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कोरोना के प्रकोप के बाद अब मंकीपॉक्स ने दुनिया को खतरे में डाल दिया है। लेकिन कोरोना के बाद देखा गया है कि कुछ लोग मंकीपॉक्स को भी ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जिस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चिंता व्यक्त की है। दरअसल डब्ल्यूएचओ (World health organization) ने मंगलवार को कहा है कि मंकीपॉक्स अभी भी वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल (Global health emergency) बना हुआ है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर-जनरल टेड्रोस अधानोम घेब्रेसियस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने कहा कि “मैं सार्वजनिक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर रहा हूं, फिलहाल यह उन पुरुषों में ज्यादा है जो पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाते हैं और खासतौर पर जिनके यौन साथी एक से अधिक हैं।”
फरीदाबाद में एकॉर्ड सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के एसोसिएट डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन एंड रूमेटोलॉजी डॉक्टर जयंता ठाकुरिया ने इंडिया टुडे को बताया कि सावधानी ही इसके बचाव की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है। आगे उन्होंने बताया कि जैसा दुनियाभर के अलग-अलग कोनों से लोग भारत में आ रहे हैं, वे वायरस फैला सकते हैं। इसलिए हमें उन लोगों का खास ध्यान रखना है जिन्हें बुखार के साथ-साथ त्वचा पर चकत्ते भी हो रहे हैं। ऐसे मरीजों को स्वस्थ लोगों से अलग रखना बहुत ही ज्यादा जरूरी है।
सीडीसी के अनुसार निम्न तरीकों से मंकीपॉक्स से बचाव किया जा सकता है -
देखा गया है कि मंकीपॉक्स से ग्रसित रोगी जिन्हें गंभीर लक्षण नहीं हो रहे हैं, उनका इलाज सामान्य दवाओं से ही हो जाता है। उदाहरण के लिए अगर मंकीपॉक्स से ग्रसित किसी व्यक्ति को बुखार और त्वचा पर चकत्ते जैसी समस्याएं हैं, तो उसे पेरासिटामोल व स्किन से जुड़ी अन्य बीमारियों के लिए दवाएं देकर इलाज किया जाता है। साथ ही गंभीर स्थिति न होने पर मरीज का घर पर ही इलाज हो जाता है। वहीं अगर स्थिति गंभीर है, तो उसे अस्पताल में भर्ती किया जाता है और मरीज को महसूस हो रहे लक्षणों के अनुसार ही उन्हें दवाएं दी जाती हैं।