबोहवा को सही करने और बिगड़ती स्थिति को काबू में करने के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP Stage 4) को लागू किया है। हालांकि कोई ये पहला मौका नहीं है, जब दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इतने घातक स्तर पर पहुंच गया है।
हर साल दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के मौसम में वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर तक पहुंच जाती है। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि सरकार को GRAP (Graded Response Action Plan) के तहत सख्त पाबंदियां लागू करनी पड़ती हैं।
किसी भी राज्य में प्रशासन द्वारा GRAP स्टेज 4 तब लागू किया जाता है, जब वहां की हवा इमरजेंसी जोन में पहुंच जाती है। दिल्ली की हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच चुकी है इसलिए यहां पर GRAP स्टेज 4 लगाया गया है। इसके तहत दिल्ली में डीजल गाड़ियों की आवाजाही पर पाबंदी, कंस्ट्रक्शन पर रोक, डीजल ट्रकों की एंट्री बंद और औद्योगिक गतिविधियां सीमित कर दी गई हैं। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि GRAP Stage 4 लागू करने और इतनी सख्ती के बाद भी दिल्ली की हवा सुधर क्यों नहीं रही है? आइए जानते हैं इसके बारे में-
- आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दिल्ली का 30 से 40% प्रदूषण पराली जलाने का परिणाम है। GRAP सिर्फ दिल्ली में लागू होता है। लेकिन हवा का बहाव जब पंजाब–हरियाणा से दिल्ली की ओर होता है, तो धुआं सीधे दिल्ली-एनसीआर में आता है। पंजाब और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने पर पूर्ण रोक न होने के कारण दिल्ली में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता है।
- दिल्ली में नवंबर- दिसंबर के महीने में हवा की गुणवत्ता खराब होने का सबसे बड़ा कारण है मौसमी बदलाव होना। मौसम वैज्ञानिकों के कारण इन महीनों में दिल्ली की हवा भारी हो जाती है। जिससे प्रदूषक कण नीचे जमीन के पास जमा हो जाते हैं। Low wind speed की वजह से हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 ऊपर उठ नहीं पाते है। जिसकी वजह से प्रदूषण हवा में जमा होने लगते है।
- दिल्ली में कुल प्रदूषण का 30% तक गाड़ियों से पैदा होता है। ग्रैप स्टेज 4 में प्रशासन द्वारा भले ही डीजल की गाड़ियों पर रोक लगा दी जाती है, लेकिन BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल गाड़ियां बंद नहीं होती है। इससे भी वायु प्रदूषण का स्तर नहीं सुधरता है।
- इन सबके अलावा दिल्ली में प्राइवेट ट्रैफिक बहुत ज्यादा है। लाखों प्राइवेट कारें, बाइक, टैक्सी और डिलीवरी गाड़ियां रोज सड़क पर उतरती हैं। जिसकी वजह से भी वायु प्रदूषण होता है।
- GRAP Stage 4 में निर्माण कार्य बंद होने के बावजूद छोटे निर्माण कार्य, सड़क किनारे कटिंग और डस्ट कंट्रोल की कमी जारी रहती है। इसकी वजह से भी वायु प्रदूषण का स्तर ज्यों का त्यों बना रहता है। एक आंकड़े के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में खुले में पड़ी बिल्डिंग मटेरियल, मिट्टी और धूल हवा के चलते PM10 बढ़ाते हैं।
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।