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Written By: Yogita Yadav | Updated : August 21, 2018 11:56 AM IST
दुनिया भर में अग्नाश्य के कैंसर की संभावना और खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। फेफड़ों और कोलोरेक्टल कैंसर के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका में पेंक्रियाटिक कैंसर मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण है।
पुरुषों में से 63 में से 1 और महिलाओं में 65 में से 1 में इसके विकसित होने की संभावना होती है। अमेरिकी कैंसर सोसाइटी के मुताबिक, इस वर्ष लगभग 55,440 लोगों को पेंक्रियाटिक कैंसर यानी अग्नाशय के कैंसर का इलाज चल रहा है। जबकि 44,330 लोग ऐसे हैं जिनकी इस बीमारी से मृत्यु निश्चित है। क्वीन ऑफ सोल कही जाने वाली एरेथा फ्रेंकलिन का पिछले हफ्ते इसी बीमारी से 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया।
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हो जाती है मौत
विशेषज्ञों का कहना है कि अग्नाशय कैंसर वाले लगभग 9 5 प्रतिशत लोगों की मृत्यु हो जाती है। यह बहुत घातक है क्योंकि शुरुआती चरणों में, जब ट्यूमर का इलाज जल्दी किया जा सकता है, तब इसके लक्षण महसूस ही नहीं होते। शुरूआत में ऐसा लगता है कि यह केवल सामान्य पेट दर्द या पीलिया है। जबकि बाद में यह कैंसर का घातक रूप ले लेता है। अभी तक इसकी जांच कर सकने वाले उन्नत उपकरण भी मौजूद नहीं हैं। जैसे-जैसे लोगों की उम्र बढ़ती है, उनमें अग्नाशय कैंसर के विकास का खतरा बढ़ जाता है। अधिकांश रोगी 45 वर्ष से अधिक उम्र के होते हैं और लगभग 9 0 प्रतिशत 55 वर्ष से अधिक उम्र के।
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अधिक वजन भी है घातक
महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अग्नाशय कैंसर होने की संभावना अधिक होती है। इसका एक कारण पुरुषों द्वारा तम्बाकू उत्पादों का अधिक उपयोग करना है। अनुभव बताते हैं कि स्मोकिंग की आदत पुरुषों में महिलाओं की तुलना में अधिक है।
महिलाओं का अधिक वजन और पुरुषों की तंबाकू की लत इस रोग को बढ़ाने में प्रमुख कारक है। अमेरिकीयों में तो यह रोग और भी तेजी से फैल रहा है।
चित्र स्रोत:Shutterstock.