
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 26, 2020 12:00 PM IST
WHO ने किया कोविड मरीज़ों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन देने से मना ।
कोविड-19 इंफेक्शन (Covid-19 infection) के लिए मददगार बतायी जा रही दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine) मुख्य रूप से मलेरिया के इलाज में काम आने वाली एक दवा है। लेकिन, अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने कोरोना मरीज़ों के लिए इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। चूंकि, इस इंफेक्शन का कोई वैक्सीन या दवा नहीं उपलब्ध है। इसीलिए, पहले से इस्तेमाल की जा रही दवाइयों के प्रभाव को बढ़ाने और उनकी मदद से कोरोना वायरस (Coronavirus Pandemic) के इलाज की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
मलेरिया के इलाज के लिए प्रयोग की जाने वाली हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को कोविड इंफेक्शन (Covid-19) के मरीज़ों के लिए कारगर होने के दावे पिछले कुछ दिनों से किए जा रहे थे। गौरतलब है कि यह वही दवा है जिसके लिए अमेरिका औऱ भारत लगातार सम्पर्क में बने हुए हैं। भारत अमेरिका और अन्य देशों को इस दवा को बड़ी मात्रा में एक्सपोर्ट भी करता है। लेकिन अब वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने इस पर बैन लगा दिया है। (Hydroxychloroquine banned by WHO)
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस संदर्भ में सोमवार को बताया कि सावधानी के तौर पर कोविड के इलाज के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन क्लिनिकल ट्रायल को कुछ समय के लिए प्रतिबंधित किया जा रहा है। दरअसल, इस बात की जांच की जा रही है कि कोविड इंफेक्शन (Covid Patients) से पीड़ित लोगों को अगर यह दवा दी जाती है तो क्या उनकी मृत्यु भी हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बताया कि अब आगे आने वाली रिपोर्ट्स के आधार पर ही अगला फैसला लेगी ।
गौरतलब है कि , विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कुछ दिनों पहले मलेरिया सहित कुछ और बीमारियों के इलाज में काम आने वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन (Hydroxychloroquine )या क्लोरोक्विन को कोविड-19 इंफेक्शन के इलाज में इस्तेमाल को लेकर सावधान किया था। उनका मानना है कि इन दवाइओं को क्लिनिकल ट्रायल में इस्तेमाल के लिए रिज़र्व करना आवश्यक है।
यह भारत में बनने वाली एक दवा है। जिसे, मलेरिया और आर्थराइटिस जैसी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। कोरोना वायरस महामारी के समय में अमेरिका जैसे देशों में इस दवा का प्रयोग कोविड मरीज़ों के लिए किया गया। जहां, इसके कुछ अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं। जिससे, अमेरिका सहित कई देशों ने इस दवा को आयात करने के लिए भारत से मांग की है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस दवा का सार्स-सीओवी-2 पर विशेष प्रभाव पड़ता है। जो, कि कोविड-2 की वजह बताया जा रहा है। इसीलिए, कोविड पेशेंट्स को यह दवा दी जा रही है।
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