क्‍या है क्लिनिकल डिप्रेशन, जिसमें मजनू दिन भर करता था लैला से बात

प्रेम में असफलता या अपने किसी करीबी की मृत्यु् के कारण लोग इस अवसाद से ग्रस्त हो सकते हैं, इनमें युवाओं का प्रतिशत सबसे ज्यादा है।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : November 22, 2018 8:32 PM IST

अभी हाल ही में रिलीज हुई फि‍ल्‍म लैला-मजनू एक रोमांटिक स्‍टोरी के साथ ही मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍या क्लिनिकल डिप्रेशन यानी नैदानिक अवसाद की ओर भी इशारा करती है। फि‍ल्‍म में अपनी नायिका का इंतजार करते हुए नायक उस स्थिति तक पहुंच जाता है कि उसे हर ओर केवल अपनी नायिका ही नजर आती है, वह उससे दिन-रात बात करता है और तमाम दुनिया से बेपरवाह हो जाता है। लगभग अर्धबेहोशी की स्थिति में वह लोगों के शक का केंद्र बन जाता है। आइए जानते हैं कि आखिर क्‍या है Major depressive disorder या क्लिनिकल डिप्रेशन और क्‍या हैं इसके लक्षण।

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क्‍या है क्लिनिकल डिप्रेशन

अवसाद एक गंभीर समस्‍या है। पर क्लिनिकल डिप्रेशन अवसाद की सर्वाधिक गंभीर स्थिति है। इसे Major depressive disorder भी कहा जाता है। इससे ग्रस्‍त व्‍यक्ति को गहन देखभाल की जरूरत होती है। वरना वह अवसाद के उस गंभीर स्‍तर तक पहुंच जाता है कि अपनी जान लेने जैसा घातक कदम भी उठा सकता है।

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हो सकता है ये भ्रम

अभी हाल ही में रिलीज हुई फि‍ल्‍म लैला मजनू में नायक कैस बट्ट की हालत देखकर अधिकांश लोगों को लगता है कि उसने किसी तरह का नशा कर रखा है। तभी वह अपने पैरों पर ठीक से चल नहीं पा रहा और न ही बात कर पा रहा है। बार-बार बेहोश होने की स्थिति से भी ऐसा ही लगता है कि वह नशे में है। जबकि यह क्लिनिकल डिप्रेशन की स्थिति है। इसमें व्‍यक्ति का आत्‍मविश्‍वास और खुद के प्रति स्‍नेह इतने निम्‍न स्‍तर पर आ जाता है कि वह कुछ भी कर पाने में सक्षम नहीं रह जाता है।

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तीन सप्‍ताह से अधिक उदासी है गंभीर

अवसाद यानी डिप्रेशन का पहला संकेत उदासी है। अगर यही उदासी लगातार तीन सप्‍ताह से अधिक समय तक रहती है तो यह जोखिम भरी हो सकती है। इसमें उदासी कई बार लगातार होती है, तो कभी-कभी इसके अस्‍थायी एपिसोड भी देखे जाते हैं। जब व्‍यक्ति कभी तो बहुत अच्‍छे से बिहेव करता है और कभी गहन उदासी में चला जाता है।

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ये भी हो सकते हैं लक्षण

उदासी, आंसूपन, खालीपन या निराशा की भावनाएं,  छोटे मामलों पर भी गुस्से में विस्फोट, चिड़चिड़ापन या निराशा,  सेक्स, शौक या खेल जैसे अधिकांश या सभी सामान्य गतिविधियों में अरुचि, नींद में परेशानी, अनिद्रा या बहुत ज्यादा सोना, थकान और ऊर्जा की कमी, इसलिए छोटे कार्य भी अतिरिक्त प्रयास की जरूरत,  चिंता, बेचैनी, धीमी सोच, बोलने या शरीर की गतिविधियों में अक्षमता, अपराध की भावनाएं, पिछली विफलताओं या आत्म-दोष पर ही फिक्स हो जाना, सोचने, ध्यान केंद्रित करने, निर्णय लेने और चीजों को याद करने में परेशानी आदि।

रहना होगा बहुत सतर्क

यदि आपके किसी करीबी में ऐसे लक्षण नजर आते हैं, तो उसे गहन देखभाल और स्‍नेह की आवश्‍कयता है। जरा सी भी लापरवाही उसके लिए नुकसानदायक हो सकती है। यह किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है और इसमें व्‍यक्ति मौत, आत्मघाती विचार, आत्महत्या के प्रयासों या आत्महत्या के बार-बार या आवर्ती विचार से भी नहीं चूकता।

हो सकता है उपचार

अमेरिकन साइकोट्रिक एसोसिएशन द्वारा प्रकाशित मानसिक विकारों के डायग्नोस्टिक और सांख्यिकीय मैनुअल (डीएसएम -5) में प्रमुख अवसादग्रस्तता विकारों के लक्षण गिनवाते हुए उनके उपचार की भी संभावना जताई गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बच्चों सहित किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है। इसके लक्षण मानसिक और शारीरिक दोनों हो सकते हैं। बदन दर्द और सिर दर्द बहुत आम संकेत हैं। पर इनका इलाज हो सकता है। आमतौर पर मनोवैज्ञानिक परामर्श, एंटीड्रिप्रेसेंट दवाओं या दोनों के संयोजन से ग्रसित व्‍यक्ति सामान्‍य जिंदगी की ओर वापस लौट सकता है।

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