
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : August 22, 2020 10:26 AM IST
WHO चीफ की बड़ी चेतावनी, कोरोना के बाद अन्य महामारियों के लिए भी तैयार रहें विश्व
एक ओर जहां कोरोना का कहर लगातार बढ़ रहा है वहीं अभी वैक्सीन के नाम पर लोगों को संतुष्टि नहीं मिल रही है। अभी तक हर किसी के मन में यही सवाल आता होगा कि कब कोरोना की वैक्सीन आएगी और आखिर कब तक लोगों को घर में कैद होकर रहना पड़ेगा। लोगों के इस सवाल का जवाब डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेबियस ने उम्मीद जगा दी है। WHO चीफ ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों को कहा कि हम उम्मीद कर सकते हैं कि 2 साल में कोरोना महामारी धरती से पूरी तरह से चली जाएगी। हालांकि यह तभी संभव होगा जब पूरा विश्व साथ में मिलकर कोरोना वैक्सीन के निर्माण में काम करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोनावायरस महामारी 1918 के स्पेनिश फ्लू की तुलना में कम समय तक रहेगी।
इस मौके पर डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेबियस ने यह भी कहा कि स्पेनिश फ्लू के दौरान दुनिया उतनी विकसित और एडवांस नहीं थी, जितनी की आज है। साथ ही उस समय की तुलना में हम टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी आगे बढ़े हैं और यह हमारे पास संसाधन हैं, जो महामारी से निपटने में मदद करेंगे। हालांकि साथ में उन्होंने यह भी कहा कि आज सभी देश आगे बढ़ रहे हैं जिसका एक खामियाजा कोरोना वायरस के तेजी से विस्तार में भी देखा जा रहा है। हालांकि उपलब्ध तकनीक का यदि सही दिशा में काम किया जाए तो दुनिया इस महामारी से जल्दी निपट सकती है।
इससे पहले, डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेबियस ने कोरोना वैक्सीन पर जोर देते हुए कहा था कि इस महामारी से निपटने के लिए पूरे विश्व के एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कोरोना वैक्सीन पर नेशनलिज्म करने के बजाय पूरे विश्व को साथ मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने 194 सदस्य देशों से मल्टीलेटरल कोवैक्स ग्लोबल वैक्सीन फैसिलिटी से जुड़ने के लिए कहा। इसके लिए उन्होंने 31 अगस्त की डेडलाइन भी तय की। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि कई देश कोरोनावायरस वैक्सीन को लेकर स्वार्थ देख रहे हैं। उनका कहने का मतलब है कि कुछ देश जल्दी से जल्दी सिर्फ इसलिए वैक्सीन बनाना चाहते हैं ताकि विश्व स्तर पर उनकी वाहवाही हो। जबकि सभी वैज्ञानिकों को मिलकर ऐसी कोरोना वैक्सीन बनानी चाहिए जिसके लाभ ज्यादा हो और साइड इफेक्ट कम से कम हो।