
प्रिया मिश्रा
प्रिया को पिछले 4 सालों से हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर लिखने का अनुभव है। इन्हें हेल्थ और ... Read More
Written By: priya mishra | Updated : May 25, 2024 12:31 PM IST
दुनियाभर में एक बार फिर से काली खांसी का प्रकोप बढ़ रहा है। हाल ही में आई खबर के मुताबिक, अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों में इस बीमारी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2023 की सर्दियों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ अजीब नोटिस किया। यूरोप में काली खांसी के मामले तेजी से बढ़ रहे थे। सिर्फ यूरोप ही नहीं, अमेरिका में भी काली खांसी के मामलों में वृद्धि देखी गई।
यूरोप सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ईसीडीसी) के मुताबिक, जनवरी और मार्च 2024 के बीच पूरे यूरोप में काली खांसी के लगभग 32,000 मामले दर्ज किए गए। ईसीडीसी के अनुसार, यूरोप में काली खांसी के मामलों का वार्षिक औसत 38,000 है। यदि ऐसा ही जारी रहा तो सामान्य वर्ष की तुलना में 2024 में काली खांसी के मामले लगभग 10 गुना बढ़ सकते हैं।
काली खांसी को वूपिंग कफ या पर्टुसिस भी कहा जाता है। यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, काली खांसी बैक्टीरियम बोर्डेटेला पर्टुसिस के कारण होती है। यह हमारे अपर रेस्पिरेटरी सिस्टम पर अटैक करता है और टॉक्सिंस छोड़ता है, जिससे वायु मार्ग में सूजन हो सकती है।
काली खांसी के शुरुआती लक्षण काफी हद तक सामान्य सर्दी की तरह दिखते हैं, जिसकी वजह से इस बीमारी का पता तब तक लगा पाना मुश्किल है जब तक इसके गंभीर लक्षण सामने ना आएं। इसके सामान्य लक्षण में हल्की खांसी, नाक बंद होना और हल्का बुखार शामिल है। एक से दो हफ्ते बाद लक्षण गंभीर हो सकते हैं और बहुत तेज और अनियंत्रित खांसी के दौर में बदल सकते हैं, जो 10 हफ्ते तक चल सकते हैं। इसके अलावा, सांस लेने पर 'हूप' की आवाज आ सकती है।
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