एंटीबायोटिक रेसिस्टेंट होने के क्या हो सकते हैं घातक परिणाम ?

कई देशों के एक्सपर्ट्स कहने लगें हैं कि इसका तत्काल समाधान खोजा जाना चाहिए और एंटीबायोटिक रेसिस्टेंट से लड़ने वाली दवाओं की खोज होनी चाहिए।

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Written By: akhilesh dwivedi | Published : November 16, 2018 4:45 PM IST

एंटीबायोटिक रेसिस्टेंट क्या हैं ? एंटीबायोटिक रेसिस्टेंट क्यों खतरनाक है ? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिससे दुनिया को आने वाले समय में दो-चार होना है। दुनियाभर में डॉक्टर्स और मरीजों के द्वारा एंटीबायोटिक्स का दुरुपयोग हो रहा है। एंटीबायोटिक्स के दुरुपयोग से नतीजा यह निकल रहा कि इन एंटीबायोटिक्स का उन पर असर ही नहीं हो रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो बैक्टीरिया एंटीबायोटिक दवाओं से अधिक शक्तिशाली हो गये हैं। यह स्थिति आगे आने वाले समय में और भी भयावह हो सकती है। ऐसा कई देशों के एक्सपर्ट्स कहने लगें हैं कि इसका तत्काल समाधान खोजा जाना चाहिए और एंटीबायोटिक रेसिस्टेंट से लड़ने वाली दवाओं की खोज होनी चाहिए।

क्या हो सकता है ?

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कैसे करें बचाव ?

जिस तरह नई एंटीबायोटिक्स का विकास नहीं हो रहा है और जो एंटीबायोटिक्स हैं, वे बेअसर हो रहे हैं, उसे देखते हुए बेहद ज़रूरी हो गया है कुछ क़दम उठाना, ताकि इन एंटीबायोटिक्स की उम्र को बढ़ाया जा सके और लोगों को एंटीबायोटिक रेज़िस्टेंट इंफेक्शन्स से बचाया जा सके. इसके लिए कई हॉस्पिटल और मेडिकल एसोसिएशन ज़रूरी क़दम उठा रहे हैं और एंटीबायोटिक्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन भी बना रहे हैं, लेकिन आपको व हमें भी कुछ क़दम उठाने होंगे, तभी हम और हमारा परिवार हेल्दी रह सकता है. इसके लिए आप निम्न क़दम उठा सकते हैंः-

  • एंटीबायोटिक्स तभी लें, जब डॉक्टर ने प्रिस्क्राइब किया हो।
  • बल्कि अगर डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक्स लिखकर दें, तो उनसे पूछें कि क्या आपको सचमुच एंटीबायोटिक्स की ज़रूरत है.
  • रोज़ाना नियमित समय पर गोलियां लें और कोर्स ज़रूर पूरा करें।
  • अगर कोर्स पूरा करने के बाद एंटीबायोटिक गोलियां बच गई हों, तो उन्हें फ़ौरन फेंक दें. ये सोचकर उन्हें रखे न रहें कि अगली बार बीमार होने पर खा लेंगे, क्योंकि ज़रूरी नहीं कि अगली बार बीमार होने पर वही एंटीबायोटिक्स असर करे।
  • किसी और व्यक्ति के लिए प्रिस्क्राइब की गई एंटीबायोटिक ख़ुद कभी न लें. भले ही रोग के लक्षण एक समान हों, पर वही एंटीबायोटिक आपकी तकलीफ़ भी दूर करेगी, ये ज़रूरी नहीं।
  • डॉक्टर पर कभी एंटीबायोटिक्स देने के लिए दबाव न डालें। डॉक्टर को ज़रूरी लगेगा, तो वे ख़ुद आपको एंटीबायोटिक्स का कोर्स देंगे।
  • बैक्टीरिया के अटैक से बचने की कोशिश करें. इसके लिए हाइजीन का ख़्याल रखें. अपने हाथ अच्छी तरह धोएं, ख़ासकर टॉयलेट यूज़ करने के बाद और कुछ भी खाने-पीने से पहले. सब्ज़ियां और फल इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह धो लें।
  • बच्चों को ज़रूरी टीके लगवाना न भूलें। कुछ टीके बैक्टीरियल इंफेक्शन से भी सुरक्षा देते हैं।

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