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Written By: Anshumala | Published : September 6, 2018 10:13 AM IST
In the case of top athletes, being this impulsive could lead to their decision to stop right in the middle of a performance or to abandon a race in order to end the pain felt during physical exertion. ©Shutterstock
भारत में 35 फीसदी से ज्यादा लोग शारीरिक श्रम करने में आलस करते हैं। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) का आंकड़ा है। डब्लूएचओ के एक सर्वेक्षण के अनुसार, शारीरिक गतिविधियों में सक्रियता नहीं दिखाने के कारण इन लोगों को दिल की बीमारी के साथ-साथ कैंसर, मधुमेह और मानसिक रोगों का खतरा बना रहता है।
सर्वेक्षण के ये नतीजे 'द लांसेट ग्लोबल हेल्थ' नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं, जिसमें बताया गया है कि 2016 में भारत में शारीरिक श्रम कम करने वाली महिलाएं करीब 50 फीसदी थीं, जबकि पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 25 फीसदी था।
दुनिया भर में तीन में से एक महिला पर्याप्त शारीरिक क्रियाकलाप नहीं करती है, जबकि पुरुषों के मामले में यह आंकड़ा चार में से एक है।
उच्च आय वाले देशों में शारीरिक श्रम कम करने वालों का आंकड़ा 37 फीसदी है, जबकि मध्यम आय वाले देशों में 26 फीसदी। वहीं, निम्न आय वाले देशों में यह आंकड़ा 16 फीसदी है।
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शोधकर्ताओं के अनुसार, अगर यह प्रवृत्ति जारी रही तो कम शारीरिक क्रियाकलाप करने वालों की तादाद 2025 तक घटाकर 10 फीसदी करने का लक्ष्य प्राप्त नहीं हो पाएगा। शोध के प्रमुख लेखक रेगिना गुथोल्ड ने कहा, "दुनिया भर में अन्य प्रमुख स्वास्थ्य के खतरों की तरह शारीरिक क्रियाकलाप कम करने वालों के स्तर में कमी नहीं हो रही है।"
शारीरिक श्रम न करने के नुकसान
- आजकल की जेनरेशन घंटों ऑफिस में सीट पर चिपक कर काम करते रहते हैं। ऑफिस में काम के दबाव के कारण फिजिकल एक्टिविटी पर लोग आज बहुत कम ध्यान देते हैं। ऑफिस में 8-12 घंटा सीट पर बैठे-बैठी बीत जाता है और बाकी का समय घर पर टीवी देखने और सोने में। ऐसा करना आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। आप कम उम्र में ही कई बीमारियों से घिर सकते हैं।
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- जो लोग शारीरिक श्रम की तरफ ध्यान नहीं देते हैं, उनमें असमय मृत्यु होने की आशंका बढ़ जाती है। अगर आप वाकई दिन का इतना लंबा वक्त सिर्फ सीट पर बैठे हुए, कंप्यूटर पर काम करते हुए बिताते हैं तो आप यह बात समझ लीजिए कि आप बहुत ज्यादा समय तक जीवित नहीं रहने वाले हैं। एक अध्ययन के अनुसार, कंप्यूटर के सामने बैठकर लगातार काम करने वाले लोग, जो दिन भर सीट से चिपके रहते हैं, उनकी उम्र अपेक्षाकृत कम होती है यानी वे धीरे-धीरे अपनी मृत्यु की ओर बढ़ते जाते हैं।
- इंटरनेशल जरनल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, कुर्सी पर ज्यादा समय तक जमे रहने से विभिन्न बीमारियों से मरने का खतरा करीब 27 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। वहीं दूसरी ओर, वे लोग जो लगातार बैठकर टीवी देखते रहते हैं, उनमें यह खतरा करीब 19 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।
- फिजिकल एक्टिविटी की कमी होने से उससे भी अधिक नुकसान आपको हो सकता है, जितना की स्मोकिंग करने से होता है। विशेषज्ञों की मानें तो सेडेंटरी लाइफस्टाइल अपने आप में ही विभिन्न बीमारियों की जड़ है। एक ही जगह पर देर तक बैठे रहने की वजह से व्यक्ति का शरीर पूरी तरह निष्क्रिय हो जाता है। न चलना-फिरना, न एक्सरसाइज करना, न योग, ऐसी आदत स्वास्थ्य के लिए घातक साबित हो सकती है।
- मेट्रो शहरों में रहने वाले वे लोग जो सेडेंटरी लाइफस्टाइल अधिक जीते हैं, उनमें अलग-अलग बीमारियों की चपेट में आने का रिस्क अधिक रहता है। कम उम्र में ही लोग खतरनाक बीमारियों से जूझने लगते हैं। इसकी वजह से बच्चों से लेकर बड़ों तक पर असर देखा जा रहा है। कॉलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर में वृद्धि होने के साथ ही बढ़ता है डायबिटीज का खतरा।
(इनपुट: आईएएनएस)