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Written By: Pallavi | Published : August 26, 2022 9:44 AM IST
मंकीपॉक्स वायरस दुनियाभर के कई देशों में फैल चुका है। भारत में भी इसके कई मामले देखे गए हैं। पर इसी बीच लोगों ने राहत की भी सांस ली जब मंकीपॉक्स वैक्सीन आया और लोगों ने इसके टीके लिए। पर अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मंकीपॉक्स वैक्सीन की प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि हम मंकीपॉक्स वैक्सीन (monkeypox vaccine) पर पूरी तरह से भरोसा नहीं कर सकते, क्योंकि इसे लगवाने के बाद भी लोग इस वायरस से संक्रमित हुए हैं। इसके अलावा भी वैक्सीन के बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बहुत कुछ कहा। आइए जानते हैं विस्तार से।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने खुलासा किया है कि प्रारंभिक रिपोर्ट में वैक्सीन की प्रभावशीलता के बारे में विस्तार से बताने के बाद मंकीपॉक्स के कई मामले सामने आए हैं। इस प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि, मंकीपॉक्स के लिए डब्ल्यूएचओ के ज्वाइंट हेड डॉ. रोसमंड लुईस ने बताया है कि वैक्सीन लगने के बाद भी लोगों को मंकीपॉक्स हुआ। इसलिए हम ये नहीं कह सकते हैं कि टीका एक चांदी की गोली है। हमें लगता है कि यह उन सभी अपेक्षाओं को पूरा नहीं करेगी जो इस पर लगाई जा रही हैं और हमारे पास इस संदर्भ में ठोस प्रभावी डेटा नहीं है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगे ये भी कहा कि भले ही कुछ लोगों में इस टीके ने प्रभावी ढंग से काम किया है लेकिन वास्तव में यह टीका किसी भी परिस्थिति में 100% प्रभावी नहीं है, चाहे वह रोकथाम के लिए हो या पोस्ट-एक्सपोज़र। हम इस उभरती हुई जानकारी के आधार पर इस समय 100% प्रभावशीलता की उम्मीद नहीं कर सकते।
अब हमें यह समझना होगा कि मंकीपॉक्स मुख्य रूप से त्वचा से त्वचा के संपर्क, शारीरिक तरल पदार्थ या घावों के सीधे संपर्क के माध्यम से फैलता है, और ये सांस की बूदों द्वारा भी फैल सकता है। सीडीसी का कहना है कि व्यक्ति उन लोगों के साथ त्वचा से त्वचा के संपर्क से बच सकते हैं, जिन्हें मंकीपॉक्स जैसा दिखने वाला रैश है। साथ ही उनकी वस्तुओं और सामग्रियों के संपर्क से भी आपको बचना चाहिए है जिनका उपयोग मंकीपॉक्स से पीड़ित व्यक्ति ने किया है।
बता दें कि रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्रों के अनुसार, अब तक 94 देशों में मंकीपॉक्स के 41,358 मामले आए हैं। जिसमें से सबसे ज्यादा मामले अमेरिका में हैं।