H3N2 वायरस के अटैक से पूरा देश परेशान, 90 लोगों में एक जैसे लक्षण, जानिए कितना खतरनाक है ये फ्लू

Influenza A Subtype H3N2:  भारत में मौसमी बीमारियों का कहर जारी है। इस बीच Influenza A Subtype H3N2 वायरस के मामले देखे जा रहे हैं, तो काफी चिंता का विषय है। आइए जानते हैं इस वायरस के बारे में विस्तार से-

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Written By: Kishori Mishra | Published : March 6, 2023 10:08 AM IST

Influenza A Subtype H3N2: भारत में कोरोना और एडिनोवायरस के बीच इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियां फैल रही हैं। यह पुरानी मौसमी फ्लू नहीं, बल्कि इंफ्लूएंजा सब-टाइप A H3N2 वायरस हैं। इस वायरस के मामलों को देखते हुए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ICMR ने चेतावनी जारी की है। ICMR ने कहा है कि देश के अधिकांश हिस्सों में 1 सप्ताह से अधिक चलने वाली बुखार और खांसी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इन मामलों को इन्फ्लूएंजा ए एच3एच2 से जोड़ा गया है। यह वायरस एक तरह के सब-वेरिएंट और फ्लू के कारण बनता है।

क्यों है चिंता का विषय? - Is influenza type A serious

इन्फ्लूएंजाए एच3एन2 के साथ अस्पताल में भर्ती SARI रोगियों में से लगभग 92% को बुखार, 86% मरीजों को खांसी, 27% ने सांस फूलना और 16% मरीजों ने घरघराहट होने की शिकायत की है।

ICMR के मुताबिक,  पिछले कुछ दिनों से फ्लू या फिर सांस से जुड़ी परेशानी के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों में अधिकतर मरीज इन्फ्लुएंजा A H3N2 वायरस की चपेट में हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इन्फ्लुएंजा A H3N2 से ग्रसित गंभीर रोगियों में लगभग 10% मरीजों को ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है और 7% मरीजों को ICU में देखभाल की आवश्यकता है।

आम फ्लू से कैसे है अलग?

इन्फ्लूएंजा वायरस को 4 हिस्सों में  ए, बी, सी और डी में बांटा गया है। इन्फ्लूएंजा वायरस ए और बी फ्लू की मौसमी महामारी की वजह से मरीजों को होता है, इसमें अधिकतर मरीजों को सांस लेने में परेशानी होती है। यह समस्या लगभग हर साल मरीजों को होता है। कुछ इन्फ्लुएंजा ए सब-वैरिएंट जैसे- H1N1 ( स्वाइन फ्लू वायरस) और H3N2 अधिक गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

H3N2 इन्फ्लूएंजा क्या है? - What's H3N2 influenza

H3N2 इन्फ्लूएंजा वायरस इंसानों में सन् 1968 में फैलना शुरू हुआ था। तब से अब तक यह काफी हद तक विकसित हुआ है। आमतौर पर H3N2 वायरस मौसमी फ्लू से अधिक गंभीर होते हैं। मुख्य रूप से यह बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए अधिक खतरनाक है।

नेचर में प्रकाशित एक सर्वे के मुताबिक, H3N2 वायरस संक्रमण मध्यम आयु वर्ग के लोगों में नॉन- नेय्टूलाइजिंग (non-neutralising) करने वाले H3N2 एंटीबॉडी का उत्पादन करता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि इस संक्रमण का खतरा 50 से अधिक और 15 वर्ष से कम उम्र के लोगों को अधिक है। इसका प्रमुख कारण वायु प्रदूषण माना जा रहा है।

कर्नाटक में H3N2 वायरस को लेकर आज होगी मीटिंग

इन्फ्लूएंजा वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने सोमवार यानी आज एक बैठक बुलाई है। इस बैठक में h3n2 वायरस फैलने से बचाव के लिए उठाए गए कदमों पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक में स्वास्थ्य विभाग के कई कर्मचारी और विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे।

इंफ्लूएंजा सब-वेरिएंट एच3एच2 से बचाव के लिए क्या करें और क्या न करें?

भारत में फ्लू के मामलों में काफी वृद्धि हो रही है। इस बीच आईएमए ने एंटीबायोटिक दवाओं का बिना डॉक्टर सलाह के सेवन न करने की चेतावनी जारी की है।

इसमें कहा गया है कि कई लोग मौसमी इन्फ्लूएंजा के कारण होने वाले बुखार और खांसी को कम करने के लिए खुद से एंटीबायोटिक्स ले रहे हैं, इससे मरीजों का स्वास्थ्य अधिक बिगड़ रहा है। इसलिए बिना किसी डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन न करें।

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