ब्रेनवॉशिंग क्या है ? कैसे होता है लोगों के दिमाग पर असर

क्या आप यह जानते हैं कि ब्रेनवॉश का मतलब क्या होता है ? किसी इंसान का ब्रेनवॉश कैसे किया जाता है ? किसी इंसान के दिमाग में ऐसा क्या किया जाता है कि वह अपनी सोच को भूलकर वही करता है जो उसे बताया जाता है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Updated : February 17, 2019 1:52 PM IST

ब्रेनवॉश के बारे में आप तब ज्यादा सुनते हैं जब कोई आतंकवादी घटना होती है। खबरों में आप यह भी सुनते हैं कि आतंकी संगठन युवाओं का ब्रेनवॉश करके उन्हें आतंकी बनाने का काम करते हैं। इस बारे में कई बार खुफिया एजेंसियों ने भी माना है कि युवाओं को सोशल मीडिया, विडियोज और किताबों के माध्यम से ब्रेनवॉश करके आंतकी बनाया जाता है।

लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि ब्रेनवॉश का मतलब क्या होता है ? किसी इंसान का ब्रेनवॉश कैसे किया जाता है ? किसी इंसान के दिमाग में ऐसा क्या किया जाता है कि वह अपनी सोच को भूलकर वही करता है जो उसे बताया जाता है।

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एकसपर्ट्स की मानें तो यह एक तरह सामाजिक प्रभाव है जो इंसान पर प्रत्येक पल पड़ता है। साइकोलॉजी में ब्रेनवॉशिंक को एक ऐसा प्रभाव माना जाता है जिसमें इंसान की सहमति या सहमति के बीना भी प्रभाव डाला जा सकता है।

ब्रेनवॉशिंग में किसी खास उद्देश्य से किसी विचार, भाव, बर्ताव को बदलने की या प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। जैसा कि हम सभी जानते हैं की समाज या परिवार में एक साथ रहने वाले लोगों पर एक-दूसरे का स्पष्ट या अस्पष्ट तौर पर सामाजिक प्रभाव पड़ता ही है।

ब्रेनवॉशिंग के स्टेप्स

सोशल साइकोलॉजी के सिद्धांतों के मुताबिक ब्रेनवॉशिंग सामाजिक प्रभाव (Social Influence) के कुछ कॉमन तरीकों का मिला-जुला रूप है।

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जैसे सामाजिक प्रभाव का एक तरीका है, Compliance, जिसमें किसी के व्यवहार को बदलने के लिए उसके अपने विचारों या विश्वास पर की कोई चिंता नहीं की जाती।इसमें "बस ये काम कर दो" का तरीका अपनाया जाता है।

वहीं Persuasion में किसी के दृष्टिकोण और विश्वास प्रणाली को बदलने की कोशिश की जाती है. जैसे, "ये काम करो क्योंकि इससे तुम्हारा फायदा होगा।"

What-is-brainwashing-facts ब्रेनवॉशिंग के स्टेप्स। ©pixabay

फिर आता है, शिक्षित करने का तरीका, जिसे प्रोपेगेंडा भी कहते हैं। इसमें किसी के विश्वास को पूरी तरह से बदलने की कोशिश की जाती है, यहां तक कि तब भी जब जो कुछ भी सिखाया जा रहा है, उस पर टारगेट विश्वास नहीं करता. जैसे, "ये काम करो क्योंकि तुम जानते हो कि यही सही है।"

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इसी तरीके को जब अगले लेवल पर लेकर जाया जाता है, इसे ही कभी-कभी ब्रेनवॉशिंग कहते हैं। इसमें सामाजिक प्रभाव के ऊपर बताए गए सभी तरीके शामिल होते हैं. ब्रेनवाशिंग में किसी की सोच यहां तक कि व्यवहार दोनों को ही बदलने की दिशा में काम किया जाता है. वो शख्स खुद उस सोच या काम पर यकीन करने की कोशिश करने लगता है।

क्या ब्रेनवॉशिंग संभव है ?

एक्सपर्ट्स के अनुसार सोशल इंफ्लूएंस की ये टेक्निक एक खास तरीका है जो कई तरह के आयामों को उपयोग करता है। यह लोगों के दिमाग पर असर डालने के साथ सोचने की प्रक्रिया में बदलाव लाती है।

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ब्रेनवॉशिंग कई बार तो इंसान को सचेत रहते हुए करता है तो कई बार उसे पता भी नहीं चलता की उसका ब्रेनवॉश किया जा रहा है। धीरे-धीरे उस इंसान को भरोसा होने लगता है कि वो काम या सोचने का तरीका बेहतर है और फायदे का है।

आतंकवाद और ब्रेनवॉशिंग का मनोविज्ञान

हाल ही में खबर आई और कई बार ये बात सामने आई है कि आतंकी संगठन ISIS में भर्ती के लिए उस यूनिट के लोग सोशल साइट्स पर लोगों से दोस्ती करके ये देखते थे कि कौन-कौन से लोगों में दहशतगर्दों को लेकर सहानुभूति है। इसके बाद उनसे नजदीकी बढ़ाई जाती और फिर उन्हें आतंकियों के प्रति सहानुभूति पैदा करने वाले वीडियो और ऑडियो भेजे जाते।

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