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3 दिनों में दोगुना हो जाते हैं ओमिक्रोन के मामले! डब्लूएचओ ने बताया कैसे डेल्टा से कितना अलग है ओमिक्रोन

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में एक बयान जारी कर इस वेरिएंट के घातक होने की जानकारी साझा की है। आइए जानते हैं आखिर क्यों इतना घातक सिद्ध हो सकता है वेरिएंट।

3 दिनों में दोगुना हो जाते हैं ओमिक्रोन के मामले! डब्लूएचओ ने बताया कैसे डेल्टा से कितना अलग है ओमिक्रोन
3 दिनों में दोगुना हो जाते हैं ओमिक्रोन के मामले! डब्लूएचओ ने बताया कैसे डेल्टा से कितना अलग है ओमिक्रोन

Written by Jitendra Gupta |Updated : December 19, 2021 11:27 AM IST

दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे कोरोनावायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के मामलों को लेकर डब्लूएचओ की परेशानियां बढ़ने लगी हैं। डब्लूएचओ का मानना है कि ये वेरिएंट बड़ी ही आसानी से वैक्सीन से बनने वाली इम्यूनिटी को चकमा दे सकता है, जो वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों के लिए भी घातक सिद्ध हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में एक बयान जारी कर इस वेरिएंट के घातक होने की जानकारी साझा की है। आइए जानते हैं आखिर क्यों इतना घातक सिद्ध हो सकता है वेरिएंट।

तीन दिनों में दोगुने हो जाते हैं मामले

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना का ये नया वेरिएंट ओमिक्रोन विश्व के 89 देशों में पहुंच चुका है और इसके मामले महज तीन दिनों में ही दोगुने हो रहे हैं, जिसके कारण इसकी प्रभाविकता बहुत ज्यादा है और ये ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना सकता है।

क्यों इतना घातक है ओमिक्रोन

विशेषज्ञों का मानना है कि ओमिक्रोन एक हाइपर म्यूटेंट वेरिएंट है, जिसमें पहले के वेरिएंट की तुलना में काफी बदलाव आए हैं और इसके स्पाइक प्रोटीन में कम से 26 से 32 बदलाव दर्ज किए गए हैं। यही कारण है कि ये वेरिएंट शरीर के इम्यून सिस्टम को चकमा देने में प्रभावी है और इसकी संक्रमण दर भी बहुत अधिक है।

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89 देशों में पहुंचा ओमिक्रोन

डब्ल्यूएचओ ने कहा कि 16 दिसंबर तक यह विषाणु विश्च के 89 देशों तक पहुंच चुका था और इस बात की आशंका है कि जल्दी ही यह कोरोना के डेल्टा वेरिएंट से भी अधिक फैल सकता है।

क्या कहते हैं वैज्ञानिक

वैज्ञानिकों का दावा है कि ओमिक्रोन वेरिएंट डेल्टा की तुलना में काफी तेजी से फैल रहा है और इसके मामले दोगुने होने में तीन दिनों का समय लग रहा है। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि इसके तेजी से फैलने की गति शरीर के इम्यून सिस्टमको चकमा देने या फिर इसके म्यूटेशन में आए बदलाव किस वजह से है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, जहां तक इसकी गंभीरता का सवाल है तो अभी तक इस मामले में आंकड़े सीमित ही हैं और अभी इस दिशा में शोध किया जाना बाकी है। लेकिन जिस प्रकार से ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका में अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है उसे देखते हुए लगता है कि अधिकतर देशों में स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा सकती हैं।

वैक्सीन कितनी प्रभावी

डब्ल्यूएचओ का कहना है कि इस वेरिएंट पर वैक्सीन कितनी प्रभावी है अभी तक इस पर कोई ठोस डाटा उपलब्ध नहीं है। लेकिन दक्षिण अफ्रीका, अमेरिका, ब्रिटेन और चीन में शुरूआती नतीजों के अनुसार इस पर फाइजर, मॉडर्ना, जॉनसन एंड जॉनसन, एस्ट्राजेनेका और सिनोवेक वैक्सीन के दोनों डोज का कोई असर नहीं देखा गया है लेकिन बूस्टर डोज काफी प्रभावी देखी गई है।

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(सोर्स-आईएएनएस)

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