... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: akhilesh dwivedi | Updated : February 17, 2019 1:52 PM IST
एक्सपर्ट्स के अनुसार सोशल इंफ्लूएंस की ये टेक्निक एक खास तरीका है जो कई तरह के आयामों को उपयोग करता है। यह लोगों के दिमाग पर असर डालने के साथ सोचने की प्रक्रिया में बदलाव लाती है। ©pixabay
ब्रेनवॉश के बारे में आप तब ज्यादा सुनते हैं जब कोई आतंकवादी घटना होती है। खबरों में आप यह भी सुनते हैं कि आतंकी संगठन युवाओं का ब्रेनवॉश करके उन्हें आतंकी बनाने का काम करते हैं। इस बारे में कई बार खुफिया एजेंसियों ने भी माना है कि युवाओं को सोशल मीडिया, विडियोज और किताबों के माध्यम से ब्रेनवॉश करके आंतकी बनाया जाता है।
लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि ब्रेनवॉश का मतलब क्या होता है ? किसी इंसान का ब्रेनवॉश कैसे किया जाता है ? किसी इंसान के दिमाग में ऐसा क्या किया जाता है कि वह अपनी सोच को भूलकर वही करता है जो उसे बताया जाता है।
ब्रेन फॉगः दिमाग की ये खतरनाक बीमारी, कहीं आप भी तो नहीं हो रहे इसका शिकार ?
एकसपर्ट्स की मानें तो यह एक तरह सामाजिक प्रभाव है जो इंसान पर प्रत्येक पल पड़ता है। साइकोलॉजी में ब्रेनवॉशिंक को एक ऐसा प्रभाव माना जाता है जिसमें इंसान की सहमति या सहमति के बीना भी प्रभाव डाला जा सकता है।
ब्रेनवॉशिंग में किसी खास उद्देश्य से किसी विचार, भाव, बर्ताव को बदलने की या प्रभावित करने की कोशिश की जाती है। जैसा कि हम सभी जानते हैं की समाज या परिवार में एक साथ रहने वाले लोगों पर एक-दूसरे का स्पष्ट या अस्पष्ट तौर पर सामाजिक प्रभाव पड़ता ही है।
ब्रेनवॉशिंग के स्टेप्स
सोशल साइकोलॉजी के सिद्धांतों के मुताबिक ब्रेनवॉशिंग सामाजिक प्रभाव (Social Influence) के कुछ कॉमन तरीकों का मिला-जुला रूप है।
8 वो तरीके जो दिमाग व याददाश्त को रखते हैं मजबूत।
जैसे सामाजिक प्रभाव का एक तरीका है, Compliance, जिसमें किसी के व्यवहार को बदलने के लिए उसके अपने विचारों या विश्वास पर की कोई चिंता नहीं की जाती।इसमें "बस ये काम कर दो" का तरीका अपनाया जाता है।
वहीं Persuasion में किसी के दृष्टिकोण और विश्वास प्रणाली को बदलने की कोशिश की जाती है. जैसे, "ये काम करो क्योंकि इससे तुम्हारा फायदा होगा।"
ब्रेनवॉशिंग के स्टेप्स। ©pixabay
फिर आता है, शिक्षित करने का तरीका, जिसे प्रोपेगेंडा भी कहते हैं। इसमें किसी के विश्वास को पूरी तरह से बदलने की कोशिश की जाती है, यहां तक कि तब भी जब जो कुछ भी सिखाया जा रहा है, उस पर टारगेट विश्वास नहीं करता. जैसे, "ये काम करो क्योंकि तुम जानते हो कि यही सही है।"
5 बातें, जो बताती हैं आप दिलो-दिमाग से हैं कमजोर।
इसी तरीके को जब अगले लेवल पर लेकर जाया जाता है, इसे ही कभी-कभी ब्रेनवॉशिंग कहते हैं। इसमें सामाजिक प्रभाव के ऊपर बताए गए सभी तरीके शामिल होते हैं. ब्रेनवाशिंग में किसी की सोच यहां तक कि व्यवहार दोनों को ही बदलने की दिशा में काम किया जाता है. वो शख्स खुद उस सोच या काम पर यकीन करने की कोशिश करने लगता है।
क्या ब्रेनवॉशिंग संभव है ?
एक्सपर्ट्स के अनुसार सोशल इंफ्लूएंस की ये टेक्निक एक खास तरीका है जो कई तरह के आयामों को उपयोग करता है। यह लोगों के दिमाग पर असर डालने के साथ सोचने की प्रक्रिया में बदलाव लाती है।
4 संकेत जो बताते हैं कि दिमाग समय से पहले कमजोर हो रहा है।
ब्रेनवॉशिंग कई बार तो इंसान को सचेत रहते हुए करता है तो कई बार उसे पता भी नहीं चलता की उसका ब्रेनवॉश किया जा रहा है। धीरे-धीरे उस इंसान को भरोसा होने लगता है कि वो काम या सोचने का तरीका बेहतर है और फायदे का है।
आतंकवाद और ब्रेनवॉशिंग का मनोविज्ञान
हाल ही में खबर आई और कई बार ये बात सामने आई है कि आतंकी संगठन ISIS में भर्ती के लिए उस यूनिट के लोग सोशल साइट्स पर लोगों से दोस्ती करके ये देखते थे कि कौन-कौन से लोगों में दहशतगर्दों को लेकर सहानुभूति है। इसके बाद उनसे नजदीकी बढ़ाई जाती और फिर उन्हें आतंकियों के प्रति सहानुभूति पैदा करने वाले वीडियो और ऑडियो भेजे जाते।