लंदन की नालियों में मिला पोलिया वायरस! एक्सपर्ट का दावा स्थानीय स्तर पर फैल सकता है पोलियो

डब्लूएचओ और ब्रिटिश स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि लंदन की नालियों से लिए गए सैंपल में वैक्सीन से पैदा होने वाला एक प्रकार का पोलियोवायरस मिला है।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 24, 2022 2:57 PM IST

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) और ब्रिटिश स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि लंदन की नालियों से लिए गए सैंपल में वैक्सीन से पैदा होने वाला एक प्रकार का पोलियोवायरस मिला है। हालांकि इस वायरस को लेकर अभी अधिकारियों की जांच चल रही है। ब्रिटेन में फिलहाल पोलियो का कोई मामला सामने नहीं आया है। ब्रिटेन में दो दशक पूर्व इस घातक बीमारी को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया था।

वैक्सीन से पैदा हुआ ये वायरस

डब्लूएचओ ने एक बयान में कहा है कि टाइप-2 वैक्सीन से पैदा होने वाला पोलियोवायरस (VDPV2) ब्रिटेन की राजधानी में पर्यावरणीय सैंपल जैसे नालियों, सीवर आदि में पाया गया है। स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि ये बात जानना बहुत ही जरूरी है कि ये वायरस सिर्फ पेड़-पौधों, नालियों, सीवर जैसे पर्यावरणीय जगहों से लिया गया है। हालांकि राहत भरी खबर ये है कि पैरालिसिससे जुड़ा कोई भी मामला अभी तक सामने नहीं आया है।

बच्चों के लिए खतरा पोलियो

डब्लूएचओ ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार का पोलियावायरस फिर चाहे वो कहीं भी हो किसी भी जगह के बच्चों के लिए खतरा साबित हो सकता है। पोलियो को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी दुनिया दशकों से अथक प्रयास कर रही है। पोलियो एक ऐसी घातक बीमारी है, जो मुख्यतौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है।

दो दशकों में 99 फीसदी तक आई कमी

1988 से पोलियो के मामलों में 99 फीसदी तक कमी दर्ज की गई है। 1988 में पोलियो करीब 125 देशों में फैला था और दुनियाभर में इसके साढ़े तीन लाख से ज्यादा मामले सामने आए थे। बता दें कि वैक्सीन का ये जंगली रूप अभी सिर्फ अफगानिस्तान और पाकिस्तान में ही मौजूद है। लेकिन वैक्सीन का एक प्रकार, जिसमें सक्रिय पोलियो की कमजोर मात्रा मौजूद है किसी भी देश में कभी भी भारी तबाही मचा सकती है।

कितना खतरनाक है पोलियो

ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) आंत में जाकर काम करती है लेकिन पोलियो, मल-दूषित पानीके माध्यम से दूसरों को शिकार बना सकता है। हालांकि जिन बच्चों को वैक्सीन लग चुकी है ये उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाता है लेकिन जहां साफ-सफाई का स्तर कम है और बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर है उन जगहों पर ये ज्यादा घातक सिद्ध हो सकता है।

जंगली पोलियोवायरस के मुकाबले कमजोर होने के बावजूद ये वेरिएंट गंभीर रूप से बीमार बना सकता है और जिन लोगों को इस बीमारी से सुरक्षित रखने वाला टीका नहीं लगा है उनमें पैरालिसिस की संभावना बढ़ा सकता है।

अभी तक कितने मामले

डब्लूएचओ के मुताबिक, दुनियाभर में इस पोलियो के करीब 959 मामले सामने आ चुके हैं। पोलियो को खत्म करने वाले प्रोग्राम की एक्सपर्ट कैथलीन ओ रैली ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि लंदन की नालियों में मिला ये सैंपल पोलियोवायरस के स्थानीय स्तर पर फैलने का संकेत दे रहा है और लोग पोलियो के टीके को लेकर अभी जागरूरक नहीं हैं।

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