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Written By: Anshumala | Updated : August 10, 2020 9:31 AM IST
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कोरोनावायरस के कहर से आज सारी दुनिया जूझ रही है। सारी उम्मीदें सिर्फ कोविड-19 वैक्सीन (Covid-19 vaccine) पर ही टिकी हुई हैं। खबरों के अनुसार, ऐसा लग रहा है जैसे एक-दो महीने के अंदर कोरोना वैक्सीन लॉन्च कर दी जाएगी। जो भी देश वैक्सीन के निर्माण में जुटे हुए हैं और जो क्लिनिकल ट्रायल में सफल रहे हैं, उनका दावा है कि अगले साल जनवरी से लेकर मार्च के बीच कोरोना की वैक्सीन दुनिया को मिल जाएगी। उधर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वैक्सीन कोई जादुई गोली नहीं, जिसके आते ही कोरोनावायरस का दुनिया से सफाया हो जाएगा।
डब्लूएचओ (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस एडहोम घेब्रेसस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) का कहना है कि कोरोना को मात देने के लिए अभी हम सभी को एक लंबा रास्ता तय करना है। इसके लिए हर किसी को साथ मिलकर प्रयास करना होगा।
वहीं, अमेरिका के एक संक्रामक रोग विशेषज्ञ के वरिष्ठ सलाहकार का कहना है कि वैक्सीन बनाने क हर प्रयास बिल्कुल एक अंध परीक्षण (Blind test) की तरह होता है। इसके शुरुआती परिणाम बेशक अच्छे होते हैं, लेकिन अंतिम चरण यानी ह्यूमन ट्रायल के दौरान वैक्सीन कितनी सफल साबित हो सकती है, यह कहना बहुत मुश्किल है। हालांकि, उम्मीद यही है कि दुनिया को जल्द से जल्द 6 से 12 महीनों के अंदर एक सफल और कारगर कोरोना की वैक्सीन मिल जाए, ताकि इस घातक वायरस से लोगों को संक्रमित होने से बचाया जा सके।
अमेरिका के मिलकेन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ (milken institute school of public health) में वैक्सीनोलॉजिस्ट जॉन एंड्रस ने चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि कोरोनावायरस का प्रभावी और असरदार वैक्सीन बनाना इतना आसान काम नहीं है। इसमें समय लग सकता है, लेकिन आज सभी वैक्सीन बनाने और इसे लॉन्च करने की रेस में जुटे हुए हैं। यह जल्दबाजी दिखाना ठीक नहीं है। वैक्सीन के निर्माण की रेस में लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि हमें इस समय क्या करना चाहिए। यह खतरनाक हो सकता है।
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