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Written By: Yogita Yadav | Published : July 11, 2018 4:13 PM IST
People suffering from depression or anxiety disorders may be more likely to develop an eating disorder.
फिटनेस के प्रति जागरुकता अच्छी बात है, लेकिन इसके लिए दीवाने हो जाना, यहां तक की खाना-पीना भी छोड़ देना गंभीर खतरे का कारण बन सकता है। गर्मियों में अकसर भूख नहीं लगती। इसकी वजह अधिक पानी पीना और ज्यादा पसीना आना हो सकती है, लेकिन अगर मौसम बदलने के बाद भी भूख नहीं लग रही है तो इसे गंभीरता से लें। यह किसी गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं। कई बार ओवरबर्डन, तनाव, संक्रमण या पेट में कोई समस्या होने की वजह से भी भूख नहीं लग सकती है। खाने से लगातार दूरी और सोच में हमेशा अपने फिगर के साइज के बारे में ही सोचते रहना एनोरेक्सिया नर्वोजा का लक्षण हो सकता है। यह बीमारी इतनी गंभीर है कि व्यक्ति इसमें इतना कमजोर हो जाता है कि उसे नसों के जरिए आहार देना पड़ता है।
क्या है एनोरेक्सिया नर्वोजा
एक प्रकार का आहार संबंधी विकार है। पतले होकर भी अगर खाना खाने से डर लगता है, हमेशा यह आशंका बनी रहती है कि कहीं वजन न बढ़ जाए, एनोरेक्सिया नर्वोसा के लक्षण हैं। इसके शिकार लोग अपने शरीर के प्रति इतने ज्यादा कॉन्शियस हो जाते हैं कि उनकी खानपान की आदतें और सोच एकदम बदल जाती है। एनोरेक्सिया नर्वोजा एक गंभीर मानसिक रोग है जिसमें अस्वस्थता व मृत्युदरें अन्य किसी मानसिक रोग जितनी ही होती हैं।
अचानक वजन कम होना
भोजन के प्रति अरूचि, भूख का लगातार कम होना कई बीमारियों के संकेत हो सकते हैं। कभी-कभार खाना खाने का मन नहीं भी होता। पर यही प्रक्रिया अगर लगातार जारी रहे, तो यह सेहत के लिए खतरनाक हो सकती है। क्योंकि कई बीमारियां ऐसी हैं जिनमें इंसान को भूख नहीं लगती है। अगर आपको भूख नहीं लगती तो पेट संबंधी या किसी तरह का मानसिक विकार भी हो सकता है।
हमेशा थकावट
वजन बढ़ने के प्रति चिंता वाजिब है। लेकिन कुछ लोगों में यह चिंता गहरी बैठ जाती है। कई बार यह उनके लिए मानसिक समस्या का रूप भी ले लेती है। इसी स्थिति को एनोरेक्सिया नर्वोसा कहा जाता है। इस स्थिति में भूख कम होने के साथ-साथ दिल की धड़कन बढ़ जाती है, भोजन के प्रति अनिच्छा रहती है, शरीर में दर्द रहता है और हर समय थकान महसूस होती है।
पुरुषों में बढ़ रही है तादाद
एनोरेक्सिया नर्वोज़ा से ग्रस्त पुरूषों की दर काफी बढी है। यह न सिर्फ एक भयंकर मानसिक रोग है, बल्कि एक कलंक भी है। पुरूषों में होमोसेक्सुअल और बायसेक्सुअल समूहों में इस रोग की संभावना अधिक पाई गई। इसके अलावा भी कई पुरुषों में यह समस्या देखने में आई है। मशहूर हॉलीवुड अभिनेता डेनिस क्वायद ने भी इसके बारे में अपने अनुभव साझा किए हैं। क्वायद ने कहा कि उनकी कठिनाईयां तब शुरू हुईं जब 1994 में फिल्म "व्याट इर्प" में डॉक हॉल्लिडे की भूमिका करने के लिये चालीस पौंड वजन कम करने के लिये वह डायट पर गए। थॉमस हॉलब्रुक ओकोनोमोवॉक, विस्कॉन्सिन के रोजर्स मेमोरियल अस्पताल में आहार विकार कार्यक्रम के क्लिनिकल डायरेक्टर हैं। आहार विकारों के विशेषज्ञ होने के बावज़ूद वे अनिवार्य व्यायाम सहित एनोरेक्सिया नर्वोज़ा से ग्रस्त हो गए। एक समय 6 फीट के मनोवैज्ञानिक का वजन केवल 135 पौंड हो गया था। उनका कहना है कि "मुझे मोटा होने का भय हो गया था।"
उपचार
एनोरेक्सिया नर्वोज़ा का उपचार तीन मुख्य बातों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
चित्रस्रोत: Shutterstock.