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दिल्ली-एनसीआर में बढ़े ब्लैक अस्थमा के मामले, डॉक्टर से जानिए कितनी गम्भीर है ये बीमारी

Black Asthma ke karan: दिल्ली-एनसीआर में ब्लैक अस्थमा के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। आइए जानते हैं क्या है यह बीमारी और क्यों बढ़ रही है इतनी तेजी से।

दिल्ली-एनसीआर में बढ़े ब्लैक अस्थमा के मामले, डॉक्टर से जानिए कितनी गम्भीर है ये बीमारी

Written by Sadhna Tiwari |Updated : December 2, 2024 6:46 PM IST

Black Asthma In Delhi-NCR: वायु प्रदूषण के साथ-साथ ठंड की मौसम की मार झेल रहे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में ब्लैक अस्थमा के मामलों (Black Asthma cases in Delhi) में बढ़ोतरी देखी जा रही है। बता दें कि, ठंड के मौसम में होनेवाली सांस से जुड़ी बीमारियों में ब्लैक अस्थमा या काला दमा (Kale dame kei bimari) भी एक बीमारी है। इसे डॉक्टरी भाषा में  क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज या सीओपीडी (COPD) कहा जाता है। प्रदूषण और खराब एयर क्वालिटी की वजह से काले दमा के मरीजों की समस्याएं बढ़ जाती हैं और उन्हें कई तरह की कॉम्प्लिकेशन्स से भी गुजरना पड़ता है।दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से में वायु प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है और इसी वजह से रेस्परेटरी सिस्टम से जुड़ी बीमारियां भी बढ़ रही हैं।  इस बीच सीओपीडी (COPD) या ब्लैक अस्थमा के मामलों में काफी इजाफा देखा गया है। अगर ब्लैक अस्थमा बहुत गम्भीर हो जाए तो यह बीमारी जानलेवा भी बन सकती है।

श्री गंगाराम हॉस्पिटल दिल्ली में चेस्ट मेडिसिन डिपार्टमेंट में सीनियर कंसल्टेंट डॉ उज्जवल पारेख (Dr. Ujjwal Parakh, Senior Consultant, Chest Medicine) बता रहे हैं कि ब्लैक अस्थमा या काला दमा कितनी गम्भीर बीमारी है और इसके लक्षणों को मैनेज करने के लिए क्या किया जा सकता है। आइए जानते हैं-

ब्लैक अस्थमा क्यों होता है? (What causes Black Asthma)

डॉ उज्जवल पारेख के अनुसार, ब्लैक अस्थमा या सीओपीडी फेफड़ों से जुड़ी एक बीमारी है जो धीरे-धीरे लंग्स को कमजोर करती है। यह धीरे-धीरे गम्भीर होती है और क्रोनिक डिजिज का रूप ले लेती है। सर्दियों के मौसम में तापमान कम होने की वजह से सीओपीडी के मामले बढ़ सकते हैं। आमतौर पर ब्लैक अस्थमा उन लोगों में होता है जो स्मोकिंग करते हैं या ऐसी जगहों पर रहते हैं जहां हवा में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। धुआं, धूल-मिट्टी और प्रदूषण के कण धीरे-धीरे सांस की नली और फेफड़ों में जमा होने लगती हैं और धीरे-धीरे ये सीओपीडी का कारण बन जाते हैं।

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बीते कुछ वर्षों में भारत समेत दुनियाभर में सीओपीडी के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। पहले सीओपीडी के 80% मामले ऐसे लोगों में पाए जाते थे जिनमें स्मोकिंग की आदतहोती है। वहीं, अब बीते कुछ वर्षों से यह सीओपीडी के मामले उन लोगों में अधिक पाए जाते हैं जो बिल्कुल धूम्रपान नहीं करते। डॉ पारेख के मुताबिक, नॉन-स्मोकर्स में सीओपीडी (COPD in non-smokers) या ब्लैक अस्थमा बढ़ने के मुख्य कारण(Causes of Black Asthma) ये भी हो सकते हैं-

  • घरेलू गैस के धुएं के सम्पर्क में रहना।
  • अंगीठी या चूल्हे पर काम करना।
  • प्रदूषण
  • बार-बार लंग्स में इंफेक्शन (Lung infection)) होने के कारण भी सीओपीडी का रिस्क (Risk of COPD) बढ़ जाता है।

ब्लैक अस्थमा से बचाव के लिए क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि सीओपीडी या ब्लैक अस्थमा से बचने के लिए आप खुद को प्रदूषण से जितना हो सके उतना बचाकर रखें। वायु प्रदूषण वाले स्थानों पर जाने से बचें। साथ ही इन बातों का ध्यान रखें।

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  • मास्क पहनकर ही घर से बाहर निकलें।
  • स्मोकिंग से बचें।
  • पानी अधिक-से अधिक मात्रा में पिएं ताकि श्वसन मार्ग को साफ रखने में मदद हो सके।
  • किसी भी तरह के लक्षण दिखायी देने पर डॉक्टर से सम्पर्क करें।