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Written By: Pallavi Kumari | Published : July 9, 2022 11:11 AM IST
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानें तो, घाना में इबोला जैसे मारबर्ग वायरस रोग (Ghana reported two suspected cases of Marburg virus) के दो संदिग्ध मामलों का पता चला है। इस वायरस के कारण उन दोनों की मृत्यु हो गई है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि घाना के दक्षिणी अशांति क्षेत्र के दो रोगियों से लिए गए नमूनों का प्रारंभिक विश्लेषण किया गया है जिसमें पता चला ह कि व्यक्ति मारबर्ग वायरस (Marburg virus) से पीड़ित हैं। हालांकि, नमूने पूर्ण पुष्टि के लिए सेनेगल के डकार में पाश्चर संस्थान को भेज दिए गए हैं, जो संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी के साथ काम करता है। डब्ल्यूएचओ ने कहा, कि ये वायरस आगे कैसे फैल सकता है और इससे कैसे निपटा जा सकता है इसकी तैयारी बेहद जरूरी है। इसलिए आगे की जांच चल रही है। हालांकि, घाना में स्वास्थ्य अधिकारियों और विशेषज्ञों को सतर्क कर दिया है। तो, आइए जानते हैं क्या है ये वायरस।
मारबर्ग वायरस रोग एक बहुत ही संक्रामक रक्तस्रावी यानी कि हीमोग्राफिक (hemorrhagic) बीमारी है जो इबोला (ebola virus) के समान परिवार से संबंधित है। यह चमगादड़ों से इंसानों में फैलता है। संक्रामक वायरस संक्रमित लोगों और सतहों के शारीरिक तरल पदार्थ के सीधे संपर्क के माध्यम से लोगों में फैलता है। वायरस की इनक्यूबेशन पीरियड दो से 21 दिनों की है। यह वायरस पहले अंगोला, केन्या, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, दक्षिण अफ्रीका और युगांडा में रिपोर्ट किया गया है।
मारबर्ग वायरस के लक्षणों की बात करें तो अस्पताल में मरने से पहले दो संदिग्ध रोगियों में दस्त, बुखार, मतली और उल्टी सहित कई लक्षण देखे गए थे। इसके अलावामारबर्ग रोग के कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल हैं -
तेज बुखार
भयानक सरदर्द
मांसपेशियों में दर्द के साथ गंभीर रूप से बीमार होना
कुछ अन्य लक्षण जो वायरस के फैलने के तीसरे दिन देखे जा सकते हैं, वे हैं:
-गंभीर पानी जैसा दस्त
-पेट दर्दऔर ऐंठन
-मतली और उल्टी
जिन मामलों में मौतें हुईं, उनमें नाक, मसूड़ों और योनि सहित कई क्षेत्रों से रक्तस्राव जैसे लक्षण होने की भी सूचना मिली।
हालांकि, मारबर्ग रोग की मृत्यु दर 24% से 88% तक दिखाया है और इस घातक वायरस का कोई इलाज नहीं है। डॉक्टरों का दावा है कि मौखिक या अंतःस्रावी तरल पदार्थ के साथ डिहाइड्रेशन के लक्षणों का इलाज करके मरीज को बचाया जा सकता है। इधर, देश के स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि दो सप्ताह पहले नमूने लिए जाने के बाद से घाना में कोई नया संदिग्ध मामला सामने नहीं आया है।