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किस उम्र के लोगों को लेनी होगी बूस्टर डोज, जानें दूसरी डोज लेने के कितने दिन बाद लगेगी बूस्टर डोज

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक विशेषज्ञ पैनल ने एक एडवाइजरी जारी कर सलाह दी है कि, जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर है उन्हें डब्ल्यूएचओ की मंजूरी वाली कोविड -19 वैक्सीन की एक एक्स्ट्रा डोज लगवानी चाहिए।

किस उम्र के लोगों को लेनी होगी बूस्टर डोज, जानें दूसरी डोज लेने के कितने दिन बाद लगेगी बूस्टर डोज
डब्लूएचओ ने बताया किस उम्र के लोगों को लेनी होगी बूस्टर डोज, जानें दूसरी डोज लेने के कितने दिन बाद लगेगी बूस्टर डोज

Written by Jitendra Gupta |Published : October 12, 2021 10:52 AM IST

क्या कुछ लोगों को कोविड वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी एकस्ट्रा डोज की जरूरत पड़ सकती है? ये एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब हर कोई चाहता है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के एक विशेषज्ञ पैनल ने एक एडवाइजरी जारी कर सलाह दी है कि, जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर है उन्हें डब्ल्यूएचओ की मंजूरी वाली कोविड -19 वैक्सीन की एक एक्स्ट्रा डोज लगवानी चाहिए।

किन लोगों को लगेगी बूस्टर डोज

संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी के विशेषज्ञों ने इसके अलावा ये भी कहा है कि जिन लोगों की उम्र 60 साल से अधिक है और दोनों वैक्सीन लगवा चुके हैं, वे लोग चीन की सिनोवैक और सिनोफार्मा वैक्सीन की एक एक्स्ट्रा डोज लगवा सकते हैं।

किन लोगों को ज्यादा खतरा

डब्लूएचओ का कहना है कि एसएजीई ने सिफारिश की है कि वे लोग, जिनकी इम्यूनिटी कमजोर है या फिर धीमी है उन्हें वैक्सीनेशन के प्राइमरी फेज के अंतर्गत कोविड वैक्सीन की अतिरिक्त डोज लेनी चाहिए। इसमें ये भी कहा गया है दरअसल इन लोगों को प्राइमरी फेज के वैक्सीनेशन के बाद भी कोरोना का खतरा ज्यादा है इसलिए इन्हें ऐसा करने को कहा जा रहा है।

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कब लेनी होगी बूस्टर डोज

डब्ल्यूएचओ वैक्सीन चीफ केट ओ'ब्रायन का कहना है कि एक्स्ट्रा डोज को कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए सामान्य कोविड -19 वैक्सीनेशन अभियान के हिस्से के रूप में लिया जाना चाहिए। एक्सट्रा डोज एक से तीन महीने की अवधि में लग जानी चाहिए। यह उनके शरीर में सुरक्षा के स्तर को बढ़ाने से लेकर क्लीनिकल ​​​​परीक्षणों में गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती और मृत्यु को रोकने में प्रभावी साबित हो सकती है।

कब से शुरू हो सकती है बूस्टर डोज देने की प्रक्रिया

हालांकि, स्ट्रेटजिग एडवाइजरी ग्रुप ऑफ एक्सपर्ट ऑन इम्यूनाइजेशन (एसएजीई) ने जोर देकर कहा कि संस्थान बड़े पैमाने पर आबादी के लिए एक्स्ट्रा बूस्टर डोज की सिफारिश नहीं कर रहा, जिसे पहले से ही कुछ देशों में शुरू किया जा रहा है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, जिन देशों में वैक्सीन की कमीहै उन देशों में पहली डोज की किल्लत को दूर करने के बाद ही इस साल के अंत तक सामान्य आबादी के लिए बूस्टर डोज को देने की सलाह दी गई है।

भारत की ये वैक्सीन भी कतार में

बता दें कि अब तक, कई कोविड -19 टीकों को महामारी के दौरान आपातकालीन उपयोग के लिए डब्ल्यूएचओ ने मंजूरी प्रदान की हुई है, जिसमें फाइजर-बायोएनटेक, जेनसेन, मॉडर्ना, सिनोफार्म, सिनोवैक और एस्ट्राजेनेका शामिल है।

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SAGE का कहना है कि वह 11 नवंबर को सामान्य बूस्टर डोज के मुद्दे की समीक्षा करेगा। इस बीच, WHO भारत की भारत बायोटेक वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग सूची (EUL) में जगह देने पर फैसला कर सकता है।

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