Wastewater surveillance: अब कोरोना वाली इस तकनीक से होगी मंकीपॉक्स इन्फेक्शन की जांच, जानें इस तकनीक के बारे में

Monkeypox outbreak: मंकीपॉक्स के बढ़ते प्रसार को रोकने के लिए सभी स्वास्थ्य विभाग कमर कसे हुए हैं। संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित देश अमेरिका में वेस्ट वाटर सर्विलांस तकनीक की मदद से मंकीपॉक्स के प्रसार पर नजर रखी जाएगी।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : August 9, 2022 12:22 PM IST

मंकीपॉक्स का खौफ लोगों के मन में बढ़ता ही जा रहा है और यहां तक कि लोग अब कोविड 19 के संक्रमण को इग्नोर करने लगे हैं। दुनियाभर में तेजी से फैल रहे मंकीपॉक्स संक्रमण ने सभी स्वास्थ्य विभागों का ध्यान खींचा हुआ है। हर देश के स्वास्थ्य विभाग इसे फैलने से रोकने के लिए अलग-अलग तिगड़म लगाने की कोशिश कर रहे हैं। सीडीसी की वेबसाइट से मिली ताजा जानकारी के अनुसार मंकीपॉक्स सबसे ज्यादा प्रभावित देश अमेरिका ही है। मंकीपॉक्स से निपटने के लिए अमेरिका के स्वास्थ्य विभाग ने भी कम कसी हुई है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सफलता मिल नहीं पा रही है, क्योंकि सीडीसी के अनुसार वहां पर मंकीपॉक्स के 8934 कंफर्म मामले मिल चुके हैं। लेकिन अब शायद अमेरिका के हाथ भी मंकीपॉक्स के मामलों को फैलने से रोकने में सफलता हाथ लग जाए, क्योंकि वहां के विभाग ने कोरोना महामारी की जांच के लिए इस्तेमाल की जान रही तकनीकों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

सीवरेज सर्विलांस तकनीक से होगी जांच

अब अमेरिका में भी उसी तकनीक का इसकी जांच की जाएगी, जिसका इस्तेमाल कोरोना महामारी की जांच करने के लिए किया गया था। दरअसल, सन फ्रांसिस्को के तटीय क्षेत्रों और अमेरिका के कई अन्य क्षेत्रों में सीवेज की जांच की जा रही है, जिसकी मदद से क्षेत्रों के हिसाब के मंकीपॉक्स से प्रसार का पता लगाया जा सकेगा।

कोरोना महामारी की कारगर तकनीक

आपको बता दें कि भारत समेत दुनिया के कई देश कोरोना व मच्छर जनित कई बीमारियों के प्रसार को पकड़ने के लिए वेस्ट वॉटर सर्विलांस तकनीक का इस्तेमाल कर चुके हैं। इस दौरान अलग-अलग जगहों के सीवर से सैंपल लिया गया और उसे जांच के लिए लैब भेज दिया गया था।

इजराइल सदियों से कर रहा है इस्तेमाल

इजराइल इस तकनीक का इस्तेमाल सदियों से कर रहा है। वहां पोलियो जैसी बीमारियों का पता लगाने के लिए वेस्ट वाटर सर्विलांस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। अगर मंकीपॉक्स के पता लगाने में भी इस तकनीक से मदद मिल पाती है, तो हो सकता है अन्य देशों में भी संक्रमण के फैलाव पर नजर रखने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया जा सके।

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