रूबेला क्यों है खतरनाक, क्यों जरूरी है टीका लगवाना ?

रुबेला एक व्यक्ति के खांसने या छींकने से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यानि यह बीमारी हवा में काफी तेजी से फैलाती है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : November 26, 2018 10:58 AM IST

रूबेला वायरस जिसे जर्मन खसरा भी कहा जाता है इसकी चर्चा आजकल भारत में बहुत ज्यादा हो रही है। देश के 12 राज्यों में एक बड़ा अभियान चलाकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा रूबेला से बचने के लिए टीकाकरण करवा रहा है। देश के 12 राज्यों के 9 महीने से 15 वर्ष तक की आयु के बच्चों को रूबेला का टीका लगवाया जा रहा है। रूबेला वायरस के बारे में कितना जानते हैं आप ? जानें खतरा और लक्षण।

रुबेला एक व्यक्ति के खांसने या छींकने से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यानि यह बीमारी हवा में काफी तेजी से फैलाती है। इसका वायरस सिर्फ इंसानों से ही फैलता है। रुबेला तेजी से फैलने वाली बीमारी है, रुबेला से हल्का बुखार और रैश (लाल दाने) होते है। यह दाने चेहरे और गर्दन से शुरू होते हैं फिर पूरे शरीर में फैल जाते हैं।

कैसे फैलता है रूबेलाः यह एक वायरस से फैलने वाला रोग है जो की एक इन्सान से दूसरे को फैलता है| जब कोई संक्रमित इन्सान आपके सम्पर्क में आता है या आपके पास आकर छीकता है तो आपको ये वायरस लग जाता है और आप बीमार पड़ने लग जाते है| रूबेला मुख्य रूप से संक्रमण से फैलने वाला वायरस है जो की आज के समय में तेजी से फैला रहा है।

रूबेला वायरस के लक्षण

  • सौ डिग्री टेम्प्रेचर या उससे अधिक का बुखार होना या फिर लम्बे समय से बुखार होना।
  • शरीर में लाल दाने या चकते होना।
  • ग्रंथियों में सूजन आना या दर्द होना।
  • शरीर में बहुत अधिक दर्द।
  • सर दर्द की समस्या लगातार बनी रहना।
  • आँखों में सूजन
  • भूख ना लगना
  • थकान और चक्कर आना

प्रेगनेंसी में खतरा ज्यादा 

अभी तक रूबेला के जितने भी केस सामने आये है उनमे सबसे अधिक प्रभावित गर्भवती महिला और उनसे होने वाले बच्चे है| जैसा ही हमने बताया की वायरस से फैलने वाला रोग है और अगर ये माँ को हो जाता है तो सीधे तौर पर उसके होने वाले बच्चे को प्रभावित करता है| इसी वजह से देशभर में महिलाओ और बच्चो को टीके लगाये जा रहे है।

गर्भवती महिला पर इसका असर होने से बच्चे में कई सारी खामियां आ जाती है जैसे बच्चे का दिव्यांग होना सबसे बड़ा उदाहरण है। इसमें बच्चे के अंग प्रभावित होते है। बच्चा सही से देख और सुन नहीं पाता है। सबसे अधिक उसकी श्रव्य शक्ति यानी की उसके कान प्रभावित होते है| इसके अलावा बच्चा कमजोर पैदा होता है और उसके शरीर में अंग भी सही से काम नहीं करते है जो की उसके जीवन के लिए के बड़ा खतरा बन जाता है| इससे प्रभावित होने वाले बच्चे दिमागी रूप से कमजोर होते है।

बचाव के उपाय 

इससे बचने के लिए आपको सबसे पहले इसका टीका लगवाना चहिये| इसके अलावा पाने खान पान को सही करना चहिये और ऐसी चीजो का सेवन करना चहिये जो की आपके शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाती है| शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक हो जाने पर यह आपको प्रभावित नहीं करेगा| इसके अलावा संक्रमण से बचे और इससे प्रभावित व्यक्ति के पास जाने से बच्गे और बाहर घूमने पर मास्क का इस्तेमाल करे जिससे हवा में मौजूद इसके वायरस आपके आसपास नहीं आयेगे और आप स्वस्थ रहेगे और इसे वायरस से बचा जा सकता है।

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