
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : December 4, 2023 10:42 AM IST
White lung syndrome : व्हाइट लंग सिंड्रोम नामक बैक्टीरियल के निमोनिया स्ट्रेन पूरी दुनिया में एक चिंता का विषय बना हुआ है। दुनिया भर के कई देशों को इस निमोनिया स्ट्रेन ने अपनी चपेट में ले लिया है। बता दें कि यह एक श्वसन संबंधी समस्या है, जो मुख्य रूप से 3 से 8 वर्ष की उम्र के बच्चों को प्रभावित करती है। हालांकि, फिलहाल इस निमोनिया के फैलने के सही कारणों की जांच की जा रही है। हेल्थ एक्सपर्ट द्वारा आशंका जताई जा रही है कि यह माइकोप्लाज्मा निमोनिया के एक नए स्वरूप से जुड़ा हो सकता है, जो श्वसन संक्रमण के लिए जिम्मेदार एक आम बैक्टीरिया है।
व्हाइट लंग सिंड्रोम की स्थिति में बच्चों की छाती में एक विशिष्ट तरह का सफेद पैच हो जाता है। यह स्थिति एक्स रे के बाद ही पता चलती है। इस स्थिति से जूझ रहे बच्चों को कई तरह की श्वसन संबंधी परेशानियां हो सकती हैं, जिसमेंएक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS), पल्मोनरी एल्वोलर माइक्रोलिथियासिस (पीएएम) और सिलिका-संबंधित स्थितियां शामिल हैं।
एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (ARDS) : यह फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर स्थिति है, यह परेशानी तब होती है जब फेफड़ों के एयर बैग में तरल पदार्थ जमा हो जाता है। इस स्थिति में बच्चों का सांस लेना मुश्किल हो सकता है। एआरडीएस विभिन्न कारकों के कारण हो सकता है, जिनमें निमोनिया, सेप्सिस शामिल है।
पल्मोनरी एल्वोलर माइक्रोलिथियासिस (पीएएम) फेफड़ों से जुड़ी एक दुर्लभ बीमारी है, जो फेफड़ों के एयर बैग में कैल्शियम जमा होने के कारण होती है। इस स्थिति से जूझ रहे मरीजों को सांस लेने में काफी ज्यादा कठिनाई होती है। साथ ही खांसी और सीने में दर्द हो सकता है।
सिलिकोसिस भी फेफड़ों से जुड़ी एक बीमारी है जो सिलिका युक्त धूल में सांस लेने से होती है। सिलिका युक्त धूल रेत, पत्थर और अन्य सामग्रियों में पाई जाती है। सिलिकोसिस से ग्रसित मरीजों को सांस लेने में तकलीफ, खांसी और सीने में दर्द हो सकता है।
व्हाइट लंग सिंड्रोम के लक्षण इसके कारणों पर आधारित होते हैं, लेकिन कई लक्षण सामान्य लक्षणों की तरह होते हैं, जैसे-
व्हाइट लंग सिंड्रोम इन दिनों काफी चिंता का विषय बनी हुई है। इसलिए इस भयावह समस्या से अपने बच्चों को सुरक्षित रखें। साथ ही वे सभी दिशा-निर्देशों को अच्छे से फॉलो करें, जो इससे बचाव कर सके।
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